छोड़िए यह पुरानी बातें... लो-फाई बीट्स और रिमिक्स के साथ यहां बजते हैं वैदिक मंत्र! जेन जी लाए नया भजन क्लबिंग ट्रेंड
जेन जी इन दिनों बहुत सी वजहों से लोगों के बीच चर्चा का विषय बने हुए हैं, इनमें से एक वजह भजन क्लबिंग भी है। ...और पढ़ें

भजन क्लबिंग ट्रेंड (Image Source: AI Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। शहरी कल्चर और मॉडर्न दुनिया का जिक्र जब भी होता है तो शराब, क्लबिंग, सिगरेट और वेस्टर्न कपड़ों के फैशन जैसी बातें दिमाग में घूमने लगती हैं। लेकिन ये जेन जी अब इस पुरानी मानसिकता को बदल रहे हैं, उनकी दुनिया अब इस बिगड़ते लाइफस्टाइल से भक्ति की तरफ जा रही है। ऐसा इसलिए क्योंकि बीते कुछ समय से देश में भजन क्लबिंग का ट्रेंड देखने को मिला है। यह बदलाव पॉजिटिव होने के साथ नए कल्चर की शुरुआत भी है, ट्रेडिशनल तौर-तरीकों को तोड़ने की शुरुआत।
क्या है भजन क्लबिंग ट्रेंड?
भजन क्लबिंग भारत में बढ़ता हुआ एक स्पिरिचुअल और सोशल ट्रेंड है, जिसे हम नए जमाने का छोटा सा भक्ति आंदोलन कहें तो कोई दो राय नहीं। जिसमें लोग बिना नशा किये भक्ति गीतों में खो जाते हैं और उस समय का आनंद लेते हैं। यह यूरोप और अमेरिका में पॉपुलर हो रहे सोबर क्यूरियस और वेंट्स या कॉफी रेव्स का ही एक इंडियन वर्जन है। बस फर्क इतना है कि इसमें भक्ति शामिल है!
संगीत पुराना पर अंदाज नया
भजन क्लबिंग में वही सदियों पुराने भजन और मंत्र शामिल हैं, जिसे सुनते हुए हम बड़े हुए हैं। बस उसमें मॉडर्न टच जुड़ गया है। बता दें कि इस तरह की क्लबिंग में मंत्रों और भजनों को टेक्नो या लो-फाई बीट्स के साथ रीमिक्स करके गाया जाता है, साथ में क्लब की लाइटिंग महौल जल्दी बनाने में मदद करती है। इसकी एक खास बात और है कि यहां पहनावे का कोई दबाव नहीं, सभी जींस, शर्ट या टी शर्ट में इस क्लब में शामिल हो सकते हैं। यह आजादी भजन क्लबिंग ट्रेंड को और बढ़ा रही है। अब जेन जी मंदिरों में ट्रेडिशनल पूजा करने की जगह क्लबिंग करना पसंद कर रहे हैं। दूसरे शब्दों में कहें तो यह स्पिरिचुअलिटी का कूल अंदाज है।
भजन क्लबिंग के फायदे
अब क्योंकि क्लबिंग में शराब-सिगरेट जैसी चीजें शामिल नहीं है तो शारीरिक सेहत के लिहाज से यह अच्छा है।
वहीं, मंत्रों का उच्चारण संगीत के माध्यम से होता है जो स्ट्रेस को कम करने में मदद करता है।
नए जमाने के कल्चर का अध्यात्म के साथ मेल देखने पर लगता है कि जेन जी अपनी जड़ों की तरफ लौट रहे हैं।
सोशल होने का यह तरीका रिश्तों में भी सुधार करता है।
यह भी पढ़ें- कैफे हुए पुराने, अब कब्रिस्तान बन रहे हैं डेट स्पॉट! क्यों युवाओं को पसंद आ रहा Graveyard Dating का ट्रेंड
यह भी पढ़ें- 'आलसी' नहीं, बस बाउंड्री सेट कर रहे हैं Gen-Z; पैसों से ज्यादा 'मेंटल पीस' को दे रहे तवज्जो