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    बारिश में भीगना पड़ सकता है भारी! फंगल इन्फेक्शन और हेयर फॉल से बचने के लिए आज ही अपनाएं ये आदतें

    Updated: Tue, 11 Aug 2026 05:04 PM (IST)

    त्वचा ऐसा सुरक्षा कवच है जो शरीर का तापमान नियंत्रित रखने के साथ बाहरी जोखिमों से भी बचाता है। ऐसे में मौसमी बदलावों को देखते हुए त्वचा को विशेष देखभा ...और पढ़ें

    मानसून में रखें अपनी त्वचा और बालों का खास ख्याल (Picture Courtesy: Freepik)

    मानसून में रखें अपनी त्वचा और बालों का खास ख्याल (Picture Courtesy: Freepik)

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    समय कम है?

    जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में

    संक्षेप में पढ़ें

    लाइफस्टाइल डेस्क, नई दिल्ली। मानसून के दिन सुकून भरे तो होते हैं, पर यह सुकून त्वचा और बालों के लिए बिल्कुल भी नहीं होता। बारिश में भीगने, शरीर पर घंटों तक गीले कपड़े रहने, पसीना और नमी के चलते त्वचा संक्रमण, एलर्जी, खुजली, दाद, एक्जिमा जैसी समस्याएं इन दिनों अधिक देखने में आती हैं। 

    त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा कमजोर हो जाती है, जिससे बैक्टीरिया, फंगस और एलर्जी जैसी समस्याएं बार बार होती हैं। ऐसे में यह समझना जरूरी है कि मानसून कैसे हमारी त्वचा को प्रभावित करता है और त्वचा संबंधी परेशानियों से बचने का सही तरीका क्या है, ताकि पूरे सीजन त्वचा संक्रमण के चिंताओं से मुक्त होकर आप बारिश के दिनों का आनंद ले सकें।

    मॉइश्चर है मुसीबतों की असली जड़ 

    बारिश के दिनों में आद्रता काफी बढ़ जाती है, जिससे त्वचा कभी बहुत अधिक तैलीय होती है, तो भी असामान्य रूप से रूखी। इससे त्वचा की प्राकृतिक सुरक्षा प्रणाली असंतुलित होती है और यही फंगल, बैक्टीरिया व अन्य परेशानियों का कारण बनता है। उसम और नमी होने से अधिक पसीना आता है और सीबम (तेल) बनता है, वहीं, लगातार नमी के संपर्क में रहने से बैक्टीरिया और फंगस के पनपने की आशंका बढ़ती है। 

    त्वचा पर पसीना, गंदगी और तेल जमा होने से रोमछिद्र अवरुद्ध होते हैं, जिससे मुहांसे और इन्फेक्शन होने का जोखिम रहता है। इससे एलर्जी और जलन पैदा करने वाली चीजों के प्रति त्वचा अधिक संवेदनशील हो जाती है। इन दिनों दाद, एथलीट फुट और जाक इच जैसी समस्याएं भी देखने में आती है। दरअसल, फंगस अक्सर हमारी त्वचा पर पहले से ही मौजूद होते हैं और जैसे ही नमी बढ़ती है, वे तेजी से पनपने लगते हैं। इससे खुजली, जलन और सूजन होती है। अगर समय पर सही इलाज न हो तो संक्रमण शरीर के अन्य हिस्सों में फैल सकता है।

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    किस तरह का होता है संक्रमण?

    • रिंगवर्म (दाद)- गोल आकार के खुजली वाले रैश के रूप में होता है, जिसके किनारे उभरे हुए होते हैं और यह शरीर किसी भी हिस्से में हो सकता है।
    • जाक इच (जांघों के बीच का संक्रमण)- जांघों के ऊपरी-भीतरी हिस्से और कमर के आसपास लालिमा, खुजली और बेचैनी होना इसका आम लक्षण है।
    • एथलीट फुट- आमतौर पर पैरों को, खासकर पैरों की उंगलियों के बीच के हिस्से को प्रभावित करता है। इसमें खुजली, त्वचा के छिलने, फटने और जलन जैसी समस्याएं देखने में आती हैं। 

    ये असल में फंगल इन्फेक्शन के ही अलग-अलग रूप हैं जो शरीर के अलग-अलग हिस्सों को प्रभावित करते हैं।

    किन्हें है अधिक खतरा?

    • जिन्हें अधिक पसीना आता है।
    • जो बारिश में भीगने के बाद गीले कपड़े पहने रहते हैं।
    • जो व्यायाम या खेल के दौरान घंटों सिंथेटिक कपड़े पहने रहते हैं।
    • जो पूरे दिन जूते पहने रहते हैं।
    • जो पर्सनल हाइजीन का खयाल नहीं रखते।
    • जिनकी इम्युनिटी कमजोर है।

    सही कपड़े पहनना क्यों जरूरी?

    सिंथेटिक कपड़े पसीने को त्वचा के पास ही रोककर रखते हैं। एथलीट और कसरत करने वालों को इससे अधिक खतरा होता है क्योंकि उनके कपड़े पसीना तो सोख लेते हैं, लेकिन जल्दी सूखते नहीं हैं। वहीं, सूती कपड़ों में हवा का आवागमन अच्छा रहता है और त्वचा ठंडी रहती है, इसलिए इसे बेहतर माना जाता है। 

    इसी तरह, लगातार जूते पहने रहने से पसीना अंदर ही जमा हो जाता है, जिससे पैरों का फंगल इन्फेक्शन हो सकता है। वॉटरप्रूफ जूते भी पैरों के आस-पास नमी जमा होने से नहीं रोक पाते। गर्म और नमी वाला माहौल फंगस को पनपने में मदद करता है। संभव हो तो जूते उतार देने चाहिए ताकि पैरों को हवा लग सके। इससे फंगल इन्फेक्शन का खतरा कम होगा और अन्य तरह के संक्रमम की भी आशंका कम रहेगी।

    त्वचा संबंधी समस्याएं और बचाव का तरीका

    फंगल संक्रमण- मानसून में सबसे आम संक्रमण है। पैरों, ग्रोइन, बगल और गर्दन में नमी जमा होने से फंगस तेजी से फैलते हैं।

    आम लक्षण-

    • लगातार खुजली
    • जलन महसूस होना
    • लाल या गोल चकत्ते
    • त्वचा का पपड़ी बनकर निकलना
    • पैरों की उंगलियों के बीच सफेद धब्बे, बदबू आना

    फंगल संक्रमण के प्रकार-

    • दाद
    • एथलीट फुट
    • जाक इच

    बचाव के टिप्स-

    • त्वचा को सूखा रखें।
    • हवादार सूती कपड़े पहनें।
    • गीले कपड़े तुरंत बदलें।
    • भीगने पर पैरों को अच्छी तरह सुखाएं।
    • तौलिए या जूते-चप्पल दूसरों के साथ शेयर न करें।

    मुंहासे और तैलीय त्वचा

    नमी के कारण सिबेसियस ग्लैंड्स अधिक तेल बनाने लगते हैं। यह पसीने, गंदगी और डेड स्किन सेल्स के साथ मिलकर रोमछिद्रों (पोर्स) को बंद कर देता है, जिससे मुंहासे निकल आते हैं।

    आम लक्षण-

    • पिंपल्स
    • ब्लैकहेड्स
    • व्हाइटहेड्स
    •  मुंहासे
    • आयली स्किन- जिन लोगों की त्वचा पर अक्सर मुंहासे निकलते हैं, वे बारिश का मौसम उनके लिए अधिक मुश्किलें पैदा करता है।

    बचाव के टिप्स-

    • हल्के क्लींजर से दो से तीन बार चेहरा धोएं।
    • बार-बार चेहरे को छूने से बचें।
    • स्किनकेयर प्रोडक्ट्स के प्रयोग में सतर्कता रखें।
    • अगर समस्या बढ़ रही है तो डाक्टर से इसकी जांच करवानी चाहिए।
    • स्किन एलर्जी और चकत्ते- एलर्जन, दूषित बारिश का पानी, पसीना और नमी के चलते स्किन एलर्जी हो सकती है।

    लक्षण-

    • खुजली
    • लाल धब्बे
    • सूजन

    बचाव-

    • साफ और सूखे कपड़े पहनें।
    • गीले कपड़ों में अधिक देर न रहें।
    • नियमित रूप से माइस्चराइजर लगाएं।
    • हल्के साबुन का इस्तेमाल करें।

    त्वचा संक्रमण से कैसे बचें?

    कुछ आसान आदतें और सतर्कता से आप बारिश के मौसम में होने वाली आम स्किन बीमारियों के खतरे को काफी कम कर सकते हैं।

    • अपनी त्वचा को सूखा रखें- त्वचा की सिलवटों में फंसी नमी फंगस को पनपने में मदद करती है। नहाने या बारिश में भीगने के बाद अपने शरीर को अच्छी तरह सुखाएं।
    • पर्सनल हाइजीन- बारिश से घर लौटने के बाद नहाएं और साफ, सूखे कपड़े पहनें।
    • सूती कपड़े- ढीले-ढाले सूती कपड़े पहनना चाहिए, ताकि पसीना सुखता रहे और हवा का सही सर्कुलेशन सही रहे।
    • नंगे पैर चलने से बचें- मानसून के दिनों में पैरों की सुरक्षा का अधिक ध्यान देता होता है, क्योंकि नमी और गंदगी से फंगस हो सकता है जिससे एथलीट फुट और दूसरे इन्फेक्शन हो सकते हैं।
    • हाइड्रेटेड रहें- पर्याप्त पानी पीने से त्वचा स्वस्थ रहती है और उसकी प्राकृतिक सुरक्षा परत बनी रहती है।
    • संतुलित आहार लें- त्वचा और बालों को मजबूत बनाने के लिए फल, सब्जियां, लीन प्रोटीन और विटामिन ए, सी,ई, आयरन और जिंक से भरपूर चीजें खानी चाहिए।
    • निजी चीजें न शेयर करें- तौलिए, कंघी, रेजर या जूते-चप्पल साझा करने से बचना चाहिए, इससे फंगल संक्रमण का जोखिम रहता है।
    • नाखूनों की सफाई- नाखूनों की स्वच्छता का ध्यान रखना जरूरी है, साथ ही छोटे नाखून खुजली वाली जगहों को खरोंचने से होने वाले त्वचा के नुकसान को कम करते हैं और सेकेंडरी बैक्टीरियल इन्फेक्शन का खतरा भी कम करते हैं।

    बालों का भी रखें विशेष खयाल

    कुछ बालों का झड़ना सामान्य है, लेकिन बहुत अधिक झड़ना किसी बड़ी समस्या का संकेत हो सकता है। अधिक नमी बालों के शाफ्ट को कमजोर कर देती है, जिससे उनके टूटने का खतरा बढ़ जाता है। बारिश का पानी, प्रदूषण, फंगल इन्फेक्शन, स्कैल्प पर जमा गंदगी, पोषक तत्वों की कमी और तनाव के चलते भी बाल तेजी से गिरते हैं।

    डॉक्टर से मिलें, अगर-

    • धोते या कंघी करते समय अधिक बाल झड़ते हैं
    • तकिए या कपड़ों पर बालों जमा हो जाते हैं
    • सिर के किसी हिस्से से एक साथ अधिक बाल गायब हो गए

    बचाव के टिप्स-

    • माइल्ड शैंपू से सिर को धोना चाहिए। गीले बालों को बांधने से बचना चाहिए।
    • रक्त संचार को बेहतर बनाने के लिए स्कैल्प की हल्के हाथों से मालिश करनी चाहिए।

    डैंड्रफ से करें बचाव

    अत्यधिक पसीना और तेल का जमाव होने से रूसी की समस्या बढ़ सकती है। इसे नजरअंदाज करने से बाल झड़ने की समस्याएं हो सकती हैं।

    बचाव के उपाय

    सिर को साफ और सूखा रखना चाहिए। अत्यधिक हेयर स्टाइलिंग उत्पादों का उपयोग करने से बचना चाहिए।त्वचा विशेषज्ञ द्वारा सुझाए गए शैंपू का प्रयोग करना चाहिए।  

    त्वचा की सफाई की बनाएं आदत


    बारिश के दिनों में आद्रता बढ़ने के साथ फंगस की समस्या बहुत आम हो जाती है। आमतौर पर ग्रोइन और पीठ के हिस्सों में यह समस्या अधिक देखने में आती है। जो लोग लगातार जींस पहने रहते हैं या सही ढंग से स्नान नहीं करते या जिन लोगों की आदत में पर्याप्त साफ-सफाई नहीं होती, उन लोगों को त्वचा संबंधी समस्याएं होती हैं। बारिश के मौसम में त्वचा से जुड़ी देखभाल बढ़ानी होती है। गर्मी में अधिक पसीना होने समस्याएं होती हैं। इन सभी समस्याओं से बचने के लिए आसान उपाय यही है कि दिन में दो बार सुबह और शाम साबुन लगाकर स्नान करना चाहिए। साथ ही, सूती और हवादार कपड़े पहनना त्वचा के लिए सही रहता है। सिंथेटिक कपड़े से पसीना सही ढंग से नहीं सूखता, जिससे परेशानी बढ़ सकती है। ध्यान रखें कि त्वचा के साथ काटन का कपड़ा ही टच होना चाहिए। इसी तरह, बालों में रूसी की समस्या इन दिनों अधिक होती है। हालांकि, बहुत ही कम मामलों में सिर में फंगस की समस्या देखने में आती है। रूसी के समाधान के लिए सामान्य शैंपू का प्रयोग कर सकते हैं। आमतौर पर बालों के तेजी टूटने या झड़ने के पीछे अक्सर आनुवंशिक कारण जिम्मेदार होते हैं, जिसे एंड्रोजेनेटिक एलोपेशिया कहते हैं। पर्याप्त सफाई नहीं होने जैसे कारणों से भी बाल झड़ते हैं। सही ढंग से नहाने से पसीना और जमा बैक्टीरिया साफ हो जाते हैं। स्वस्थ त्वचा और बालों के लिए सामान्य दिनचर्या, सामान्य आहार जैसे नियम का पालन करना चाहिए। अल्कोहल और धूमपान से दूरी बना कर रखना चाहिए।

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    डॉ. राजीव शेखरी, डर्मेटोलाजिस्ट, फोर्टिस अस्पताल, नोएडा