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    टाटा स्टील की ब्रिटेन सरकार को चेतावनी, सस्ते आयात से प्लांट बंद होने का खतरा; रोजगार पर बड़ा संकट

    Updated: Mon, 27 Jul 2026 09:01 PM (GMT+05:30)

    टाटा स्टील ने ब्रिटेन सरकार को चेतावनी दी है कि नई टैरिफ कोटा नीति और सस्ते एशियाई स्टील आयात से उसके ब्रिटिश प्लांट बंद होने का खतरा है। कंपनी ने हजा ...और पढ़ें

    ब्रिटेन में नई टैरिफ कोटा नीति लागू होने से एशियाई देशों से बढ़ सकता है आयात।

    ब्रिटेन में नई टैरिफ कोटा नीति लागू होने से एशियाई देशों से बढ़ सकता है आयात।

    HighLights

    1. टाटा स्टील ने ब्रिटेन सरकार को आयात नीति पर चेताया।

    2. सस्ते एशियाई स्टील से ब्रिटिश प्लांट बंद होने का खतरा।

    3. हजारों नौकरियां दांव पर, अनुचित प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा की मांग।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। भारतीय इस्पात क्षेत्र की दिग्गज कंपनी टाटा स्टील ने ब्रिटेन की सरकार को चेतावनी दी है कि वहां आयात नीति में किए गए बदलावों और एशियाई देशों से होने वाले सस्ते स्टील के आयात के कारण उसके ब्रिटिश प्लांट बंद होने के कगार पर पहुंच सकते हैं।

    टाटा स्टील ने स्पष्ट किया है कि यदि अनुचित प्रतिस्पर्धा से सुरक्षा प्रदान नहीं की गई, तो दक्षिण वेल्स स्थित उसके प्रमुख प्लांट आर्थिक रूप से अलाभकारी हो जाएंगे, जिससे हजारों नौकरियां दांव पर लग सकती हैं।

    सस्ते एशियाई आयात का बढ़ा दबाव

    टाटा स्टील की यह चेतावनी ब्रिटेन सरकार की नई टैरिफ कोटा व्यवस्था लागू होने के बाद आई है। नई आयात नीति का मुख्य उद्देश्य चीन, भारत और वियतनाम जैसे एशियाई देशों से होने वाले सस्ते स्टील के प्रवाह को नियंत्रित करना था, जिसके तहत निर्धारित सीमा से अधिक आयात होने पर 50 प्रतिशत तक सीमा शुल्क लगाने का प्रावधान है।

    हालांकि, गैल्वनाइज्ड (जस्ता लेपित) स्टील श्रेणी में इस नीति की वजह से भारी भ्रम की स्थिति पैदा हो गई है। इसके अंतर्गत वियतनाम के लिए वार्षिक कोटा सीमा को 51,000 टन से तीन गुना बढ़ाकर 1,74,000 टन कर दिया गया है, जबकि भारत के लिए भी यह कोटा 98,000 टन से बढ़ाकर 1,25,000 टन सालाना किया गया है।

    लैनवर्न प्लांट के सामने गंभीर चुनौती

    टाटा स्टील का दक्षिण वेल्स स्थित लैनवर्न प्लांट सालाना लगभग 6 लाख टन गैल्वनाइज्ड स्टील का उत्पादन करता है। कंपनी का मानना है कि नई नीति के बाद बाजार में वियतनाम और भारत के सस्ते स्टील की बाढ़ आने से घरेलू उत्पादों की मांग बेहद कम हो जाएगी।

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    टाटा स्टील ने ब्रिटिश सरकार को आगाह किया है कि इस विषम स्थिति में घरेलू स्टील इकाइयों का परिचालन जारी रखना पूरी तरह से असंभव हो जाएगा। कंपनी ने कहा कि आयात और घरेलू उत्पादन के बीच उचित संतुलन नहीं होने पर ब्रिटेन के समूचे विनिर्माण क्षेत्र की बुनियाद कमजोर पड़ जाएगी।

    ग्रीन स्टील में बदलाव का ऐतिहासिक दौर

    टाटा स्टील की यह चेतावनी ऐसे महत्वपूर्ण समय पर आई है जब कंपनी ब्रिटेन में अपने परिचालन को पूरी तरह पुनर्गठित कर रही है। नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन मानकों को पूरा करने के लिए कंपनी ने पोर्ट टालबोट स्थित अपने पारंपरिक ब्लास्ट फर्नेस को बंद कर दिया है।

    इसके स्थान पर लगभग 1.25 अरब पाउंड (करीब 13,500 करोड़ रुपये) की लागत से पर्यावरण-अनुकूल इलेक्ट्रिक-आर्क फर्नेस स्थापित किए जा रहे हैं, जो कबाड़ धातुओं (स्क्रैप मेटल) का उपयोग कर ''ग्रीन स्टील'' का उत्पादन करेंगे। संक्रमण काल के इस नाजुक दौर में विदेशी आयात से मिलने वाली कड़ी चुनौती कंपनी के अस्तित्व को खतरे में डाल रही है।

    ब्रिटिश उद्योगपतियों में भी असंतोष

    ब्रिटेन के स्टील उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों का मानना है कि नई व्यवस्था में भारतीय आयात को बढ़ा कोटा मिलना दोनों देशों के बीच प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के तहत दी गई एक रणनीतिक छूट हो सकती है।

    हालांकि, टाटा स्टील के मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजेश नायर ने चिंता जाहिर की है कि कई श्रेणियों में वर्तमान आयात कोटा सीमा घरेलू बाजार की वास्तविक परिस्थितियों के अनुकूल नहीं है।

    उन्होंने कहा कि पर्यावरण मानकों के कड़े पालन के कारण घरेलू निर्माताओं की लागत अधिक बैठती है, जबकि आयातित माल के लिए ऐसी कोई कड़ाई नहीं होती, जिससे बाजार में असमान प्रतिस्पर्धा की स्थिति पैदा हो गई है।

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