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    रांची में होटल कारोबारी लव भाटिया की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर की पुष्टि, सल्फास के मिले अंश

    Updated: Fri, 22 May 2026 08:13 PM (IST)

    राजधानी के होटल व्यवसायी लव भाटिया की आत्महत्या मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट से सल्फास के अंश मिलने की पुष्टि हुई है। अंतिम पुष्टि के लिए बिसरा को फॉ ...और पढ़ें

    व्यवसायी लव भाटिया। फाइल फोटो

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    जागरण संवाददाता, रांची। राजधानी के चर्चित होटल व्यवसायी लव भाटिया की आत्महत्या मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट में जहर खाने की पुष्टि हुई है। राजेंद्र आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स) में किए गए पोस्टमार्टम के दौरान चिकित्सकों को शरीर में सल्फास (एल्युमिनियम फास्फाइड) के अंश मिले हैं।

    प्रारंभिक मेडिकल जांच में जहर सेवन के स्पष्ट संकेत मिले थे, लेकिन पोस्टमार्टम के दौरान शरीर में पाए गए प्रभाव और बिसरा की स्थिति के आधार पर सल्फास की आशंका और मजबूत हो गई।

    सूत्रों के अनुसार, पोस्टमार्टम के दौरान बिसरा का रंग भी परिवर्तित पाया गया, जो सल्फास जैसे जहरीले रसायन के सेवन के मामलों में अक्सर देखा जाता है। हालांकि इसकी शत-प्रतिशत पुष्टि के लिए बिसरा को फारेंसिक साइंस लेबोरेटरी (एफएसएल) भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद ही अंतिम रूप से जहर के प्रकार की पुष्टि हो सकेगी।

    क्या है सल्फास और क्यों है इतना खतरनाक

    सल्फास, जिसे एल्युमिनियम फास्फाइड कहा जाता है, मुख्य रूप से अनाज संरक्षण और फ्यूमिगेशन में इस्तेमाल होने वाला अत्यंत जहरीला रसायन है। यह हवा या पेट में मौजूद नमी के संपर्क में आते ही फास्फीन गैस छोड़ता है, जो सीधे शरीर के महत्वपूर्ण अंगों पर असर डालती है।

    मेडिकल साइंस के अनुसार यह जहर शरीर में पहुंचते ही हृदय, फेफड़े, लीवर और किडनी को तेजी से प्रभावित करना शुरू कर देता है। डॉक्टर बताते हैं कि सल्फास खाने के कुछ ही मिनटों बाद मरीज को घबराहट, उल्टी, पेट दर्द, तेज पसीना, सांस लेने में तकलीफ और बेचैनी शुरू हो जाती है।

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    धीरे-धीरे शरीर में आक्सीजन की कमी होने लगती है और ब्लड प्रेशर तेजी से गिरने लगता है। गंभीर मामलों में हृदय की धड़कन अनियंत्रित हो जाती है और मरीज कार्डियक फेल्योर की स्थिति में पहुंच सकता है। इस जहर को खाने के एक घंटे के अंदर जितना जल्द इलाज शुरू हो जाए तो बचने की संभावना बढ़ जाती है।

    इलाज बेहद कठिन, मौत की दर काफी अधिक

    मेडिकल विशेषज्ञों के अनुसार, सल्फास विषाक्तता के मामलों में सबसे बड़ी समस्या यह है कि इसका कोई सटीक एंटीडोट उपलब्ध नहीं है। मरीज को केवल सपोर्टिव ट्रीटमेंट दिया जाता है। शरीर में जहर का असर जितनी तेजी से फैलता है, उतनी ही तेजी से मरीज की हालत बिगड़ती जाती है।

    यही वजह है कि सल्फास सेवन के मामलों में मृत्यु दर काफी अधिक मानी जाती है। डाक्टरों का कहना है कि समय पर अस्पताल पहुंचने के बावजूद कई बार मरीज को बचा पाना मुश्किल हो जाता है, क्योंकि यह जहर शरीर की कोशिकाओं तक आक्सीजन पहुंचने की प्रक्रिया को बाधित कर देता है।

    बैन के बावजूद उपलब्धता पर सवाल

    लव भाटिया मामले के बाद एक बार फिर सल्फास की उपलब्धता को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। झारखंड में इसकी खुली बिक्री प्रतिबंधित है और इसका उपयोग केवल लाइसेंस प्राप्त संस्थानों या अधिकृत एजेंसियों तक सीमित है।

    इसके बावजूद आम लोगों तक इसका पहुंचना प्रशासनिक निगरानी और अवैध बिक्री पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है। फिलहाल पुलिस और संबंधित एजेंसियां मामले की जांच में जुटी हैं। एफएसएल रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।

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