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महज 7 साल 7 माह की उम्र में ‘मिशुक’ ने रचा इतिहास, कविता सुनाकर इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में दर्ज कराया नाम

Published: Sun, 23 Aug 2026 03:57 PM (GMT+05:30)

नन्हे कलाकार अर्कस्मित पाखिरा (मिशुक) ने महज 7 साल 7 महीने की उम्र में 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में अपना ...और पढ़ें

अर्कस्मित पाखिरा (मिशुक)। फोटो जागरण

अर्कस्मित पाखिरा (मिशुक)। फोटो जागरण

HighLights

  1. अर्कस्मित पाखिरा ने 7 साल 7 महीने में रिकॉर्ड बनाया।

  2. 'इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स' में नाम दर्ज हुआ।

  3. स्पष्ट उच्चारण और कविता प्रेम से मिली उपलब्धि।

संवाद सूत्र, खड़गपुर। महज 7 वर्ष 7 माह की उम्र में अपनी शानदार व स्पष्ट उच्चारण वाली प्रस्तुति से विशेष पहचान बनाने वाले मेदिनीपुर शहर के नन्हे कलाकार अर्कस्मित पाखिरा (मिशुक) ने एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है।

अब उसका नाम ‘इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स’ में दर्ज हो गया है। इतनी कम उम्र में यह उपलब्धि हासिल कर अर्कस्मित ने न केवल अपने परिवार और विद्यालय, बल्कि पूरे मेदिनीपुर को गौरवान्वित किया है।

अर्कस्मित मेदिनीपुर शहर के नजरगंज इलाके का रहने वाला है। वह चुआडांगा स्कूल के शिक्षक डॉ. हीरूलाल पाखिरा और मनोहरपुर राजारामचंद्र विद्यानिकेतन की शिक्षिका श्रीमती प्रितिशा दे के इकलौते पुत्र हैं। वर्तमान में वह रॉयल एकेडमी विद्यालय में दूसरी कक्षा का छात्र है।

बताया जाता है कि अर्कस्मित को बचपन से ही कविता और आवृत्ति (अभिवाचन) के प्रति विशेष रुचि रही है। नियमित अभ्यास, लगन और आत्मविश्वास के साथ उसने अपनी इस प्रतिभा को लगातार निखारा।

उसकी स्पष्ट उच्चारण शैली, सहज एवं प्रभावशाली प्रस्तुति तथा कविता के प्रति गहरी रुचि ने उसे इस मुकाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

अर्कस्मित की इस सफलता के पीछे उसके माता-पिता और परिवार के साथ-साथ उसकी आवृत्ति की गुरुमां का भी महत्वपूर्ण योगदान रहा है। गुरुमां के नियमित प्रशिक्षण, मार्गदर्शन और निरंतर प्रयासों से अर्कस्मित ने कम उम्र में ही अपनी प्रतिभा को एक अलग पहचान दिलाई।

इस उपलब्धि से अर्कस्मित के परिवार में खुशी का माहौल है। परिवार के सदस्यों ने कहा कि यह उनके लिए बेहद गर्व और यादगार क्षण है। हालांकि, वे इस उपलब्धि को अर्कस्मित के भविष्य की यात्रा की शुरुआत के रूप में देखते हैं।

उनका मानना है कि अभी उसे लंबा सफर तय करना है और आने वाले दिनों में वह अपनी प्रतिभा को और विकसित कर सफलता की नई ऊंचाइयां हासिल करेगा।

शुभचिंतकों ने दी बधाई

अर्कस्मित की इस उपलब्धि पर उसके विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं, परिवार, मित्रों और शुभचिंतकों ने उसे बधाई और शुभकामनाएं दी हैं। सभी ने उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए उम्मीद जताई कि वह आगेभी अपनी प्रतिभा के माध्यम से मेदिनीपुर का नाम रोशन करेगा।

लोगों के मुताबिक महज 7 वर्ष 7 माह की उम्र में इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में नाम दर्ज होना निश्चित रूप से अर्कस्मित के लिए बड़ी उपलब्धि है। उसकी यह सफलता न केवल उसके परिवार के लिए गर्व का विषय है, बल्कि मेदिनीपुर के लिए भी खुशी और सम्मान का अवसर है।

अर्कस्मित की उपलब्धि निश्चित रूप से उन बच्चों के लिए प्रेरणा बनेगी, जो अपनी प्रतिभा को पहचानकर अपने सपनों को साकार करने की दिशा में आगे बढ़ना चाहते हैं।

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