JSSC पारा शिक्षक बहाली: विधानसभा में उठा OBC सीटों का मुद्दा, सरकार ने बताया क्यों खाली हैं कम पद
झारखंड विधानसभा में सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में ओबीसी पदों की कमी पर सरकार ने स्पष्टीकरण दिया कि यह पूर्व में रिक्त रह गए पदों पर नियुक्ति है। ...और पढ़ें

मंत्री सुदिव्य कुमार। (जागरण)
HighLights
सहायक आचार्य नियुक्ति में कई जिलों में ओबीसी पद नहीं।
सरकार ने स्पष्ट किया, ये रिक्त रह गए पदों पर नियुक्ति।
बांग्ला अकादमी मांग पर मंत्री ने छात्रों की कम संख्या बताई।
राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग द्वारा पारा शिक्षकों की नियुक्ति के लिए आयोजित होने वाली सहायक आचार्य नियुक्ति परीक्षा में कई जिलों में ओबीसी का पद नहीं होने पर सरकार ने स्थिति को स्पष्ट किया।
विधानसभा में कुछ विधायकों द्वारा ओबीसी के लिए पद नहीं होने पर सवाल उठाए जाने के बाद जवाब में प्रभारी मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि यह नियुक्ति उन पदों के लिए हो रही है, जो पद पूर्व में आयोजित परीक्षा में रद रह गए हैं। रिक्त रह गए पदों पर नियुक्ति के लिए ही जेएसएससी को अधियाचना भेजी गई थी।
मंत्री ने यह भी बताया कि पूर्व में सहायक आचार्य के 26001 पदों पर नियुक्ति के लिए आयोजित परीक्षा में पारा शिक्षक श्रेणी में बीसी-1 के 1995 तथा बीसी-2 के 1473 पद थे।
इनमें दोनों श्रेणी के क्रमश: 64 तथा 159 पद ही रिक्त रहे हैं, जिन पदों पर ही नियुक्ति होनी है। इसलिए कई जिलों में इन श्रेणी के पद नहीं हैं।
बताते चलें कि पारा शिक्षकों ने भी कई जिलों में ओबीसी के पद नहीं होने पर सवाल उठाए हैां। कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव ने भी मुख्यमंत्री से मिलकर इसकी जानकारी दी थी।
बांग्ला भाषा अकादमी की मांग
विधायक अरूप चटर्जी ने विधानसभा में बांग्ला भाषा अकादमी के गठन की मांग उठाई। उन्होंने कहा कि झारखंड में बड़ी संख्या में लोग बांग्ला भाषा बोलते हैं, लेकिन उनकी भाषा और शिक्षा से जुड़ी जरूरतों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जा रहा है।
जवाब में मंत्री सुदिव्य कुमार ने कहा कि राज्य में बांग्ला भाषी लोगों की सही आबादी से संबंधित आंकड़े सरकार के पास उपलब्ध नहीं हैं।
हालांकि जैक की इंटरमीडिएट परीक्षा के आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 की परीक्षा में 1,695 विद्यार्थी ही बांग्ला विषय की परीक्षा में सम्मिलित हुए थे। उन्होंने इतनी कम संख्या होने पर चिंता भी व्यक्त की है।
उन्होंने इस विषय में शिक्षकों की नियुक्ति की मांग पर कहा कि जब तक स्कूल और कॉलेजों में बांग्ला पढ़ने वाले छात्रों की संख्या नहीं बढ़ती, तब तक बांग्ला भाषा के लिए शिक्षकों की नियुक्ति करना मुश्किल है।
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