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70-80 के दशक का फास्ट फूड कल्चर अब बन रहा जानलेवा, Gen X की 21% महिलाओं को है प्रोसेस्ड फूड की लत

Published: Sun, 01 Feb 2026 02:42 PM (IST)

मिशिगन यूनिवर्सिटी के एक रिसर्च के अनुसार, 55-60 वर्ष की आयु के जेनरेशन एक्स (Gen X) में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स की ...और पढ़ें

जेन- एक्स में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स की लत (Picture Courtesy: Freepik)

जेन- एक्स में अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड्स की लत (Picture Courtesy: Freepik)

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप जानते हैं कि 55 से 60 साल की उम्र के लोगों में एक बेहद खतरनाक लत घर कर चुकी है? यूनिवर्सिटी ऑफ मिशिगन की एक हालिया रिसर्च ने चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। इस रिसर्च के मुताबिक, जेनरेशन एक्स (Gen X) में अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड्स खाने की गंभीर लत चुकी है।

शराब और स्मोकिंग से भी बड़ा खतरा

आंकड़े बताते हैं कि इस उम्र की 21% महिलाएं और 10% पुरुष प्रोसेस्ड फूड्स की लत का शिकार हैं। हैरानी की बात यह है कि इसी आयु वर्ग में शराब की लत केवल 1.5% और स्मोकिंग की लत मात्र 4% लोगों में पाई गई है। यह बताता है कि पैकेट बंद खाने का मोह सिर्फ बच्चों के लिए ही नहीं, बल्कि वयस्कों के लिए भी एक स्वास्थ्य संकट बन चुका है।

क्या है अल्ट्रा-प्रोसेस्ड फूड?

अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड ऐसे खाने को कहते हैं, जिसे बनाने में ऐसे केमिकल्स का इस्तेमाल होता है और हमारी रसोई में नहीं मिलते। इसमें प्रिजर्वेटिव, आर्टिफिशियल फ्लेवर, इमल्सीफायर और आर्टिफिशियल रंग भारी मात्रा में होते हैं। 70 और 80 के दशक में, जब जेनरेशन एक्स के लोग बच्चे थे, तब दुनिया में खाने के लिए कोई सख्त न्यूट्रिशनल स्टैंडर्ड नहीं थे। इसी का नतीजा है कि यह पीढ़ी बिना किसी चेतावनी के इन हानिकारक फूड्स के संपर्क में आई।

Ultra Processed foods (1)

(Picture Courtesy: Freepik)

बचपन की आदत बनी आज की मुसीबत

डॉक्टरों के अनुसार, जेनरेशन एक्स पहली ऐसी पीढ़ी थी जिसने बचपन से ही अल्ट्रा प्रोसेस्ड फूड को मजेदार और सामान्य खाना माना। उस दौर में टीवी पर रंग-बिरंगे पैकेट वाले स्नैक्स और फास्ट फूड के लुभावने विज्ञापन चलते थे। माता-पिता के काम पर होने के कारण, बच्चों ने फ्रेंच ब्रेड पिज्जा और रेडी-टू-ईट मील्स को ही अपना मुख्य खान-पान बना लिया।

बूमर पीढ़ी क्यों रही सुरक्षित?

रिसर्च की तुलना में 75 से 80 साल के लोग इस लत से काफी हद तक बचे हुए हैं। इनमें केवल 4% पुरुषों में ही यह लत पाई गई। इसका मुख्य कारण यह है कि उन्हें घर का खाना बनाना सिखाया गया था और उन्होंने इस आदत को हमेशा बनाए रखा।

लो-फैट और डाइट फूड का मायाजाल

1980 के दशक में कंपनियों ने महिलाओं को लुभाने के लिए लो-फैट और डाइट फूड्स को सेहतमंद बताकर प्रचारित किया। इन फूड्स में फैट कम करने के चक्कर में चीनी और आर्टिफिशियल स्वीटनर बढ़ा दिए गए। इससे लोगों में शुगर की क्रेविंग और ज्यादा बढ़ गई, जिसने इस लत को और मजबूत कर दिया।



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