कहीं 9 दिन में बन गया घर, तो कहीं पीएम आवास में चल रहा निजी स्कूल; झारखंड में CAG की जांच में खुलासा
सीएजी रिपोर्ट में झारखंड में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण में गंभीर गड़बड़ियां सामने आई हैं, जिसमें नौ दिन में आवास निर्माण और निजी स्कूल संचालन जै ...और पढ़ें

पीएम आवास योजना। (जागरण)
HighLights
नौ दिन में आवास निर्माण, निजी स्कूल संचालन जैसी गड़बड़ियां।
राज्य सरकार ने केवल 70% योजना राशि खर्च की।
लाखों योग्य परिवार योजना के लाभ से वंचित रहे।
राज्य ब्यूरो, रांची। सीएजी ने राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण क्रियान्वयन में गड़बड़ी को पकड़ी है। कहीं नौ दिन में योजना के तहत पीएम आवास बना दिया गया है। जबकि एक जगह आवास में स्कूल चल रहा है।
सीएजी की रिपोर्ट कहा गया है कि बोकारो के जरीडीह प्रखंड के बांधडीह, दक्षिण ग्राम पंचायत में एक लाभुक का आठ फरवरी को 2021 को आवास देने की स्वीकृति मिली और 17 फरवरी को उक्त आवास बना दिया गया। जरीडीह प्रखंड के चिलगड्डा पंचायत में इस योजना के तहत दो आवास बने।
लेकिन एक आवास में सनराइज पब्लिक स्कूल का संचालन किया जा रहा है। रागमढ़ जिल में दुल्मी प्रखंड के जमीरा गांव में दो पहिया रखने वाले लाभुक को पीएम आवास योजना का लाभ दिया गया है।
70 प्रतिशत राशि खर्च नहीं कर पाई सरकार
पांच सालों में राज्य सरकार प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण का 70 प्रतिशत राशि ही खर्च कर पाई है। इस योजना में 2.90 लाख ऐसे लोगों को शामिल कर लिया गया था, जिन्हें इसका लाभ नहीं मिलना चाहिए।
बाद में ग्राम सभा ने ऐसे लोगों को हटा दिया। लाभुकों के बार-बार सूची में शामिल करने और निकाले की वजह से देरी हुई। जिसकी वजह से 6.32 लाख लोग इस योजना में शामिल नहीं हो सके। मंगलवार को झारखंड की प्रधान महालेखाकर (आडिट) इंदु अग्रवाल ने प्रेसवार्ता के दौरान उक्त जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि आडिट के दौरान नमूना जांच के लिए बोकारा, दुमका, गिरिडीह, पलामू, रामगढ़ और सिमडेगा को चुना गया था।
इन जिलों के 12 प्रखंडों के 60 ग्राम पंचायतों में योजना से जुड़े सभी प्रकार के दस्तावेज की जांच के बाद रिपोर्ट में यह निष्कर्ष निकाला गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सामाजिक-आर्थिक जाति गणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार, राज्य में 19.28 लाख परिवार बेघर, कच्चे या जीर्ण शीर्ष मकान में रहते हैं।
इनमें से प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए निर्धारित मापदंड के तहत 14.88 लाख लोग अयोग्य पाए गए। आडिट के दौरान 2019-24 में योजना के तहत स्वीकृत आवासों की स्थिति का आकलन किया गया।
22.34 लाख योग्य परिवारों की बनी सूची
2016 से नवंबर 2022 तक 22.34 लाख योग्य परिवारों की सूची तैयार की गयी थी। इस सूची में भी कई तरह की गलतियां थीं। लाभुकों की सूची को अंतिम रूप देने में करीब दो साल की देर हुई।
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इसकी वजह से केंद्र सरकार ने 22.34 लाख के बदले सिर्फ 16.02 लाख आवास ही आवंटित किया गया। 6.32 लाख परिवार (यानी 28 प्रतिशत) इस योजना में शामिल नहीं हो सके।
राज्य सरकार ने 2016-24 की अवधि में केंद्र द्वारा आवंटित 16.02 लाख आवासों में से 15.92 लाख आवासों के निर्माण की स्वीकृति दी थी।
इसमें से जनवरी 2025 तक 15.62 लाख का निर्माण कार्य पूरा किया। यानी इस अवधि में योजना की उपलब्धि 98 प्रतिशत रही। आवासों को एक साल में पूरा करने के बदले अधिकतम तीन साल तक में पूरा किया गया।
रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में योजना का वित्तीय प्रबंधन भी सही नहीं था। राज्य में प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लिए कुल 20199.98 करोड़ रुपये उपलब्ध था।
लेकिन राज्य सरकार इसमें से सिर्फ 14113.07 करोड़ रुपये की खर्च कर सकी थी। इस तरह सरकार इस मद में सिर्फ 70 प्रतिशत राशि का ही इस्तेमाल कर सकी।
48 प्रतिशत आवास में नहीं मिला शौचालय
सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि सरकार ने वर्ष 2018 में ही राज्य के खुले में शौच से मुक्त घोषित कर दिया था। लेकिन अगस्त 2014 से दिसंबर 2024 तक की जांच में 48 प्रतिशत आवास में शौचालय की सुविधा नहीं मिली।
सरकार की ओर से अप्रैल 2024 में दी गई जानकारी के अनुसार राज्य में निर्माण पूरा हो चुके पीएम आवास में
आठ प्रतिशत शौचालय की सुविधा नहीं थी।
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