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लगातार खांसी और सांस फूलने को न समझें मामूली, हो सकता है दिल की गंभीर बीमारी का संकेत

Published: Wed, 15 Jul 2026 01:37 PM (IST)

एक मरीज की लगातार खांसी और सांस फूलने की समस्या गंभीर दिल की बीमारी का संकेत निकली, जिसमें उनके हार्ट के दो वाल्व सिकुड़ गए थे।

महीनों की खांसी और थकान थी हार्ट वाल्व डैमेज की चेतावनी (Image Source: AI-Generated)

महीनों की खांसी और थकान थी हार्ट वाल्व डैमेज की चेतावनी (Image Source: AI-Generated) 

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लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। क्या आप सोच सकते हैं कि लंबे समय तक चलने वाली खांसी और सांस फूलने की समस्या सीधे आपके दिल से जुड़ी हो सकती है?

जी हां, एक मरीज के साथ बिल्कुल ऐसा ही हुआ। आइए जानते हैं कि कैसे एक मामूली-सी लगने वाली समस्या एक गंभीर हार्ट कंडीशन में बदल गई और इस पूरे मामले पर डॉक्टर का क्या कहना है। 

persistent cough and breathing difficulty

(Image Source: AI-Generated) 

खांसी की जांच में सामने आई दिल की गंभीर बीमारी

एक मरीज लगभग एक महीने से लगातार खांसी से परेशान था। दवाइयों से उन्हें कुछ समय के लिए आराम तो मिलता, लेकिन कुछ ही हफ्तों में खांसी और ज्यादा बिगड़ गई। इसके साथ ही उनकी सांस फूलने लगी और ऑक्सीजन का स्तर भी काफी गिर गया।

मरीज को लगा कि वह सिर्फ अपनी खांसी की जांच कराने अस्पताल जा रहे हैं, लेकिन वहां जाकर वे हैरान रह गए। जांच में पता चला कि उनके दिल के दो वाल्व बुरी तरह से प्रभावित थे और उन्हें तुरंत इलाज की जरूरत थी।

लगातार तेज धड़कन को न करें इग्नोर

कैलाश दीपक अस्पताल के सीटीवीएस के डायरेक्टर डॉ. मितेश बी. शर्मा ने इस केस का इलाज किया और मामले की पूरी जानकारी दी। डॉ. शर्मा बताते हैं कि, "मरीज हमारे पास सांस फूलने, थकान और लगातार तेज धड़कन जैसी समस्याओं के साथ आए थे। वे पिछले कई महीनों से इस समस्या का सामना कर रहे थे और बहुत जल्दी थक जाते थे।"

डॉक्टर ने जब मरीज की गहराई से जांच की, तो असल बीमारी सामने आई। जांच में पता चला कि मरीज के दिल के दोनों वाल्व- 'एओर्टिक' और 'मिट्रल' बुरी तरह से सिकुड़ गए थे।

कैसे काम करते हैं हार्ट वाल्व और क्या थी समस्या?

डॉ. शर्मा ने दिल के इन वाल्व्स के काम करने के तरीके को बेहद आसान शब्दों में समझाया है:

  • मिट्रल वाल्व: यह खून को बाएं एट्रियम से बाएं वेंट्रिकल में ले जाने में मदद करता है।
  • एओर्टिक वाल्व: यह खून को बाएं वेंट्रिकल से एओर्टा में भेजने का काम करता है।

डॉ. शर्मा के अनुसार, जब ये वाल्व सिकुड़ जाते हैं, तो दिल के लिए सही और प्रभावी तरीके से खून को पंप करना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसका सीधा असर यह होता है कि दिल पर बहुत ज्यादा एक्स्ट्रा दबाव पड़ने लगता है।

बायोलॉजिकल वाल्व को क्यों दी गई प्राथमिकता?

बीमारी की गंभीरता को देखते हुए मरीज के लिए 'डबल-वाल्व रिप्लेसमेंट सर्जरी' करना बेहद जरूरी हो गया था। डॉ. शर्मा बताते हैं कि मरीज की उम्र और उनकी पूरी क्लिनिकल प्रोफाइल को ध्यान में रखते हुए, डॉक्टरों की टीम ने 'बायोलॉजिकल वाल्व' लगाने की सलाह दी।

क्या होते हैं बायोलॉजिकल वाल्व और ये क्यों बेहतर हैं?

डॉ. शर्मा के अनुसार, बायोलॉजिकल वाल्व जानवरों के टिश्यू से बने खास वाल्व होते हैं, जिन्हें इंसानी शरीर के अनुकूल बनाने के लिए विशेष रूप से ट्रीट किया जाता है।

डॉक्टर ने मैटेलिक वाल्व की जगह बायोलॉजिकल वाल्व को इसलिए चुना क्योंकि:

  • मैटेलिक वाल्व में मरीज को जीवन भर खून पतला करने वाली दवाइयां खानी पड़ती हैं और लगातार ब्लड टेस्ट करवाने पड़ते हैं।
  • बायोलॉजिकल वाल्व में मरीज को खून पतला करने वाली दवाइयां सिर्फ एक सीमित समय के लिए ही लेनी पड़ती हैं।

इस तरह, बायोलॉजिकल वाल्व ने मरीज को जिंदगी भर दवाइयां खाने के झंझट से बचाते हुए एक बेहतरीन और लंबा समाधान दिया।

सही समय पर इलाज से आसान हुई रिकवरी

डॉ. शर्मा ने बताया कि सर्जरी पूरी तरह से सफल रही और दोनों वाल्व बहुत अच्छी तरह से बदल दिए गए। मरीज ने बहुत तेजी से रिकवरी की और कुछ ही दिनों में वे अस्पताल से घर जाने में सक्षम हो गए। जब वे फॉलो-अप के लिए वापस आए, तो उनकी स्थिति बहुत अच्छी थी। आज मरीज खुद को स्वस्थ और एक्टिव महसूस कर रहा है।

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