मनोहरपुर में घर के बाहर घात लगाए बैठा था गजराज, ग्रामीण को सूंड़से उठाकर 50 मीटर दूर ले गया, फिर पटककर मार डाला
मनोहरपुर के पात्थरबासा गांव में शौच के लिए निकले दिलेश्वर जातराम को एक जंगली हाथी ने कुचलकर मार डाला। वन विभाग ने मृतक के परिजनों को तत्काल 20 हजार रु ...और पढ़ें

हाथी का फाइल फोटो।
HighLights
जंगली हाथी ने दिलेश्वर जातराम को कुचलकर मार डाला।
वन विभाग ने 20 हजार की नकद सहायता प्रदान की।
संसू, मनोहरपुर। झारखंड में मनोहरपुर थाना क्षेत्र के पात्थरबासा गांव (कोकलोटाला) में मंगलवार देर रात रात एक जंगली हाथी के चपेट में आने से एक व्यक्ति की मौत हो गई।
घटना उस समय हुई जब मृतक दिलेश्वर जातराम रात को घर से बाहर शौच के लिए निकले थे। तभी घर के बाहर पहले से घात लगाए मौजूद जंगली हाथी ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया।
50 मीटर दूर ले जाकर पैर से कुचला
प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, हाथी दिलेश्वर को अपनी सूंड़ में लपेटकर करीबन 50 मीटर दूर घसीटते हुए ले गया। इसके बाद उसने दिलेश्वर को पैर से कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
घटना के वक्त दिलेश्वर ने जान बचाने के लिए शोर भी मचाया, लेकिन रात के सन्नाटे में किसी को उनकी आवाज तुरंत समझ नहीं आई।
पत्नी के शोर मचाने पर भागा हाथी
पति की आवाज सुनकर जब दिलेश्वर की पत्नी बाली जातराम घर से बाहर निकलीं, तो उनके होश उड़ गए। उन्होंने तुरंत शोर मचाना शुरू किया।
महिला के चिल्लाने और ग्रामीणों के जुटने पर हाथी अंततः जंगल की ओर भाग गया। रात करीब 3 बजे जब पत्नी और अन्य ग्रामीण दिलेश्वर के पास पहुंचे, तो उन्हें मृत पाया।
वन विभाग ने दी 20 हजार की नकद सहायता
ग्रामीणों ने सुबह में वन विभाग को घटना की जानकारी दी। इसके बाद वन विभाग की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और शव को मनोहरपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) ले गई, जहां डॉक्टरों ने उन्हें जांच के दौरान मृत घोषित कर दिया।
वन क्षेत्र पदाधिकारी रामनंदन राम ने नंदपुर पंचायत की मुखिया सुशीला सवैया की मौजूदगी में सीएचसी में ही मृतक के परिजनों को तत्काल राहत के रूप में 20 हजार रुपये नकद दिए।
वन विभाग ने आश्वस्त किया है कि कागजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद सरकारी प्रावधान के अनुसार शेष मुआवजा राशि भी जल्द ही आश्रितों को दे दी जाएगी।
इसके बाद विभाग द्वारा शव को पोस्टमार्टम के लिए अनुमंडल अस्पताल चक्रधरपुर भिजवा दिया गया है। इस घटना के बाद से पात्थरबासा और आसपास के सीमावर्ती गांवों में दहशत का माहौल है।