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इंजीनियर से IPS तक… कौन हैं झारखंड के सुपरकॉप अमित रेणु? जिनके नाम से कांपते हैं नक्सली

Published: Fri, 22 May 2026 08:05 PM (IST)Updated: Fri, 22 May 2026 08:08 PM (IST)

पश्चिमी सिंहभूम के एसपी अमित रेणु सारंडा-कोल्हान में नक्सलियों के खिलाफ चलाए गए सफल अभियानों के लिए चर्चा में हैं।

आईपीएस अमित रेणु। (जागरण)

आईपीएस अमित रेणु। (जागरण)

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जागरण संवाददाता, चाईबासा। सारंडा-कोल्हान के जंगलों में लगातार कमजोर पड़ते माओवादी नेटवर्क और सुरक्षाबलों की बढ़ती घेराबंदी के बीच पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक अमित रेणु चर्चा में हैं।

हले 17 ईनामी माओवादियों को मुठभेड़ में मार गिराने और फिर झारखंड के इतिहास में पहली बार एक साथ 25 माओवादियों के आत्मसमर्पण के बाद पुलिस की रणनीति को बड़ी सफलता माना जा रहा है।

इलाहाबाद से इंजीनियरिंग और फिर आईपीएस तक का सफर

मूल रूप से देवघर निवासी अमित रेणु ने सेंट फ्रांसिस स्कूल से पढ़ाई करने के बाद इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉरमेशन टेक्नोलॉजी इलाहाबाद से इंजीनियरिंग की।

IPS AMIT RENU

ब्रिटिश टेलीकॉम में करीब ढाई वर्ष नौकरी करने के बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। तीसरे प्रयास में भारतीय राजस्व सेवा (आईआरएस) में चयन होने के बाद उन्होंने आयकर विभाग में सेवा दी। वर्ष 2015 में दोबारा यूपीएससी परीक्षा पास कर आईपीएस बने।

पहली पोस्टिंग रांची, फिर धनबाद और गिरिडीह में बड़ा एक्शन

आईपीएस बनने के बाद उनकी पहली पोस्टिंग डीएसपी हेडक्वार्टर-1, रांची में हुई। इसके बाद धनबाद और फिर गिरिडीह में बतौर एसपी उन्होंने नक्सल और अपराध विरोधी अभियानों को गति दी।

कृष्णा हांसदा से लेकर नुनूचंद तक, कई बड़े नक्सलियों को किया बेअसर

28 दिसंबर 2020 को गिरिडीह में एक ही दिन में तीन जेडसीएम रैंक के 10-10 लाख रुपये के ईनामी नक्सलियों प्रशांत मांझी उर्फ छोटका, सुधीर किस्कु उर्फ सुलेमान हांसदा और प्रभा दी उर्फ जया दी की गिरफ्तारी पुलिस के लिए बड़ी सफलता मानी गई थी।

IPS AMIT RENU

इनमें से दो नक्सली पूर्व आईपीएस अधिकारी अमरजीत बलिहार हत्याकांड में शामिल बताए गए थे। गिरिडीह में आरसीएम सदस्य कृष्णा हांसदा की गिरफ्तारी और भाकपा माओवादी संगठन के सब-जोनल कमांडर नुनूचंद के आत्मसमर्पण में भी उनकी अहम भूमिका रही।

नेपाल से दबोचा था दुर्दांत अपराधी उमेश गिरी

इसके अलावा गिरिडीह, बोकारो और हजारीबाग में सक्रिय न्यू सशस्त्र पीपुल्स मोर्चा (एनएसपीएम) के सरगना उमेश गिरी को नेपाल से गिरफ्तार करने की कार्रवाई भी उनके कार्यकाल की बड़ी उपलब्धियों में शामिल रही।

चाईबासा आते ही शुरू हुआ 'ऑपरेशन सारंडा'

सितंबर 2025 में चाईबासा में एसपी के रूप में योगदान देने के बाद अमित रेणु ने सारंडा और कोल्हान क्षेत्र में इंटेलिजेंस नेटवर्क मजबूत करने पर जोर दिया। गांव-गांव जाकर लोगों का विश्वास जीतने और स्थानीय सूचना तंत्र विकसित करने की रणनीति अपनाई गई।

IPS AMIT RENU

इसका असर 25 सितंबर 2025 को देखने को मिला, जब एक साथ 10 नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया। इसके बाद जेटेया थाना क्षेत्र के बुरुबोरता जंगल में अभियान चलाकर भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किए गए।

आपरेशन मेगाबुरु: झारखंड का सबसे बड़ा एंटी नक्सल ऑपरेशन

वहीं 22 जनवरी 2026 को चला 'ऑपरेशन मेगाबुरु' झारखंड के सबसे बड़े एंटी नक्सल अभियानों में शामिल हो गया। इस अभियान में एक करोड़ के ईनामी नक्सली पतिराम मांझी उर्फ अनल समेत 17 माओवादियों को मार गिराया गया।

पहली बार एक साथ 25 माओवादियों का सरेंडर

अभियान में कोबरा, झारखंड जगुआर और जिला पुलिस की संयुक्त टीम शामिल थी। 21 मई 2026 को सागेन अंगिरया समेत 25 माओवादियों के आत्मसमर्पण को भी पुलिस बड़ी उपलब्धि मान रही है।

IPS AMIT RENU

पुलिस अधिकारियों के अनुसार गांवों में लगातार चलाए गए विश्वास बहाली अभियान और लगातार दबाव की रणनीति के कारण माओवादी संगठन कमजोर पड़ा है। हालांकि, पुलिस का कहना है कि सारंडा अभियान अभी समाप्त नहीं हुआ है।

या तो सरेंडर करेंगे या मारे जाएंगे

मिसिर बेसरा, असीम मंडल, अजय और सालुका कायम जैसे इनामी माओवादी अब भी सक्रिय हैं। एसपी अमित रेणु ने कहा कि सुरक्षाबल लगातार जंगलों में अभियान चला रहे हैं और आने वाले दिनों में या तो शेष माओवादी आत्मसमर्पण करेंगे या फिर कार्रवाई में मारे जाएंगे।

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