झारखंड कृषि निदेशालय में भ्रष्टाचार का आरोप, ब्लैकलिस्टेड 14 कंपनियों को बिना जांच दिया काम करने का आदेश
भाकपा ने केंद्रीय कृषि मंत्रालय से झारखंड कृषि निदेशालय में भ्रष्टाचार की शिकायत की है।

एआई द्वारा जेनरेट इमेज।
HighLights
काली सूची की 14 कंपनियों को फिर मिले कार्यादेश।
शर्तें पूरी न होने पर भी करोड़ों का भुगतान हुआ।
भाकपा ने केंद्रीय हस्तक्षेप और एसआईटी जांच मांगी।
राज्य ब्यूरो, रांची। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के जिला सचिव सह राज्य कार्यकारिणी सदस्य अजय कुमार सिंह ने केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के उप आयुक्त योगेश ए. रौंडल से पत्राचार कर काली सूची में डाली गई 14 कंपनियों को फिर से कार्यादेश मिलने की जानकारी दी है।
उन्होंने आग्रह किया है कि केंद्र हस्तक्षेप करे, कार्यादेश व भुगतान रोकने के लिए झारखंड सरकार को निर्देशित करे और पूरे मामले की जांच विशेष जांच टीम (एसआईटी) से कराए।
अजय कुमार सिंह ने झारखंड के कृषि निदेशालय में भ्रष्टाचार की शिकायत की है और कहा है कि झारखंड कृषि निदेशालय ने वर्ष 2023 में जिन 14 कंपनियों को गंभीर अनियमितता के आरोप में काली सूची में डाला था, उन्हें 30 दिनों के भीतर तार्किक आदेश देकर मुक्त कर दिया था।
इन कंपनियों में मोहित इंडिया, मेक नाउ इंडस्ट्रीज, ग्लोबल मैकेनिकल इक्विपमेंट, प्रीमियर इरिगेशन एग्रीटेक प्राइवेट लिमिटेड, निंबस पाइप्स लिमिटेड, मोहित पालिटेक प्राइवेट लिमिटेड, वेदांता पालीमर्स प्राइवेट लिमिटेड, रूंगटा इरिगेशन लिमिटेड, श्री भंडारी प्लास्टिक प्राइवेट लिमिटेड, भारत ड्रिप इरिगेशन एंड एग्रो, आरएम ड्रिप एंड स्प्रिंकलर सिस्टम लिमिटेड, समय इरिगेशन प्राइवेट लिमिटेड, दिनेश इरिगेशन प्राइवेट लिमिटेड व इरिलिंक ड्रिप इरिगेशन इंडस्ट्रीज शामिल हैं।
इन कंपनियों को मुक्त करने संबंधित तार्किक आदेश की पहली शर्त यह थी कि सभी किसानों के यहां लगे कम गुणवत्ता वाले उपकरणों के बैच बदलकर पुन: सीपेट से जांच कराकर रिपोर्ट कृषि निदेशक रांची को समर्पित करेंगे, जो जांच अब तक नहीं हो सकी है।
करोड़ों रुपये का हुआ भुगतान
शर्तों का अनुपालन नहीं होने पर इन कंपनियों को काली सूची में ही माना जाना था, लेकिन उन्हें फिर से कार्यादेश मिल गया और करोड़ों रुपयों का भुगतान भी हो गया।
तत्कालीन कृषि निदेशक ताराचंद के 18 मार्च 2024 के आदेश में भी जांच रिपोर्ट प्राप्त होने तक कार्यादेश शिथिल रखने व हजारीबाग के उपायुक्त की रिपोर्ट पर प्राथमिकी दर्ज करने का आदेश था, लेकिन कुछ नहीं हुआ।
इसलिए उन्होंने सभी 14 कंपनियों के भुगतान व कार्यादेश पर रोक लगाने के लिए झारखंड सरकार को निर्देश देने, पूरे मामले की एसआईटी से जांच कराने व भारत सरकार की योजना प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) के तहत दिए गए अनुदान की वसूली पर विचार करने की मांग की है।
