क्या प्रेग्नेंसी में खून की कमी बन सकती है बच्चे में दिमागी कमजोरी की वजह? डॉक्टर ने बताई सच्चाई
प्रेग्नेंसी के दौरान मां की सेहत का सीधा असर गर्भ में पल रहे नन्हे मेहमान के विकास पर पड़ता है। आइए, डॉक्टर से डिटेल में जानते हैं इस बारे में। ...और पढ़ें

गर्भावस्था में हीमोग्लोबिन कम होना क्यों है खतरनाक? (Image Source: AI-Generated)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। प्रेग्नेंसी का समय हर महिला के लिए बहुत खास होता है। इस दौरान मां की सेहत का सीधा असर गर्भ में पल रहे शिशु के विकास पर पड़ता है। अक्सर कई गर्भवती महिलाओं में 'एनीमिया' यानी खून की कमी की समस्या देखी जाती है।
जब गर्भवती महिला के शरीर में हीमोग्लोबिन का स्तर गिर जाता है, तो खून के जरिए शरीर और गर्भ में पल रहे भ्रूण तक पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती है। यह स्थिति न सिर्फ मां के लिए थका देने वाली होती है, बल्कि यह बच्चे के दिमागी विकास को भी गहराई से प्रभावित कर सकती है।
आइए, आर्ट ऑफ हीलिंग कैंसर' की मेडिकल डायरेक्टर, डॉ. सोनल जैन से जानते हैं कि प्रेग्नेंसी में खून की कमी का बच्चे पर क्या असर पड़ता है और इससे कैसे बचा जा सकता है।

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शिशु के दिमागी विकास में आती है रुकावट
गर्भ में बच्चे का दिमाग बहुत तेजी से विकसित होता है, खासकर प्रेगनेंसी के शुरुआती महीनों में। ऐसे में, अगर मां के शरीर में आयरन की कमी हो जाए, तो बच्चे को जरूरी पोषण और ऑक्सीजन सही मात्रा में नहीं मिल पाते।
- कोशिकाओं पर असर: ऑक्सीजन और पोषण की कमी का सीधा असर बच्चे के दिमाग की कोशिकाओं के बनने और उनके आपस में जुड़ने की प्रक्रिया पर पड़ता है।
- याददाश्त और सीखने की क्षमता: भविष्य में इसके कारण बच्चे की याददाश्त, कुछ भी नया सीखने की क्षमता और फोकस करने की शक्ति कमजोर हो सकती है।

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मेंटल और इमोशनल हेल्थ पर असर
आयरन केवल शरीर में खून बढ़ाने का काम ही नहीं करता, बल्कि यह दिमाग में न्यूरोट्रांसमीटर बनाने में भी मदद करता है। जब मां को एनीमिया होता है, तो इन केमिकल्स के बनने की प्रक्रिया बाधित हो सकती है। इसका नतीजा यह होता है कि बच्चे के मानसिक और भावनात्मक विकास पर बुरा असर पड़ता है। कुछ मामलों में आगे चलकर ऐसे बच्चों में व्यवहार से जुड़ी समस्याएं भी देखने को मिल सकती हैं।

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क्या है डॉक्टर की सलाह?
डॉ. सोनल जैन के अनुसार, सही समय पर पहचान और इलाज से इस समस्या को काफी हद तक रोका जा सकता है। गर्भावस्था के दौरान खून की कमी से बचने के लिए इन बातों का खास ख्याल रखना चाहिए:
- नियमित जांच करवाएं: गर्भावस्था के दौरान समय-समय पर अपनी जांच करवाना बेहद जरूरी है ताकि खून की कमी का सही समय पर पता चल सके।
- दवाइयों का सेवन: डॉक्टर की सलाह से आयरन और फोलिक एसिड की गोलियां नियमित रूप से लें।
- आयरन से भरपूर डाइट: बैलेंस डाइट लेना बहुत जरूरी है। अपने रोजमर्रा के खाने में उन चीजों को शामिल करें जिनसे खून बढ़ता है।
- आयरन के मुख्य स्रोत: अपनी डाइट में हरी पत्तेदार सब्जियां, दालें, चुकंदर, गुड़ और सूखे मेवे जरूर शामिल करें, क्योंकि ये आयरन के बहुत अच्छे सोर्स माने जाते हैं।
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