हल्दी-बेसन से 'हाइब्रिड ब्यूटी' तक: कैसे बदल गई भारतीय महिलाओं के लिए सुंदरता के मायने
पिछले कुछ दशकों में सुदंरता के मायने पूरी तरह बदल चुके हैं। पहले घरेलू नुस्खों को ज्यादा तवज्जो दी जाती थी, वहीं अब लोग हाइब्रिड ब्यूटी को पसंद कर रहे ...और पढ़ें

कैसे बदल गई भारतीय महिलाओं की ड्रेसिंग टेबल? (AI Generated Image)

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। भारत में महिलाओं के सजने-संवरने और खुद की देखभाल करने का अंदाज समय के साथ पूरी तरह बदल चुका है। पहले के समय में जहां सुंदरता के लिए प्राकृतिक और घरेलू नुस्खों का इस्तेमाल होता था, वहीं आज यह अरबों का बाजार बन चुका है।
पहले सुंदरता का सीधा मतलब बोता था केवल घरेलू नुस्खे आजमाना या किसी खास अवसर पर तैयार होना, लेकिन आज के दौर में यह सिर्फ सजने-संवरने तक सीमित नहीं है। यह आत्मविश्वास, लाइफस्टाइल, सेल्फ केयर, सोशल मीडिया पर मौजूदगी और खुद की पहचान का एक अहम हिस्सा बन चुका है।
पारंपरिक नुस्खों से हाइब्रिड ब्यूटी का सफर
बीते दो दशकों में भारतीय ब्यूटी कल्चर में एक बहुत बड़ा बदलाव आया है। एक समय था जब ब्यूटी इंडस्ट्री का सबसे बड़ा वादा केवल गोरा दिखाना होता था, लेकिन आज की महिलाएं स्किन हेल्थ, ग्लो, सन प्रोटेक्शन, हाइड्रेशन और एंटी-एजिंग जैसी चीजों को ज्यादा अहमियत दे रही हैं।
अब महिलाएं खरीदारी करने से पहले यह अच्छी तरह जानना चाहती हैं कि किसी प्रोडक्ट में कौन-से एक्टिव इंग्रीडिएंट्स मिले हुए हैं और वह उनकी त्वचा पर क्या असर डालेंगे। खासतौर से कोविड के बाद से स्किन-फर्स्ट और स्किन मिनिमलिज्म यानी कम, लेकिन असरदार प्रोडक्ट्स के इस्तेमाल का चलन तेजी से बढ़ा है। इसी वजह से आजकल हाइब्रिड ब्यूटी काफी लोकप्रिय हो रही है।
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इसका मतलब है ऐसे प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करना जो मेकअप और स्किनकेयर दोनों का काम एक साथ कर सकें, जैसे कि एसपीएफ वाला फाउंडेशन, सीरम वाला कंसीलर या फिर मॉइश्चराइजर प्राइमर कॉम्बो।
कैसे बदला सुंदरता का पैमाना?
भारतीय महिलाओं की ड्रेसिंग टेबल पर आए इस बदलाव को हम अलग-अलग दशकों के हिसाब से आसानी से समझ सकते हैं-
- 1950-60 का दौर- इस दौर में ब्यूटी केयर का मतलब बेसन, मलाई, हल्दी, गुलाबजल और नारियल तेल हुआ करता था। ड्रेसिंग टेबल पर केवल टैल्कम पाउडर, काजल और सिंदूर ही नजर आते थे और मेकअप सिर्फ शादियों या खास मौकों तक ही सीमित था।
- 1960-80 का दौर- इस समय फिल्मों की अभिनेत्रियों के हेयरस्टाइल और चटक मेकअप की डिमांड बढ़ने लगी। रंगीन लिपस्टिक, नेल पॉलिश और कॉम्पैक्ट पाउडर चलन में आए। गोरी त्वचा को सुंदरता का प्रतीक माना जाने लगा, जिससे फेयरनेस क्रीम का बाजार तेजी से बढ़ा।
- 1990 का दशक- लिब्रलाइजेशन के बाद अंतरराष्ट्रीय ब्रांड्स ने भारत में कदम रखा। महिलाओं को अलग-अलग शेड्स की लिपस्टिक, फाउंडेशन और हेयर कलर के ऑप्शन मिलने लगे। फैशन मैगजीन और टीवी विज्ञापनों ने ग्लैमरस लुक को घर-घर में मशहूर कर दिया।
- 2000 का दशक- इस दौर में छोटे शहरों तक फेशियल, हेयर स्पा और स्किन ट्रीटमेंट जैसी सुविधाएं आम होने लगीं। कम उम्र की लड़कियां भी नियमित रूप से ब्यूटी प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल करने लगीं।
- 2010 के बाद का दौर- सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स ने ब्यूटी के ट्रेंड को पूरी तरह बदल दिया। अब नो-मेकअप मेकअप लुक, कोरियन स्किनकेयर, सनस्क्रीन, रेटिनॉल, नियासिनामाइड और क्लीन ब्यूटी जैसे शब्द महिलाओं की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुके हैं।
खर्च में पांच गुना बढ़ोतरी और बदलती सोच
आजकल महिलाओं की सोच में सबसे बड़ा बदलाव स्किन हेल्थ को लेकर आया है। सोशल मीडिया और कोरियन ब्यूटी ट्रेंड्स ने लोगों की पसंद को काफी हद तक प्रभावित किया है। यही वजह है कि पहले जहां महिलाओं की ड्रेसिंग टेबल पर सिर्फ 4-5 प्रोडक्ट्स दिखाई देते थे, वहीं अब वहां 20 से 30 प्रोडक्ट्स का होना बेहद सामान्य बात हो गई है।
ब्यूटी और पर्सनल केयर से जुड़े प्रोडक्ट्स पर होने वाले खर्च में भी भारी उछाल आया है। बीते एक दशक में परिवारों के महीनों के खर्च में स्किनकेयर, हेयरकेयर और कॉस्मेटिक्स की हिस्सेदारी लगातार बढ़ी है। आंकड़ों के अनुसार, हर महिला ब्यूटी और पर्सनल केयर पर होने वाला महीने का खर्च पिछले 10 साल में 5 गुना तक बढ़ गया है।
तेजी से छलांग लगाता भारतीय ब्यूटी बाजार
आंकड़ों और रिपोर्ट्स पर नजर डालें तो भारतीय ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट बहुत तेजी से आगे बढ़ रहा है। साल 2025 में इस बाजार का कुल आकार करीब 2 लाख करोड़ रुपए था, जिसके साल 2030 तक बढ़कर 4 लाख करोड़ रुपए से भी ऊपर पहुंच जाने का अनुमान जताया गया है। इसके साथ आने वाले 3 से 4 वर्षों में भारत दुनिया का चौथा सबसे बड़ा ब्यूटी और पर्सनल केयर मार्केट बन जाएगा।
कैसे बदल रहा है खरीदारी का तरीका?
आज का कंज्यूमर पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा जागरूक और समझदार हो चुका है, जो इन आंकड़ों से साफ झलकता है-
- 85% कंज्यूमर अब ब्यूटी प्रोडक्ट्स को खरीदने से पहले उसमें इस्तेमाल किए गए इंग्रीडिएंट्स पर खास ध्यान देते हैं।
- 48% लोग अपनी खरीदारी के लिए सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स की सलाह से प्रभावित होते हैं।
- 55% कंज्यूमर्स कोलेजन बेस्ड प्रोडक्ट्स ज्यादा आकर्षित करते हैं।
- 46% लोग ऐसे ब्यूटी प्रोडक्ट्स को ज्यादा पसंद कर रहे हैं जिनमें हायल्यूरोनिक एसिड मौजूद होता है।