झारखंड हाई कोर्ट ने पारिवारिक पेंशन मामले में एडवोकेट वेलफेयर कमेटी को भेजा नोटिस, मांगा जवाब
झारखंड हाई कोर्ट ने एक विधवा की पारिवारिक पेंशन की मांग पर सुनवाई करते हुए एडवोकेट वेलफेयर पेंशन कमेटी और ट्रस्टी कमेटी को नोटिस जारी किया है। याचिकाक ...और पढ़ें
-1774275429954_m.webp)
झारखंड हाई कोर्ट ने भेजा नोटिस। (जागरण)
HighLights
हाई कोर्ट ने पेंशन कमेटी को नोटिस जारी किया।
विधवा को पारिवारिक पेंशन में देरी का मामला।
बार काउंसिल ने याचिकाकर्ता के दावे का समर्थन किया।
राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के जस्टिस आनंद सेन की पीठ में विधवा की ओर से पारिवारिक पेंशन की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई।
सुनवाई के बाद अदालत ने झारखंड एडवोकेट वेलफेयर पेंशन कमेटी और ट्रस्टी कमेटी को नोटिस जारी किया है। यह याचिका झारखंड एडवोकेट वेलफेयर (पेंशन एवं पारिवारिक पेंशन) नियमावली, 2012 के तहत दाखिल की गई है।
अदालत ने दोनों समितियों को नोटिस जारी करते हुए तीन सप्ताह के अंदर जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया। प्रार्थी ने आरोप लगाया है कि उनके पति की मृत्यु के बाद पारिवारिक पेंशन स्वीकृत करने में अनावश्यक देरी की गई।
सुनवाई के दौरान झारखंड स्टेट बार काउंसिल ने अदालत में उपस्थित होकर प्रार्थी के दावे का समर्थन किया और कहा कि उन्हें पेंशन का अधिकार है।
प्रैक्टिस करते थे प्रार्थी के पति
प्रार्थी के पति धनबाद न्यायालय में प्रैक्टिस करने वाले अधिवक्ता थे और बार एसोसिएशन के सदस्य थे। उन्होंने अगस्त 2022 में 10 हजार रुपये की एकमुश्त राशि जमा कर पेंशन फंड की सदस्यता ली थी।
वे झारखंड बार काउंसिल जर्नल के भी सदस्य थे। नवंबर 2023 में उनके निधन के बाद विधवा ने नियम 15(4) के तहत निर्धारित फार्म डी में सभी आवश्यक दस्तावेजों के साथ आवेदन प्रस्तुत किया। इसके बावजूद न तो पेंशन स्वीकृत की गई और न ही देरी का कोई कारण बताया गया।
याचिका में यह भी कहा गया है कि पेंशन देने में देरी अनुच्छेद 14 और अनुच्छेद 21 का उल्लंघन है। साथ ही, नियम 14(3) के अनुसार मृत अधिवक्ता की पत्नी को पारिवारिक पेंशन का स्पष्ट अधिकार है। मामले की अगली सुनवाई नोटिस अवधि के बाद होगी।