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सिर्फ फेफड़े ही नहीं, आपके जोड़ों के लिए भी घातक है प्रदूषण; PM 2.5 बढ़ा रहा रुमेटाइड अर्थराइटिस का खतरा

Published: Mon, 14 Sep 2026 11:54 AM (IST)

हाल ही में हुए एक अध्ययन में सामने आया है कि हवा में मौजूद PM 2.5 प्रदूषण रुमेटाइड अर्थराइटिस के लक्षणों को गंभीर बना सकता है।

क्या हवा में मौजूद प्रदूषण बढ़ा रहा है आपके जोड़ों का दर्द? (Image Source: AI-Generated)

क्या हवा में मौजूद प्रदूषण बढ़ा रहा है आपके जोड़ों का दर्द? (Image Source: AI-Generated)


HighLights

  1. PM 2.5 प्रदूषण रुमेटाइड अर्थराइटिस के लक्षणों को गंभीर रूप से बढ़ाता है

  2. सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी ने 1,000 से अधिक मरीजों पर गहन अध्ययन किया

  3. धूम्रपान, मौसम और अन्य प्रदूषक भी इस बीमारी के प्रमुख कारण हैं

प्रेट्र, नई दिल्ली। क्या हवा में मौजूद प्रदूषण आपके जोड़ों की समस्या को और खतरनाक बना रहा है? हाल ही में हुई एक ताजा स्टडी में यह चौंकाने वाली बात सामने आई है कि हवा में मौजूद पीएम 2.5 प्रदूषण के संपर्क में आने से रुमेटाइड अर्थराइटिस की बीमारी और इसके लक्षण गंभीर रूप से बढ़ सकते हैं।

क्या है रुमेटाइड अर्थराइटिस?

यह एक लंबे समय तक चलने वाली ऑटोइम्यून बीमारी है। इस बीमारी में इंसान की अपनी ही प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगती है। इसके परिणामस्वरूप, जोड़ों में गंभीर सूजन आ जाती है और उन्हें भारी नुकसान पहुंचता है।

1,000 से अधिक मरीजों पर हुआ गहन अध्ययन

यह महत्वपूर्ण रिसर्च 'सियोल नेशनल यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन' के शोधकर्ताओं द्वारा की गई है। इस शोध के लिए दक्षिण कोरिया के एक चिकित्सा केंद्र में रुमेटाइड अर्थराइटिस से पीड़ित 1,000 से ज्यादा मरीजों का गहराई से अध्ययन किया गया।

शोध के दौरान वायु प्रदूषण के संपर्क का अनुमान लगाने के लिए छह प्रमुख प्रदूषकों की सांद्रता का उपयोग किया गया, जिनमें शामिल हैं- सल्फर डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन डाइऑक्साइड, ओजोन, कार्बन मोनोऑक्साइड, पीएम 10 और पीएम 2.5। इन सभी आंकड़ों का विश्लेषण करने के बाद, पीएम 2.5 को रुमेटाइड अर्थराइटिस को बढ़ाने वाला एक प्रमुख योगदानकर्ता माना गया है।

धूम्रपान के अलावा मौसम और प्रदूषण भी हैं जिम्मेदार

शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया है कि धूम्रपान इस बीमारी के खतरे को बढ़ाने वाला एक जाना-माना कारण है। हालांकि, इसके अलावा भी कई चीजें असर डालती हैं। जलवायु से जुड़े कारक- जैसे हवा, तापमान और आर्द्रता के साथ-साथ सिलिका जैसे प्रदूषक तत्व भी इस ऑटोइम्यून स्थिति को पैदा करने में अहम भूमिका निभाते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और नीति निर्माताओं के लिए चेतावनी

यह अहम शोध प्रसिद्ध मेडिकल जर्नल एनल्स ऑफ द रुमैटिक डिजीज में प्रकाशित हुआ है। इस रिसर्च के नतीजों ने स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और नीति निर्माताओं के लिए एक बड़ा संदेश दिया है। शोध में इस बात पर जोर दिया गया है कि अब संबंधित अधिकारियों और स्वास्थ्य कर्मियों को यह समझना बेहद जरूरी है कि वायु प्रदूषण का रोग प्रबंधन और इलाज पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।

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