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    रांची जगन्नाथ मेले में 80 फीट स्क्रीन टावर झूले का रहेगा रोमांच, जंगल सफारी होंगे बच्चों के आकर्षण का केंद्र

    Updated: Mon, 13 Jul 2026 01:41 AM (GMT+05:30)

    रांची में जगन्नाथ मेले की तैयारियां अंतिम चरण में हैं, जिसमें 16 जून को भव्य रथयात्रा निकलेगी। ...और पढ़ें

    मेला की चल रह तैयारी। (जागरण)

    मेला की चल रह तैयारी। (जागरण)

    HighLights

    1. मेले में 80 फीट का स्क्रीन टावर झूला मुख्य आकर्षण।

    2. 16 जून को भव्य रथयात्रा, 15 को नेत्रदान का आयोजन।

    3. मां लक्ष्मी पहली बार पालकी में मौसीबाड़ी जाएंगी।

    जागरण संवाददाता, रांची। जगन्नाथ मेले की तैयारी अंतिम चरण की ओर बढ़ रही है। 14 तक मेला तैयार हो जाएगा। 15 को नेत्रदान और 16 को भव्य रथयात्रा निकलेगी।

    जिला प्रशासन, मंदिर समिति और अन्य संस्थाएं आयोजन में लगी हुई हैं। मेला संवेदक ने बताया कि मेले में पहली बार स्क्रीन टावर झूल आया है।

    ग्रेविटी झूला भी आकर्षक का केंद्र होगा। मेले में कुछ 25 छोटे-बड़े झूले लगाए जा रहे हैं। मेला संवदेक विकास पांडेय ने बताया कि जंगल सफारी बच्चों को बहुत भाएगा। रोबेटिक जानवर होंगे। उनके साथ बच्चे खेल सकते हैं।

    जलपरी का अलग आकर्षक होगा। प्रिंस झूला 90 डिग्री पर मूवमेंट करेगा। मीना बाजार भी सजेगा। मौसीबाड़ी के पास मीना बाजार लग रहा है। लोहा बाजार के लिए अलग जगह आवंटित की गई है।

    अब तक दो हजार स्टाल बुक

    मेला आयोजक ने बताया कि अभी तक दो हजार से अधिक स्टाल बुक हैं। जगह इस बार कम है। पिछली बार 3500 से अधिक था। बैरिकेडिंग के कारण भी जगह हमें कम मिली है। सौ रुपये से लेकर दो हजार रुपये प्रतिदिन वर्गफीट से दुकानदारों से लिया जा रहा है।

    कुछ दुकानदारों ने बताया कि दुकान बहुत महंगा हो गया है। क्या लगाएं, क्या कमाएंगे? हम लोग तो कुछ कमाई के लिए आते हैं, लेकिन महंगी जगह से दिक्कत हो गई है।

    ड्रोन, सीसीटीवी व वाच टावर से निगरानी

    मेले में इस बार पांच वाच टावर भी लग रहे हैं। मेला आयोजक 62 सीसीटीवी लगा रहे हैं। पिछली बार 42 लगा था। जिला प्रशासन भी ड्रोन व सीसीटीवी लगा रहा है।

    चारों तरफ लोहे की बैरिकेडिंग लगाई जा रही है। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होंगे। सड़क पर भी लोहे की बैरिकेडिंग लग रही है। सड़क के एक हिस्से को फ्री इस बार रखा जा रहा है।

    पालकी पर सवार होंगी मां लक्ष्मी

    इस बार यात्रा के पांचवें दिन मां लक्ष्मी मौसीबाड़ी पालकी पर जाएंगी। ऐसा पहली बार किया जा रहा है। साथ ही यहां स्थायी रूप से मां लक्ष्मी का मंदिर भी बन रहा है।

    मां लक्ष्मी मौसीबाड़ी जाकर प्रभु से लड़ती हैं। आखिर, बिना साथ लिए वे कैसे चले गए? वहां जाकर रथ को तोड़ती है। न्यास समिति के सदस्य कमल ठाकुर ने बताया कि मेले को लेकर न्यास व प्रशासन पूरी तरह लगा हुआ है।

    प्रशासन हर दिन काम का जायजा ले रहा है। हमारी कोशिश है, इस बार भी भव्य रथयात्रा का आयोजन है। इसी दिशा में पहली बार पालकी की व्यवस्था की गई है, जिस पर सवार होकर मां लक्ष्मी जाएंगी।

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