झारखंड के वित्तीय स्वास्थ्य में सुधार, नीति आयोग की रिपोर्ट में 24 राज्यों को छोड़ा पीछे
नीति आयोग ने देश का पहला 'इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स' जारी किया है, जिसमें झारखंड वित्तीय स्वास्थ्य के मामले में चौथे स्थान पर रहा। इस सूचकांक म ...और पढ़ें

नीति आयोग की रिपोर्ट। फाइल फोटो
HighLights
नीति आयोग ने पहला 'इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स' जारी किया।
झारखंड वित्तीय स्वास्थ्य में देश में चौथे स्थान पर रहा।
गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु शीर्ष तीन निवेश स्थल घोषित।
राज्य ब्यूरो, रांची। नीति आयोग ने शुक्रवार को देश का पहला 'इन्वेस्टमेंट फ्रेंडलीनेस इंडेक्स' जारी कर दिया है। इस सूचकांक में गुजरात को सबसे अनुकूल निवेश स्थल के रूप में स्थान दिया गया है, जबकि महाराष्ट्र और तमिलनाडु क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। वित्तीय स्वास्थ्य के मामले में झारखंड को देश में चौथा स्थान मिला है।
यह सूचकांक सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के निवेश परिवेश का आकलन करता है। इसे आठ स्तंभों—इंफ्रास्ट्रक्चर, कारोबारी माहौल, संसाधन, सरकारी नीतियां, नियामक सहजता, संस्थागत वातावरण, वित्तीय स्वास्थ्य और पर्यावरणीय लचीलापन के आधार पर तैयार किया गया है।
मूल्यांकन में 84 संकेतक शामिल हैं, जिसमें 1,850 से अधिक निवेशकों के सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों को भी शामिल किया गया है।रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात ने 56.6 अंक प्राप्त कर शीर्ष स्थान हासिल किया है।
राज्य की सफलता का श्रेय उसके कुशल बंदरगाह संचालन, प्रतिस्पर्धी बिजली दरों, मजबूत औद्योगिक बुनियादी ढांचे और नीतिगत स्थिरता को दिया गया है।
5 राज्य टॉप परफॉर्मर
महाराष्ट्र (53.7 अंक) ने निजी इक्विटी और वेंचर कैपिटल निवेश को आकर्षित करने में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया, जबकि तमिलनाडु (53.3 अंक) ने अपने बंदरगाहों, निर्यात प्रदर्शन और उच्च एमओयू रूपांतरण दर के दम पर यह स्थान बनाया है।
पांच राज्य गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गोवा और ओडिशा को 'शीर्ष प्रदर्शनकर्ता' की श्रेणी में रखा गया है। इसके अलावा, 15 राज्य 'अग्रणी', आठ उभरते प्रदर्शनकर्ता, इमर्जिंग परफॉर्मर और आठ 'आकांक्षी राज्य' की श्रेणी में आते हैं।
उत्तराखंड पहाड़ी और पूर्वोत्तर राज्यों में शीर्ष पर रहा, जबकि गोवा ने केंद्र शासित प्रदेशों और शहरी राज्यों की श्रेणी में बाजी मारी। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अशोक कुमार लाहिड़ी ने कहा कि यह सूचकांक केवल रैंकिंग नहीं है, बल्कि राज्यों को उनकी ताकत और कमजोरियां पहचानने में मदद करने के लिए एक सुधार उपकरण है।