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जमशेदपुर वन प्रमंडल ने AAI को तीन बार भेजा पत्र, नहीं मिली रिपोर्ट; अधर में धालभूमगढ़ हवाई अड्डा

Published: Mon, 31 Aug 2026 08:00 AM (IST)

धालभूमगढ़ हवाई अड्डा परियोजना भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की सुस्ती के कारण ठप पड़ी है। वन भूमि अपयोजन संबंधी 19 ...और पढ़ें

केंद्रीय मंत्रालय ने 29 अगस्त 2024 को परियोजना से जुड़े 19 बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए अनुपालन प्रतिवेदन मांगा था।

केंद्रीय मंत्रालय ने 29 अगस्त 2024 को परियोजना से जुड़े 19 बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए अनुपालन प्रतिवेदन मांगा था।

HighLights

  1. AAI की सुस्ती से धालभूमगढ़ हवाई अड्डा परियोजना ठप।

  2. वन भूमि अपयोजन पर AAI ने नहीं दी रिपोर्ट।

  3. राज्य वन विभाग ने AAI को तीन बार रिमाइंडर भेजा।

जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम जिले के तहत प्रस्तावित बहुप्रतीक्षित धालभूमगढ़ हवाई अड्डा परियोजना में वन भूमि अपयोजन (डायवर्जन) की प्रक्रिया भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) की सुस्ती के कारण ठप पड़ी है।  
केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा उठाए गए 19 बिंदुओं का निराकरण प्रतिवेदन एएआई रांची कार्यालय द्वारा उपलब्ध न कराए जाने से यह प्रस्ताव राज्य स्तर पर ही अधर में लटका हुआ है।
 

तीन बार भेजे जा चुके हैं रिमाइंडर पत्र

राज्य वन, पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के आधिकारिक दस्तावेजों के अनुसार, केंद्रीय मंत्रालय ने 29 अगस्त 2024 को परियोजना से जुड़े 19 बिंदुओं पर आपत्ति जताते हुए अनुपालन प्रतिवेदन मांगा था। 
 
इसके आलोक में जमशेदपुर वन प्रमंडल पदाधिकारी कार्यालय ने 12 सितंबर 2024 को एयरपोर्ट निदेशक, बिरसा मुंडा विमानपत्तन, रांची को पत्र भेजकर जवाब तैयार करने को कहा था। 
 
इसके बाद 16 दिसंबर 2024 और 19 फरवरी 2025 को स्मार पत्र (रिमाइंडर) भी जारी किए गए। इसके बावजूद प्रयोक्ता अभिकरण (AAI) की ओर से अब तक निराकरण प्रतिवेदन विभाग को नहीं सौंपा गया है।
 

पांच मौजा की 99.256 हेक्टेयर भूमि का गणित

हवाई अड्डा विस्तार और निर्माण के लिए कुल 99.256 हेक्टेयर भूमि के उपयोग का प्रस्ताव तैयार किया गया है।

  •     बुरुडीह मौजा: 38.336 हेक्टेयर
  •     चारचाका मौजा: 15.629 हेक्टेयर
  •     देवसोल मौजा: 3.319 हेक्टेयर
  •     कोकपारा नरसिंहगढ़ मौजा: 41.907 हेक्टेयर
  •     रूआशौल मौजा: 0.065 हेक्टेयर
कुल प्रस्तावित भूमि में 53.788 हेक्टेयर आरक्षित व संरक्षित वन भूमि तथा 45.403 हेक्टेयर जंगल-झाड़ी (गैर मजरुआ) भूमि शामिल है।
 
वहीं, पर्यावरण क्षतिपूर्ति के तहत क्षतिपूरक वनीकरण के लिए चाकुलिया वन क्षेत्र में 198.512 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है।
 

विधानसभा में भी उठा मामला

हाल ही में जमशेदपुर पूर्व की विधायक पूर्णिमा साहू द्वारा विधानसभा में लाए गए गैर-सरकारी संकल्प पर सरकार ने लिखित वक्तव्य में साफ किया था कि विमानपत्तन निदेशक, रांची से रिपोर्ट प्राप्त होते ही स्टेज-1 स्वीकृति के लिए प्रस्ताव केंद्र को भेज दिया जाएगा। 
 
सरकार के उप सचिव चंद्रशेखर प्रसाद के स्तर से जारी पत्र भी इस बात की पुष्टि करते हैं कि मामला पूरी तरह एएआई की रिपोर्ट पर अटका हुआ है।

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