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लातेहार में अब 'अनपढ़' शब्द बनेगा इतिहास, घर-घर जाकर होगा साक्षरता सर्वे, 2026 तक पूर्ण साक्षर जिला बनने का लक्ष्य

Published: Sat, 11 Apr 2026 03:37 PM (IST)

लातेहार जिला प्रशासन ने 2026 तक जिले को पूर्ण साक्षर बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए घर-घर जाकर साक्षरता ...और पढ़ें

गांव की चौपाल में पढ़ाई करती ग्रामीण महिलाएं। फाइल फोटो

गांव की चौपाल में पढ़ाई करती ग्रामीण महिलाएं। फाइल फोटो

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उत्कर्ष पाण्डेय, लातेहार। लातेहार में अब एक नई क्रांति दस्तक दे रही है और इस बार हथियार है किताब और कलम। जिला प्रशासन ने ठान लिया है कि अब जिले में अनपढ़ शब्द इतिहास बनकर रह जाएगा। यह जमीन पर उतरती हुई ऐसी पहल है, जो सीधे लोगों की जिंदगी में बदलाव लाने वाली है।

अभियान का अंदाज भी बिल्कुल अलग और असरदार है। अब कोई बच नहीं पाएगा न गांव का कोना, न शहर की गली। सरकारी स्कूलों से निकली टीमें घर-घर जाएंगी और दरवाजे पर खड़े होकर सीधा सवाल करेंगी अक्षर पहचानते हैं या नहीं..?

यह सवाल भले छोटा लगे, लेकिन इसके जवाब में छिपी होगी किसी की पूरी जिंदगी की सच्चाई। जो हां कहेगा वह आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ेगा और जो नहीं उसके लिए वहीं से एक नई शुरुआत लिखी जाएगी पढ़ाई की, समझ की व आत्मनिर्भरता की।

जिला साक्षरता समिति के नेतृत्व में चल रहा यह अभियान पूरी तरह मिशन मोड में है। खास बात यह है कि यह सिर्फ आंकड़े जुटाने का काम नहीं एक तरह का रियलिटी चेक है। कागजों में साक्षरता का प्रतिशत कुछ भी कहे अब असली तस्वीर घर-घर जाकर सामने लाई जाएगी।

अब छुपना मुश्किल, सच्चाई आएगी सामने

जो लोग अब तक हमें क्या जरूरत है पढ़ाई की बात कहकर किनारा करते रहे, उनके लिए अब बच निकलना आसान नहीं होगा। सर्वे टीम दरवाजे पर होगी, सवाल सीधा होगा और जवाब भी साफ चाहिए। शिक्षक, आंगनबाड़ी सेविकाएं और अन्य कर्मी इस अभियान के ग्राउंड हीरो होंगे।

ये लोग सिर्फ आंकड़े नहीं जुटाएंगे, बल्कि लोगों को समझाएंगे भी कि पढ़ाई क्यों जरूरी है। हर व्यक्ति की उम्र, स्थिति और सीखने की क्षमता को ध्यान में रखते हुए आगे की योजना बनाई जाएगी।

डेडलाइन ने बढ़ाई सर्वे की रफ्तार

प्रशासन ने इस मिशन को लेकर सख्त रुख अपनाया है। 25 अप्रैल तक पूरे जिले का सर्वे हर हाल में पूरा करना है। यानी कुछ ही दिनों में यह साफ हो जाएगा कि लातेहार में कितने लोग अब भी अक्षरों से दूर हैं। इसके बाद शुरू होगा असली खेल ऑपरेशन साक्षरता।

जहां-जहां निरक्षर मिलेंगे, वहीं-वहीं पढ़ाई की रोशनी जलाई जाएगी। गांवों में विशेष कक्षाएं चलेंगी, शाम के समय पढ़ाई के सत्र होंगे और माहौल ऐसा बनाया जाएगा कि सीखना एक उत्सव की तरह लगेगा।

गांव ही बनेगा ग्रामीणों के लिए क्लास रूम

खासकर ग्रामीण इलाकों पर प्रशासन की नजर है, जहां अभी भी निरक्षरता ज्यादा है। यहां एक पढ़ा लिखा एक को सिखाए का फॉर्मूला लागू किया जाएगा। यानी जो लोग पहले से पढ़े-लिखे हैं, उन्हें भी इस मुहिम का हिस्सा बनाया जाएगा। जब गांव की चौपाल पर सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि अ, आ, इ की चर्चा होगी तो माहौल सुखद बदलाव लेकर आ जाएगा।

2026 डेडलाइन नहीं है ड्रीमलाइन

प्रशासन ने लक्ष्य रखा है कि 2026 तक लातेहार को पूर्ण साक्षर जिला बना दिया जाए। यानी आने वाले दो साल में ऐसा बदलाव देखने को मिलेगा, जहां हर व्यक्ति कम से कम अपना नाम पढ़ लिख सकेगा, फॉर्म भर सकेगा और अपने अधिकार समझ सकेगा। अधिकारियों का कहना है कि साक्षरता सिर्फ पढ़ाई के साथ आत्मसम्मान की पहली सीढ़ी है। जब कोई व्यक्ति खुद अपना नाम लिखता है तो वह अक्षर के साथ अपनी पहचान गढ़ता है।

अब बदलेगा लातेहार का मिजाज

यह अभियान एक सामाजिक आंदोलन बनने की ओर बढ़ रहा है। अगर यह मिशन सफल रहा, तो लातेहार उन जिलों में शामिल होगा, जहां शिक्षा हर घर की हकीकत बन चुकी होगी।

अब लातेहार में अनपढ़ रहना पुरानी बात होने वाली है, क्योंकि इस बार प्रशासन ने पूरी तैयारी के साथ मैदान में उतर चुका है। जब प्रशासन की जिद, शिक्षकों की मेहनत और समाज का साथ मिल जाएगा तो वो दिन दूर नहीं, जब हर हाथ में कलम होगी और हर चेहरे पर आत्मविश्वास के साथ साक्षर लातेहार बनाने का सपना साकार होगा।

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