Trending

    विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

    पटमदा में माफिया राज, पहाड़ों का सीना चीर, नदियों को लूट रहे

    Updated: Wed, 24 Jun 2026 11:57 PM (IST)

    पूर्वी सिंहभूम के पटमदा में बालू और पत्थर माफिया का आतंक चरम पर है, जो इको-सेंसिटिव जोन में अवैध खनन कर प्राकृतिक संपदा को नष्ट कर रहे हैं। माफिया प्र ...और पढ़ें

    बोड़ाम के जंगल के बीच में रखी गई अवैध गिट्टी।

    बोड़ाम के जंगल के बीच में रखी गई अवैध गिट्टी।

    HighLights

    1. इको-सेंसिटिव जोन में भी धड़ल्ले से हो रहा खनन।

    2. माफिया प्रशासनिक अधिकारियों पर जानलेवा हमला करने से नहीं चूकते।

    जासं, जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम के पटमदा क्षेत्र में बालू और पत्थर माफिया का दुस्साहस चरम पर है। ये माफिया न केवल दिन-रात पहाड़ों का सीना चीरकर और नदियों से बालू लूटकर प्राकृतिक संपदा को नष्ट कर रहे हैं, बल्कि विरोध करने पर प्रशासनिक अधिकारियों पर जानलेवा हमला करने से भी नहीं चूक रहे।

    जिला प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद इन पर लगाम नहीं लग पा रही है, जिससे पूरे इलाके में सरकारी तंत्र से ज्यादा माफिया का खौफ नजर आता है।

    इको-सेंसिटिव जोन में खुली लूट 

    पटमदा का एक बड़ा हिस्सा दलमा वन्यजीव अभयारण्य के करीब होने के कारण इको-सेंसिटिव जोन में आता है, जहां किसी भी तरह का खनन पूरी तरह प्रतिबंधित है।

    इसके बावजूद लावा पंचायत के सिसदा, ओड़िया पंचायत के चिरूडीह, बोड़ाम और ठनठनी घाटी जैसे इलाकों में भारी मशीनों से अवैध खनन और स्टोन क्रशर का संचालन धड़ल्ले से जारी है।

    कई खनन कारोबारी लीज की अवधि समाप्त होने के बाद भी रात के अंधेरे में अवैध खनन को अंजाम दे रहे हैं। नदियों से बेतहाशा बालू के उठाव और पहाड़ों के अंधाधुंध कटान से क्षेत्र का पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र गंभीर संकट में है। 

    टास्क फोर्स की कार्रवाई और माफिया का पलटवार

    अवैध खनन के खिलाफ जीरो-टालरेंस की नीति के तहत जिला खनन टास्क फोर्स ने कई बार कार्रवाई की है। हाल ही में सिसदा गांव में छापेमारी कर 50 हजार सीएफटी से अधिक पत्थर बोल्डर और एक भारी एक्सकेवेटर मशीन जब्त की गई थी।

    इस मामले में पत्थर व्यवसायी सुभाष शाही समेत कई लोगों पर प्राथमिकी भी दर्ज हुई। लेकिन माफिया के हौसले इतने बुलंद हैं कि वे प्रशासनिक टीम पर हमला करने से भी नहीं डरते।

    जनवरी में, ठनठनी घाटी में अवैध रूप से पत्थर ले जा रहे एक ट्रैक्टर को रोकने पर पटमदा के अंचलाधिकारी (सीओ) और उनकी टीम पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया गया था।

    हमलावर इतने बेखौफ थे कि वे पुलिस के सामने ही जब्त ट्रैक्टर को जबरन छुड़ाकर ले गए और चौकीदारों को जान बचाकर भागना पड़ा।

    मुख्य सरगना पकड़ से बाहर, तंत्र पर सवाल 

    ग्रामीणों ने कई बार उपायुक्त कार्यालय में शिकायतें की हैं कि माफिया वन और रैयती भूमि पर बिना ग्रामसभा की मंजूरी के कब्जा कर रहे हैं।

    हालांकि प्रशासन ने कुछ खदानों के पास गड्ढे खुदवाए हैं और कुछ गाड़ियां भी जब्त की हैं, लेकिन ये कार्रवाइयां नाकाफी साबित हो रही हैं।

    हाल के दिनों में बोड़ाम और पटमदा में बालू लदे कुछ हाइवा पकड़े गए हैं, लेकिन अवैध खनन का यह विशाल नेटवर्क बदस्तूर जारी है।

    स्थानीय लोगों का आरोप है कि धरातल पर केवल छोटी मछलियों पर कार्रवाई होती है, जबकि इस अवैध कारोबार के मुख्य सरगना अब भी कानून की पकड़ से बाहर हैं।

    इस पूरे मामले पर आधिकारिक पक्ष जानने के लिए जिला खनन पदाधिकारी सतीश कुमार नायक के फोन नंबर 95720 27311 पर संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।

    यह भी पढ़ें- एनजीटी की रोक बेअसर: खरकई नदी का सीना चीर रहे बालू माफिया, प्रशासन और टास्क फोर्स पर उठे सवाल

    यह भी पढ़ें- दामोदर नदी का अस्तित्व खतरे में! सरयू राय ने अवैध खनन पर सीबीआई जांच की मांग उठाई

    यह भी पढ़ें- पलामू में पर्यावरण से खिलवाड़ पर घिरे खनन माफिया, सोहया पहाड़ी में अवैध माइनिंग का मामला पहुंचा NGT

    खबरें और भी