लोहरदगा में 8 साल पहले बना अस्पताल का नहीं मिला हैंडओवर, सिस्टम की सुस्ती की वजह से जुआरियों का कब्जा
लोहरदगा के भंडरा प्रखंड में 2018 में बना तीन करोड़ का अस्पताल भवन हैंडओवर न होने से जर्जर हो गया है और जुआरियों का अड्डा बन गया है। ...और पढ़ें
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HighLights
तीन करोड़ का अस्पताल भवन 8 साल से निष्क्रिय।
हैंडओवर न होने से जुआरियों का अड्डा बना।
ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल रहा।
राजेश प्रसाद गुप्ता, भंडरा (लोहरदगा)। भंडरा प्रखंड के गडरपो पंचायत अंतर्गत पलमी गांव में स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगभग तीन करोड़ रुपए की लागत से निर्मित कराया गया अस्पताल भवन आज खुद बीमार और जर्जर स्थिति में है।
सरकारी और विभागीय लापरवाही का आलम यह है कि करोड़ों की लागत से बना यह आलीशान अस्पताल भवन ग्रामीणों के इलाज के काम आने के बजाय अब जुआरियों का अड्डा बन चुका है। अस्पताल भवन का उपयोग लोगों को इलाज के लिए नहीं बल्कि लोगों का जुआ खेलने का अड्डा बन गया है।
इतना ही नहीं दो मंजिला अस्पताल भवन को तो कुछ लोगों द्वारा अतिक्रमण भी किया गया है। स्थानीय ग्रामीणों ने कहा कि वर्ष 2018 के बाद कभी इस अस्पताल भवन का उपयोग हुआ है, तो वह सिर्फ कोरोना काल के समय ही प्रवासी श्रमिकों को रखने के लिए किया गया है।
इसके बाद से अस्पताल भवन का उपयोग कभी नहीं हुआ है। इतना ही नहीं अब तो इस नवनिर्मित अस्पताल भवन में लगे पंखा, पानी का पाइप, वायरिंग का तार तक को लोग चोरी कर ले गए है। इसके अलावे खिड़की की भी चोरी हो गई है।
इस मामले में भंडरा प्रखंड चिकित्सा पदाधिकारी डा. संजय कुमार ने कहा कि पलमी में अस्पताल भवन बनने के बाद आज तक संवेदक द्वारा हैंडओवर नहीं दिया गया है। इसकी जानकारी जिला स्तरीय स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों को दिया गया है। पलमी में अस्पताल शुरु होने से काफी लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का लाभ मिलता। इस विषय पर एक बार पुनः स्वास्थ्य विभाग को अवगत कराया जाएगा।
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साल 2018 में ही पूरा हो चुका था निर्माण
गडरपो पंचायत के स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार इस सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस अस्पताल का निर्माण कराया गया था। साल 2018 में ही यह भवन पूरी तरह से बनकर तैयार हो चुका था।
निर्माण के समय ग्रामीणों में इस बात को लेकर काफी खुशी और उत्साह देखा जा रहा था कि अब उन्हें इलाज के लिए दूर शहरों के चक्कर नहीं काटने पड़ेंगे। लेकिन निर्माण पूरा होने के आठ साल बाद भी आज तक इस अस्पताल का शुभारंभ नहीं किया जा सका है। देखरेख के अभाव में अब यह सरकारी संपत्ति खंडहर में तब्दील होने लगी है।
कई प्रखंडों के लोगों को मिलता स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ
यदि यह अस्पताल समय पर शुरू हो जाता, तो भंडरा प्रखंड के सेमरा, गडरपो, पोड़ाहा, पलमी और अमदारी जैसे गांवों के लोगों को सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ मिलता। इसके अलावा, पड़ोसी गुमला जिले के सिसई और भरनो प्रखंड के सीमावर्ती ग्रामीणों के लिए भी यह अस्पताल बेहद मददगार साबित होता।
अस्पताल के चालू न होने से गरीब ग्रामीणों को आज भी इलाज के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने सरकार और संबंधित विभाग से मांग की है कि इस भवन को अविलंब उपयोगी बनाया जाए, ताकि लोगों को स्वास्थ्य लाभ मिल सके।
मामले में क्या कहते हैं संवेदक
योजना कार्य के संवेदक रामाकांत सिंह ने कहा कि विभागीय लापरवाही के कारण हैंड ओवर नहीं हो सका है। जिसमें अबतक पूरी राशि का भुगतान भी नहीं हुआ है। स्वास्थ्य विभाग द्वारा ही अस्पताल भवन का निर्माण कराया गया था।