झारखंड में नए RIMS की निर्माण प्रक्रिया तेज, 151 एकड़ भूमि में ₹4189 करोड़ से बनेगा राज्य का सबसे बड़ा अस्पताल
रांची के नगड़ी में ₹4189 करोड़ की लागत से बनने वाले रिम्स-2 (जीएमसीएचआर) के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू हो गई है। यह 150.92 एकड़ में फैला 2800 से अधिक बे ...और पढ़ें
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एआई जनरेटेड फोटो
HighLights
नगड़ी में ₹4189 करोड़ से बनेगा रिम्स-2 अस्पताल।
2800 से अधिक बेड और 200 एमबीबीएस सीटों की क्षमता।
झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन को मिली जिम्मेदारी।
राज्य ब्यूरो, रांची। रांची जिला के कांके प्रखंड स्थित नगड़ी में बननेवाले गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज , हास्पिटल एंड रिसर्च, रांची (जीएमसीएचआर) अर्थात रिम्स-2 के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग ने इसकी जिम्मेदारी झारखंड स्टेट बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कारपोरेशन लिमिटेड (जेएसबीसीसीएल) को सौंपी है, जिसके द्वारा इस संस्थान के डिजाइन तैयार करने तथा निर्माण सहित पांच वर्ष के प्रोजेक्ट के लिए एजेंसी के चयन को लेकर टेंडर आमंत्रित कर दिया गया है।
4189.41 करोड़ से बननेवाले रिम्स-2 की योजना की स्वीकृति इसी माह कैबिनेट ने प्रदान की, जिसके बाद यह टेंडर प्रक्रिया शुरू की गई है। इसका निर्माण नगड़ी में उपलब्ध 150.92 एकड़ भूमि में होना है।
राज्य सरकार ने गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज , हास्पिटल एंड रिसर्च, रांची को 2800 से अधिक बेड वाली स्टेट ऑफ द आर्ट मल्टी स्पेशियलिटी/सुपर स्पेशलिटी सुविधाएं युक्त मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के रूप में स्थापित करने का निर्णय किया है।
इसमें प्रत्येक वर्ष एमबीबीएस की 200 सीटों पर नामांकन होगा, जिसे 250 यूजी सीटों, 200 पीजी सीटों और 200 सुपर स्पेशलाइज़ेशन सीटों तक बढ़ाया जा सकेगा।
यह मेडिकल कॉलेज प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों और सर्जनों और मेडिकल साइंटिस्टों की शिक्षा, मेडिकल रिसर्च और मरीज़ों की देखभाल के लिए एडवांस्ड मेडिकल टेक्नोलाजी के इस्तेमाल में लीडरशिप देने का काम करेगा।
तीन चरणों में होगा निर्माण
इस संस्थान का निर्माण तीन चरणों में होगा। पहले चरण में एशियन डवलपमेंट बैंक से प्राप्त राशि तथा राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए फंड से निर्माण कार्य होगा। इसमें हास्पिटल काम्प्लेक्स, स्कूल ऑफ मेडिसिन, रेजिडेंशियल आवास के साथ दूसरी संरचनाओं का निर्माण होगा।
दूसरे चरण में राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध कराए गए फंड से आइपीडी ब्लाक, हास्पिटल काम्प्लेक्स, रेजिडेंशियल क्वार्टर और दूसरी जरूरी सुविधाओं के बाकी फिनिशिंग के काम होंगे।
तीसरे चरण में पीपीपी माडल पर नेशनल मेडिकल कमीशन के नियमों के अनुसार सभी जरूरी छात्रावास आदि के निर्माण किए जाएंगे।
अस्पताल के बेहतर संचालन के लिए तैयार होंगे कई सिस्टम
एजेंसी आर्किटेक्चरल डिज़ाइन, स्ट्रक्चरल डिज़ाइन तैयार करने से लेकर काम शुरू करने के लिए स्थानीय निकाय तथा प्राधिकारों से ज़रूरी सहमति लेने का भी कार्य करेगी। भवन बनने के बाद लिफ्ट्स फायर फाइटिंग सिस्टम, फायर अलार्म सिस्टम, न्यूमेटिक ट्यूब सिस्टम, न्यूमेटिक वेस्ट और लांड्री कलेक्शन सिस्टम, आटोमेटेड फ़ार्मेसी डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम, सालिड वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम, आटोमेटेड वर्टिकल स्टोरेज रिट्रीवल सिस्टम, नर्स कॉल सिस्टम, हैंगर सिस्टम, मेडिकल एसेट मैनेजमेंट सिस्टम, हास्पिटल मैनेजमेंट इंफार्मेशन सिस्टम आदि तैयार करने की भी उसकी जिम्मेदारी होगी। एजेंसी को पांच वर्ष के लिए संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालेगी।