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    क्यों कुछ लोग सिर्फ अपने घर के टॉयलेट में ही हो पाते हैं फ्रेश? यहां पढ़ें क्या है इसके पीछे का साइंस

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 12:11 PM (IST)

    कुछ लोगों को अपने घर के अलावा, और कहीं भी फ्रेश होने में मुश्किल होती है। इसे शाय बॉवेल सिंड्रोम कहा जाता है। आपको बता दें, यह कोई बीमारी नहीं है और क ...और पढ़ें

    क्यों कुछ लोगों बाहर नहीं हो पाते फ्रेश? (AI Generated Image)

    क्यों कुछ लोगों बाहर नहीं हो पाते फ्रेश? (AI Generated Image)

    HighLights

    1. कुछ लोग बाहर फ्रेश नहीं हो पाते

    2. इसे शाय बॉवेल सिंड्रोम कहते हैं

    3. यह एक साइकोलॉजिकल कंडीशन है

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि आप किसी ऑफिस ट्रिप पर हों, किसी दोस्त के घर रुके हों या मॉल के टॉयलेट में हों, और आपको जोरों की जरूरत महसूस हो रही हो, लेकिन पॉट पर बैठते ही सब कुछ 'जाम' हो जाए? 

    अगर हां, तो आप अकेले नहीं हैं। इसे मेडिकल भाषा में पार्कोपेरेसिस (Parcopresis) कहा जाता है, जिसे आम बोलचाल में 'शाय बॉवेल सिंड्रोम' (Shy Bowel Syndrome) कहते हैं। यह कोई शारीरिक बीमारी नहीं, बल्कि एक मनोवैज्ञानिक स्थिति है जिसमें व्यक्ति सार्वजनिक शौचालयों या दूसरों की उपस्थिति में मल त्याग (poop) करने में असमर्थ महसूस करता है। आइए जानें इस सिंड्रोम के बारे में। 

    क्यों होता है 'शाय बॉवेल सिंड्रोम'?

    इसके पीछे मुख्य कारण कोई शारीरिक कमजोरी नहीं, बल्कि हमारा दिमाग और नर्वस सिस्टम है। इसके कुछ ऐसे  कारण हो सकते हैं-

    • प्राइवेसी और शर्म- सबसे बड़ा कारण सामाजिक शर्मिंदगी का डर है। लोगों को लगता है कि टॉयलेट से आने वाली आवाजों या गंध से दूसरे लोग उनके बारे में क्या सोचेंगे।
    • इवोल्यूशनरी रिस्पॉन्स- जब हम असुरक्षित महसूस करते हैं, तो हमारा शरीर 'सिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम' को एक्टिव कर देता है। मल त्यागने के लिए शरीर का रिलैक्स होना जरूरी है, लेकिन डर या घबराहट की स्थिति में मांसपेशियां सिकुड़ जाती हैं, जिससे प्रक्रिया रुक जाती है।
    • बचपन के अनुभव- कई बार बचपन में टॉयलेट ट्रेनिंग के दौरान मिली डांट या स्कूल के गंदे टॉयलेट्स का बुरा अनुभव मन में बैठ जाता है, जो बड़े होने पर इस सिंड्रोम का रूप ले लेता है।
    • हाइजीन की चिंता- कुछ लोग गंदगी को लेकर बहुत सेंसिटिव होते हैं। उन्हें लगता है कि पब्लिक टॉयलेट उनके घर जितने साफ नहीं हैं, जिससे वे वहां असहज महसूस करते हैं।
    shy bowel syndrome (1)
     
    (Picture Courtesy: Freepik)

    शरीर पर इसका असर

    सिर्फ घर पर ही पूप करने की आदत शुरू में मामूली लग सकती है, लेकिन लंबे समय तक प्रेशर को रोकने से सेहत पर बुरा असर पड़ता है-

    • कब्ज- मल को बार-बार रोकने से वह सख्त हो जाता है, जिससे कब्ज की समस्या पैदा होती है।
    • बवासीर- प्रेशर रोकने और बाद में जोर लगाने से नसों पर दबाव बढ़ता है।
    • मेंटल स्ट्रेस- यात्रा या ऑफिस के दौरान व्यक्ति हर समय पेट को लेकर चिंतित रहता है, जिससे उसकी प्रोडक्टिविटी प्रभावित होती है।

    इस स्थिति से कैसे निपटें?

    शाय बॉवेल सिंड्रोम से बाहर निकलना मुमकिन है। इसके लिए आप ये तरीके अपना सकते हैं-

    खबरें और भी

    • ग्रेजुअल एक्सपोजर- धीरे-धीरे बाहर के टॉयलेट्स का इस्तेमाल शुरू करें। पहले खाली पब्लिक टॉयलेट से शुरुआत करें, फिर धीरे-धीरे भीड़ वाली जगहों पर कोशिश करें।
    • मास्किंग- आवाजों के डर को कम करने के लिए अपने फोन पर म्यूजिक सुन सकते हैं ताकि आपका ध्यान बाहरी शोर पर न जाए।
    • ब्रीदिंग एक्सरसाइज- जब आप टॉयलेट में हों, तो गहरी सांस लें। इससे आपका 'पैरासिम्पैथेटिक नर्वस सिस्टम' एक्टिव होगा, जो शरीर को रिलैक्स करने में मदद करता है।
    Disclaimer: लेख में उल्लिखित सलाह और सुझाव सिर्फ सामान्य सूचना के उद्देश्य के लिए हैं और इन्हें पेशेवर चिकित्सा सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए। कोई भी सवाल या परेशानी हो तो हमेशा अपने डॉक्टर से सलाह लें।