फाइलों के भंवर में धालभूमगढ़ एयरपोर्ट: 7 साल बाद भी वन मंजूरी का इंतजार, थमी कोल्हान के विकास की रफ्तार
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना 7 साल से अधिक समय से वन और पर्यावरण मंजूरी के कारण अटकी हुई है, जिससे कोल्हान क्षेत्र का विकास बाधित हो रहा है।

जमशेदपुर में वर्तमान में मौजूद सोनारी एयरपोर्ट की रनवे पट्टी काफी छोटी है, जिसके कारण वहां वाणिज्यिक श्रेणी के बड़े यात्री विमान नहीं उतर सकते।
HighLights
परियोजना 7.5 साल से वन मंजूरी के कारण अटकी हुई है।
वन भूमि हस्तांतरण, पेड़ कटाई, हाथी गलियारा मुख्य बाधाएं हैं।
कोल्हान के विकास हेतु बड़े विमानों का इंतजार जारी है।
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वन विभाग की 19 आपत्तियों का पेच
अगस्त 2024 में केंद्रीय मंत्रालय ने इस संबंध में 19 बिंदुओं पर विस्तृत जवाब मांगा था। हालांकि, अगस्त 2026 तक जमशेदपुर वन प्रमंडल और एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने संयुक्त रूप से इन 19 आपत्तियों पर अपनी अनुपालन रिपोर्ट तैयार कर राज्य वन विभाग को भेज दी है।
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क्यों अटका है धालभूमगढ़ एयरपोर्ट?
धालभूमगढ़ एयरपोर्ट परियोजना के लटकने का मुख्य कारण त्रिकोणीय गतिरोध है:
- पर्यावरणीय मुद्दा: 99.256 हेक्टेयर वन भूमि का हस्तांतरण और लगभग 79,332 हरे-भरे पेड़ों की कटाई।
- वन्यजीव सुरक्षा: सिंहभूम एलीफेंट रिजर्व और हाथी गलियारे से निकटता के कारण मानव-हाथी संघर्ष (Human-Elephant Conflict) बढ़ने की गंभीर आशंका।
- प्रशासनिक व नीतिगत सुस्ती: 2019 में शिलान्यास के बाद 2023 में पर्यावरणीय कारणों से परियोजना को लगभग बंद घोषित कर दिया गया था। 2026 में एएआई और डीएफओ द्वारा 19 बिंदुओं का अनुपालन जवाब भेजने तथा विवादित नौ एकड़ भूमि को नक्शे से हटाने के बाद परियोजना पुनर्जीवित तो हुई है, परंतु 'स्टेज-1' फॉरेस्ट क्लियरेंस न मिलने से निर्माण कार्य धरातल पर शुरू नहीं हो पा रहा है।
क्या हो सकता है व्यावहारिक समाधान?
परियोजना को धरातल पर उतारने का रास्ता वैज्ञानिक वन प्रबंधन और दूरदर्शी नीति में निहित है:
- संशोधित प्लान: एएआई (AAI) को पूरे 99.256 हेक्टेयर क्षेत्र के बजाय केवल अत्यंत आवश्यक रनवे और टर्मिनल बिल्डिंग के इस्तेमाल का संशोधित प्लान प्रस्तुत करना होगा।
- क्षतिपूरक वनीकरण व आधुनिक बाड़: लगभग 198 हेक्टेयर भूमि पर प्रभावी क्षतिपूरक वनीकरण (Compensatory Afforestation), हाथियों की आवाजाही सुरक्षित करने हेतु आधुनिक सुरक्षा बाड़ लगाने और नो-नॉइज जोन तकनीक अपनाकर वन विभाग से स्टेज-1 व स्टेज-2 की मंजूरी पाई जा सकती है।
- चाकुलिया का विकल्प: यदि धालभूमगढ़ में पर्यावरणीय मंजूरी मिलना पूरी तरह से असंभव साबित होता है, तो पास ही स्थित 514 एकड़ में फैले द्वितीय विश्व युद्ध काल के चाकुलियाएयरड्रोम को कम पर्यावरणीय बाधाओं वाले एक मजबूत विकल्प के रूप में विकसित किया जा सकता है।
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