'यहां तो सिनेमा के लिए अपार संभावनाएं हैं...', कश्मीर अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में बोले निर्देशक इम्तियाज अली
फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली ने कहा कि कश्मीर में अनकही कहानियाँ, किरदार और सांस्कृतिक परंपराएँ फिल्म निर्माताओं के लिए समृद्ध विषय हैं।

कश्मीर में अनकही कहानियों और स्थानीय प्रतिभाओं के लिए अपार संभावनाएं: इम्तियाज अली।
HighLights
कश्मीर में अनकही कहानियाँ और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराएं मौजूद हैं
स्थानीय कलाकारों और फिल्मकारों को नए अवसर मिलेंगे
बच्चों को कम उम्र से ही सिनेमा से जोड़ना चाहिए
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। प्रसिद्ध फिल्म निर्देशक इम्तियाज अली ने मंगलवार को कहा कि कश्मीर में ऐसी अनेक अनकही कहानियां, किरदार और सांस्कृतिक परंपराएं मौजूद हैं, जो फिल्म निर्माताओं के लिए समृद्ध विषय बन सकती हैं। उन्होंने उम्मीद जताई कि क्षेत्र में सिनेमा से बढ़ता जुड़ाव स्थानीय कलाकारों और फिल्मकारों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।
श्रीनगर के एसकेआईसीसी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय फिल्म महोत्सव के दूसरे दिन मीडिया से बातचीत में इम्तियाज अली ने कहा कि जब भी उन्हें फिल्म की शूटिंग का अवसर मिलता है, वह कश्मीर लौटना चाहते हैं। उन्होंने कश्मीर को दुनिया की सबसे सिनेमाई जगहों में से एक बताते हुए कहा कि यहां का वातावरण अपने आप में फिल्मों के लिए प्रेरणा देता है।
अपनी चर्चित फिल्म ‘लैला मजनू’ का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी, किरदार और पूरा माहौल कश्मीर से गहराई से जुड़ा हुआ था। उन्होंने खुशी जताई कि रिलीज के आठ साल बाद भी यह फिल्म कश्मीर में लोकप्रिय बनी हुई है।
कश्मीर की अन्य कहानियों के बारे में पूछे जाने पर अली ने कहा कि हब्बा खातून सहित कई कलाकारों और सूफी संतों के जीवन ने उन्हें प्रभावित किया है। अवसर मिलने पर वह इन ऐतिहासिक और सांस्कृतिक व्यक्तित्वों पर फिल्म बनाना चाहेंगे। उन्होंने कहा कि कश्मीर को अक्सर केवल उसके प्राकृतिक सौंदर्य के लिए जाना जाता है, जबकि यहां का हास्य, जीवनशैली और संस्कृति भी बेहद दिलचस्प है।
उन्होंने कहा कि फिल्म महोत्सवों का बड़ा लाभ यह है कि देश-दुनिया से लोग किसी क्षेत्र को अपनी आंखों से देखते हैं और उसके आधार पर नई कहानियां गढ़ सकते हैं। उन्होंने कश्मीर में स्थानीय कलाकारों को अधिक अवसर और सरकारी सहयोग देने की जरूरत पर जोर दिया।
अली ने कहा कि कश्मीरी लोग संवेदनशील और रचनात्मक हैं तथा उनकी गहरी भावनात्मक समझ सिनेमा के लिए बड़ी ताकत बन सकती है। उन्होंने उम्मीद जताई कि भविष्य में ऐसी फिल्में बनेंगी, जिनमें कश्मीर की संस्कृति के साथ स्थानीय कलाकार भी प्रमुख भूमिका में होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि बच्चों को कम उम्र से ही सिनेमा और फिल्म निर्माण से जोड़ना चाहिए। उनके मुताबिक, कश्मीर ने अभी अपनी सांस्कृतिक पहचान को सिनेमा के माध्यम से पूरी तरह सामने नहीं रखा है और आने वाले वर्षों में इसके लिए व्यापक संभावनाएं हैं।
