255 दिन तक दफ्तरों में घूमती रही फाइल, झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार की अपील खारिज की
झारखंड हाई कोर्ट ने एक अपील दाखिल करने में राज्य सरकार द्वारा की गई 255 दिनों की देरी पर कड़ी नाराजगी जताई है। ...और पढ़ें
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झारखंड हाई कोर्ट।
HighLights
हाई कोर्ट ने सरकार की 255 दिन की देरी पर नाराजगी जताई।
विभागीय प्रक्रियाओं को देरी का कारण मानने से कोर्ट का इनकार।
देरी माफी याचिका और संबंधित अपील कोर्ट ने खारिज की।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस राजेश शंकर की अदालत ने एक मामले में अपील दाखिल करने में हुई 255 दिनों की देरी पर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ी नाराजगी जताई है।
खंडपीठ ने कहा कि केवल विभागीय फाइलों के एक टेबल से दूसरे टेबल तक घूमने, कानूनी राय लेने और आंतरिक प्रक्रिया का हवाला देकर इतनी लंबी देरी को सही नहीं ठहराया जा सकता। कोर्ट ने देरी माफी की याचिका खारिज कर दी। इसके साथ ही संबंधित अपील भी खारिज हो गईं।
मामला एकल पीठ के 29 अगस्त 2024 के आदेश के खिलाफ राज्य सरकार की ओर से दायर अपील से जुड़ा था। अपील दाखिल करने में 255 दिनों की देरी हुई थी।
राज्य सरकार ने देरी के लिए कानूनी राय लेने, रिकॉर्ड जुटाने और विभागीय स्तर पर फाइल के आगे बढ़ने का हवाला दिया था।
खंडपीठ ने कहा कि विभाग यह स्पष्ट नहीं कर पाया कि अलग-अलग चरणों में फाइल कितने समय तक क्यों रुकी रही। कोर्ट ने कहा कि आदेश 29 अगस्त 2024 को पारित हुआ था, लेकिन विभाग की ओर से पहला ठोस कदम करीब दो महीने बाद 23 अक्टूबर 2024 को उठाया गया।
अधिकारियों के पास घूमती रही फाइल
इसके बाद भी फाइल लंबे समय तक विभिन्न अधिकारियों के पास घूमती रही। 25 नवंबर 2024 के बाद फाइल को अंडर सेक्रेटरी तक पहुंचने में करीब 45 दिन लग गए। कोर्ट ने इस अवधि को पूरी तरह अस्पष्ट बताया।
कोर्ट ने कहा कि 12 मार्च 2025 को फाइल अपर मुख्य सचिव के पास भेजी गई और आठ अप्रैल को मंजूरी मिली। इस प्रक्रिया में भी करीब 27 दिन लगे, जिसका कोई संतोषजनक कारण नहीं बताया गया। इसके बाद 30 अप्रैल को फाइल कानून अधिकारी के पास भेजे जाने के बावजूद अपील 10 जून 2025 को दाखिल हुई।
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इस बीच के 40 दिनों का भी राज्य सरकार ने कोई स्पष्ट हिसाब नहीं दिया। खंडपीठ ने सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि सीमा कानून सरकार समेत सभी पर समान रूप से लागू होता है।
सरकारी विभाग केवल अपनी नौकरशाही प्रक्रिया और फाइलों की आवाजाही को देरी का पर्याप्त कारण नहीं बता सकते। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि देरी माफी के लिए वास्तविक और संतोषजनक कारण बताना जरूरी है।
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