IFFJK में कालीन भैया-मुन्ना त्रिपाठी की एंट्री! कश्मीर पहुंचे पंकज त्रिपाठी-दिव्येंदु, बोले- यहां कहानियों का खजाना
पंकज त्रिपाठी और दिव्येंदु ने श्रीनगर में कहा कि कश्मीर में स्थानीय कहानियों, संस्कृति और युवा प्रतिभाओं को बड़े पर्दे ...और पढ़ें

IFFJK में अभिनेता पंकज त्रिपाठी और दिव्येंदु पहुंचे। फोटो- साहिल मीर/जागरण
HighLights
कश्मीर में स्थानीय कहानियों और प्रतिभाओं की अपार संभावनाएं।
पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु ने क्षेत्रीय सिनेमा को बढ़ावा देने पर जोर दिया।
डिजिटल प्लेटफॉर्म और बुनियादी ढांचा फिल्म उद्योग को देगा बढ़ावा।
राज्य ब्यूरो, श्रीनगर। कश्मीर की खूबसूरत वादियां लंबे समय से फिल्मकारों को आकर्षित करती रही हैं, लेकिन अब यहां की पहचान सिर्फ फिल्मों के गीतों और खूबसूरत दृश्यों तक सीमित रखने के बजाय स्थानीय लोगों, संस्कृति, खान-पान और जमीनी कहानियों को भी बड़े पर्दे पर लाने की जरूरत है। अभिनेता पंकज त्रिपाठी और दिव्येंदु ने जम्मू-कश्मीर में क्षेत्रीय सिनेमा की अपार संभावनाओं को रेखांकित करते हुए कहा कि घाटी में कहानियों और प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। जरूरत केवल उन्हें सही मंच और बेहतर अवसर देने की है।
एसकेआईसीसी श्रीनगर में आयोजित इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल ऑफ जम्मू एंड कश्मीर के दूसरे दिन मीडिया से बातचीत में ‘मिर्जापुर’ के कालीन भैया और मुन्ना त्रिपाठी के चर्चित किरदारों से लोकप्रिय हुए दोनों कलाकारों ने कश्मीर में अपने अनुभव साझा किए।
उन्होंने कहा कि यहां आकर स्थानीय लोगों से मिलना और कश्मीरी खान-पान का आनंद लेना बेहद सुखद अनुभव रहा। दोनों ने उम्मीद जताई कि भविष्य में कश्मीर में और अधिक फिल्मों की शूटिंग होगी।
जम्मू-कश्मीर में सिनेमा का भविष्य काफी उज्ज्वल
पंकज त्रिपाठी और दिव्येंदु के मुताबिक, जम्मू-कश्मीर में सिनेमा का भविष्य काफी उज्ज्वल है। थिएटर और ओटीटी प्लेटफॉर्म के विस्तार के साथ फिल्म निर्माण के क्षेत्र में नए अवसर पैदा हो रहे हैं। इसका सबसे बड़ा लाभ क्षेत्र के युवा कलाकारों, लेखकों, तकनीशियनों और फिल्म निर्माण से जुड़े दूसरे लोगों को मिल सकता है।
कश्मीर में फिल्म निर्माण की संभावनाओं पर दोनों कलाकारों ने कहा कि यहां की प्राकृतिक सुंदरता बेमिसाल है, लेकिन कहानी कहने के लिए इससे कहीं अधिक सामग्री मौजूद है। डल झील और घाटी के प्राकृतिक नजारों के साथ यहां के लोगों का जीवन, संस्कृति, खान-पान और स्थानीय परंपराएं भी सिनेमा के लिए बेहद समृद्ध विषय हैं।
कश्मीर का हिंदी फिल्म उद्योग से पुराना रिश्ता
उन्होंने कहा कि कश्मीर का हिंदी फिल्म उद्योग से पुराना रिश्ता रहा है। अतीत में फिल्मकार मुख्य रूप से गीतों और दृश्यों की शूटिंग के लिए यहां पहुंचते थे। अब समय आ गया है कि कश्मीर की जमीनी और वास्तविक कहानियों को भी देश के दर्शकों तक पहुंचाया जाए।
दोनों अभिनेताओं ने कहा कि यदि जम्मू-कश्मीर में फिल्म निर्माण से जुड़ा बुनियादी ढांचा और मजबूत किया जाता है तो यह क्षेत्र देश के प्रमुख फिल्म निर्माण केंद्रों में शामिल हो सकता है। स्थानीय प्रतिभाओं को अवसर देकर यहां की अपनी कहानियों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचाया जा सकता है।
युवाओं के लिए मास्टरक्लास बड़ा अवसर
फिल्म महोत्सव में हिस्सा ले रहे विद्यार्थियों और सिनेमा में करियर बनाने की तैयारी कर रहे युवाओं को दोनों अभिनेताओं ने ऐसे आयोजनों का अधिक से अधिक लाभ उठाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि फिल्म फेस्टिवल और मास्टरक्लास के जरिए युवाओं को अनुभवी कलाकारों और फिल्मकारों से सीधे सीखने का अवसर मिलता है। फिल्म बनाने की प्रक्रिया को समझने के साथ-साथ पेशेवर अनुभव नई पीढ़ी के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है।
