मानसून आते ही क्यों बढ़ जाता है जोड़ों का दर्द? सही वजह जान लेंगे, तो हाथ-पैरों में नहीं बढ़ेगी तकलीफ
4 अगस्त को हर साल 'नेशनल बोन एंड जॉइंट डे' मनाया जाता है। इस आर्टिकल में आप जानेंगे कि कैसे हल्की एक्सरसाइज करते रहना जोड़ों को स्थायी नुकसान से बचाने ...और पढ़ें

बारिश के मौसम में जोड़ों के दर्द से हैं परेशान? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। चिलचिलाती गर्मी के बाद जब मानसून दस्तक देता है, तो मन को तो बहुत सुकून मिलता है, लेकिन कई लोगों के लिए यह मौसम एक नई मुसीबत खड़ी कर देता है। जोड़ों में दर्द, सूजन और शरीर में अकड़न की समस्या इस दौरान आम हो जाती है।
रूमेटाइड आर्थराइटिस और ऑस्टियोआर्थराइटिस के मरीजों, या पुरानी चोट वाले लोगों के लिए यह मौसम शारीरिक परेशानियां बढ़ा देता है। जी हां, बारिश के दिनों में जोड़ों का दर्द बढ़ना कोई दिमागी वहम नहीं है, बल्कि इसके पीछे पूरी तरह से वैज्ञानिक और मौसम से जुड़े बदलाव जिम्मेदार होते हैं।
बारिश में जोड़ों के दर्द के वैज्ञानिक कारण
बायोमेट्रिक प्रेशर में गिरावट
बारिश शुरू होने से पहले और उसके दौरान वायुमंडल का दबाव काफी गिर जाता है। इस कमी की वजह से हमारे जोड़ों के आसपास मौजूद टिश्यूज थोड़े फैलने लगते हैं। जिन जोड़ों में पहले से सूजन या गठिया की शिकायत है, वहां यह फैलाव संवेदनशील नसों पर एक्स्ट्रा दबाव डालता है, जिससे दर्द और अकड़न शुरू हो जाती है।
तापमान का गिरना और नसों का सिकुड़ना
जब मौसम अचानक ठंडा होता है, तो शरीर की ब्लड वेसल्स सिकुड़ने लगती हैं। इससे शरीर के बाहरी अंगों तक खून का बहाव कम हो जाता है। ठंडी और नमी वाली हवा के कारण जोड़ों के आसपास के टेंडन और लिगामेंट सख्त हो जाते हैं, जिससे हाथ-पैर मोड़ने में तकलीफ होती है।
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ह्यूमिडिटी का असर
मानसून में हवा में नमी बहुत ज्यादा होती है, जिससे शरीर का प्राकृतिक 'फ्लूइड बैलेंस' बिगड़ जाता है। पसीना कम निकलने और अत्यधिक नमी के कारण शरीर के टिश्यूज में लिक्विड जमा होने लगता है। इसी वजह से हाथों, टखनों और खासकर घुटनों के जोड़ों में सूजन आ जाती है और वे अकड़ जाते हैं।
फिजिकल एक्टिविटीज में कमी
लगातार बारिश के कारण बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है, जिससे लोग घर में एक ही जगह बैठे रहते हैं। चलने-फिरने की इस कमी के कारण जोड़ों को चिकनाहट देने वाले साइनोवियल फ्लूइड का बहाव रुक जाता है। नतीजतन, जब आप काफी देर बाद हिलते-डुलते हैं, तो जोड़ जकड़े हुए महसूस होते हैं।
इस मानसून अपने जोड़ों की कैसे करें देखभाल?
कुछ बेहद आसान और कारगर उपाय हैं, जिन्हें अपनाकर आप इस मौसम में जोड़ों के दर्द से राहत पा सकते हैं:
- ठंड और नमी से बचें: एसी की ठंडी हवा में सीधे बैठने या देर तक गीले कपड़े पहनने से बचें। अगर आपके जोड़ों में ज्यादा दर्द रहता है, तो घुटनों पर स्लीव्स पहनें या उन्हें हल्के गर्म कपड़े से लपेट कर रखें।
- घर पर ही एक्सरसाइज करें: अगर बाहर बारिश हो रही है, तो घर के अंदर ही टहलें। जोड़ों में फ्लूइड का बहाव बनाए रखने और मांसपेशियों की मजबूती के लिए हल्की स्ट्रेचिंग या लो-इम्पैक्ट योगा करें।
- गर्म सिकाई का इस्तेमाल: दर्द वाली जगह पर 15 से 20 मिनट तक हीटिंग पैड या गर्म पानी की थैली रखें। इससे वहां खून का बहाव तेज होता है और मांसपेशियों की जकड़न खुलती है।
- खानपान और पानी पर ध्यान दें: पूरे दिन थोड़ी-थोड़ी मात्रा में गुनगुना पानी पीते रहें। अपने भोजन में ऐसी प्राकृतिक चीजें शामिल करें जो सूजन को कम करती हैं, जैसे- हल्दी, अदरक, ओमेगा-3 वाले आहार और अखरोट।
- विटामिन-डी की कमी न होने दें: बादलों के कारण इस मौसम में धूप कम मिलती है, जिससे शरीर में विटामिन डी का स्तर गिर सकता है। हड्डियों की सेहत के लिए यह बहुत जरूरी है। यदि आवश्यक हो, तो डॉक्टर से पूछकर विटामिन डी के सप्लीमेंट लें।
कब जाएं डॉक्टर के पास?
बारिश के दिनों में हल्की-फुल्की अकड़न होना सामान्य है, लेकिन अगर जोड़ों में लगातार सूजन बनी हुई है, लालिमा है, गर्माहट महसूस हो रही है, या आप अपने पैरों पर वजन नहीं डाल पा रहे हैं, तो तुरंत सावधान हो जाएं।
(डॉ. ईश्वर बोहरा, बीएलके मैक्स सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में जॉइंट रिप्लेसमेंट प्रोग्राम के सीनियर डायरेक्टर हैं।)
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