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बिहार के इस लोकगीत में दिखती है वहां की असली संस्कृति, इस ठेठ मैथिली गाने पर महिलाएं खेलती हैं 'झिझरी'

Published: Wed, 14 Oct 2026 06:04 PM (IST)Updated: Tue, 20 Oct 2026 10:39 AM (IST)

बिहार में झिझिया नृत्य के साथ एक लोकगीत गाया जाता है। महिलाएं इस गीत को गाकर झिझरी खेलती हैं।

बिहार का मशहूर झिझिया गीत (AI Generated Image)

बिहार का मशहूर झिझिया गीत (AI Generated Image)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। बिहार के गानों का नाम लेते ही अगर आपके दिमाग में सबसे पहले सिर्फ लॉलीपॉप लागेलू आता है, तो शायद आप यहां के लोकगीतों के बारे में नहीं जानते। यहां के लोकगीतों में झिझिया गीत शामिल है, जो झिझिया नृत्य से ही जुड़ा है।

इस गीत के बोल हैं तोहरे भरोसे ब्रह्म बाब झिझरी बनइलिअइ हो। नवरात्र में झिझरी खेलते समय ये गीत गाया जाता है, जो स्थानीय देवता ब्रह्म बाबा को समर्पित है। आइए जानें इस लोकगीत में क्या कहा गया है।  

क्या कहता है ये झिझिया गीत?

इस गीत के जरिए महिलाएं लोक देवता ब्रह्म बाबा को याद करती हैं और उनसे अपनी संतान और अपनी रक्षा के लिए विनती करती हैं। इस गीत की शुरुआत में महिलाएं कहती हैं कि हे ब्रह्म बाबा! हमने आपके ही भरोसे ये झिझिया बनाया है।

झिझिया यानी छेद वाला मटका, जिसे सिर पर रखकर झिझिया नृत्य किया जाता है। आगे महिलाएं कहती हैं कि हम नासमझ हैं और आपकी संतान हैं। आप इस झिझिया पर सवार होकर हमारी रक्षा करें। 

संवाद की तरह गाया गया गीत

इस झिझिया गीत को संवाद की शैली में बनाया गया है, जिसमें सवाल-जवाब सुनने को मिलता है। महिलाएं इस गीत में पूछती हैं कि हरा सुग्गा यानी तोता कहां से आएगा और भैया कहां से आएंगे? जब वो आएंगे, तो मैं उनके साथ झिझरी खेलूंगी। 

इसके बाद महिला कहती है कि हरा सुग्गा ससुराल से आएगा और भाई मायके से। जब ये आएंगे, तो मैं उनके साथ मिलकर झिझरी खेलूंगी। गीत में आगे पूछा जाता है कि सुग्गा को कहां का पानी पिलाऊंगी और भैया को कहां का पानी पिलाऊंगी? इसके जवाब में कहा जाता है कि सुग्गा को झरने का पानी दूंगी और भैया को लोटे का पानी दूंगी और फिर झिझरी खेलूंगी। 

बुरी शक्तियों पर जीत 

झिझिया करने के पीछे की कहानी है कि इस नृत्य को बुरी शक्तियों से बचने के लिए किया जाता है। इस गीत में इसी भाव को आगे जाहिर किया गया है। एक डायन बाबा के पोखर पर मछली मारने जाती है, तो महिलाएं उसे कहती हैं कि चलो ब्रह्म बाबा के पास चलो और लोक देवता ब्रह्म बाबा उस बुरी शक्ति से लड़ते हैं और उसे हरा देते हैं। 

क्यों खास है ये झिझिया गीत?

ये गीत झिझिया नृत्य के दौरान गाया जाता है। इस गीत को गाते हुए महिलाएं सिर पर मिट्टी का छेद वाला मटका रखती हैं और उसमें दीया जलाकर नृत्य करती हैं। इस गीत में बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश दिया गया है कि कैसे लोक देवता बच्चों की रक्षा करते हैं। साथ ही, इस गीत की धुन भी काफी मजेदार होती है, जिस पर झिझिया नृत्य बहुत खूबसूरती के साथ किया जाता है।