पश्चिमी सिंहभूम में खूंखार नक्सली सागेन अंगारिया का आत्मसमर्पण, पूर्व विधायक पर हमले का था मास्टरमाइंड
पश्चिमी सिंहभूम के सारंडा और पोड़ाहाट जंगलों में सक्रिय नक्सली सागेन अंगारिया ने सुरक्षाबलों के बढ़ते दबाव के कारण आत्मसमर्पण ...और पढ़ें

सारंडा में सुरक्षा बलों की कार्रवाई से माओवादी कमजोर, झारखंड जल्द होगा माओवादी मुक्त।
HighLights
पूर्व विधायक गुरुचरण नायक पर हमले का मुख्य आरोपी था।
आईईडी ब्लास्ट और जवानों की शहादत में भी संलिप्तता।
जागरण संवाददाता, चाईबासा। झारखंड के कोल्हान प्रमंडल अंतर्गत पश्चिमी सिंहभूम जिले के सारंडा और पोड़ाहाट के दुर्गम जंगलों में लंबे समय तक आतंक का पर्याय रहा सक्रिय नक्सली सागेन अंगारिया आखिरकार कानून के शिकंजे में आ ही गया। लगातार जंगलों में चलाए जा रहे सुरक्षाबलों के एंटी नक्सल सर्च ऑपरेशन और बढ़ते चौतरफा दबाव के कारण सागेन ने गुरुवार को सरेंडर कर दिया। Naxal Surrender in Chaibasa
पूर्व विधायक गुरुचरण नायक पर जानलेवा हमला कर आया था चर्चा में
झारखंड जगुआर के जवानों की शहादत और बड़ी वारदातें:
इस हमले की साजिश और क्रियान्वयन में सागेन की मुख्य भूमिका थी। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, सागेन नक्सलियों की उस स्पेशल एक्शन टीम का अहम हिस्सा था जो जंगलों में जवानों को निशाना बनाने के लिए लैंडमाइन और आईईडी बिछाने का काम करती थी। उसके नाम दर्ज कुछ बड़ी वारदातें इस प्रकार हैं:
- टोंटो मुठभेड़ (2023): तुम्बाहाका के जंगलों में पुलिस बल पर हुई अंधाधुंध फायरिंग में झारखंड जगुआर के दो वीर जवान शहीद हुए थे, जिसमें सागेन नामजद आरोपी था।
- विस्फोटक सामग्री लूट: बड़ा जामदा क्षेत्र में रेलवे या माइनिंग साइट से करीब 7,000 लाइव डेटोनेटर और भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री लूटने की घटना।
- अन्य बड़े हमले: लोवाबेड़ा आईईडी ब्लास्ट, राजाबासा हमला और तिलाइबेड़ा में हुए बड़े विस्फोट।
हाल के वर्षों में भी जारी रखी थी खूनी गतिविधियां
संगठन में अपनी मजबूत पकड़ के कारण सागेनअंगारिया हाल के वर्षों में भी लगातार सक्रिय रहा। छोटानागरा थाना क्षेत्र के बलिबा, मरांगपोंगा और रातामाटी में हुए आईईडी विस्फोटों में उसकी संलिप्तता पाई गई थी, जहां कई सुरक्षाकर्मी गंभीर रूप से घायल और शहीद हुए थे।
इसके अलावा, गोइलकेरा के दुगुनीया जंगल (अगस्त) और पंचलताबुरू (सितंबर) में सुरक्षाबलों के साथ हुई सीधी मुठभेड़ों में वह दस्ते का नेतृत्व कर रहा था। नवंबर में बिंगीकीर-कुलापाबुरू क्षेत्र में हुई भीषण मुठभेड़ के बाद जब पुलिस ने भारी मात्रा में हथियार और कारतूस बरामद किए थे, तब भी सागेन बाल-बाल बचकर भाग निकला था।
- नक्सलवाद का ढहताकिला: पुलिस अधिकारियों का कहना है कि सरकार की आत्मसमर्पण एवं पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर और नक्सलियों की खोखली विचारधारा तथा कमजोर होती स्थिति को देखकर सागेन ने मुख्यधारा में लौटने का फैसला किया है। उसके आत्मसमर्पण से कोल्हान क्षेत्र में नक्सली संगठन की कमर पूरी तरह टूट गई है।
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