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 टूटी खिड़कियां,आधी छत व बिना दीवार के पढ़ने को मजबूर छात्र; बड़गाम के सरकारी स्कूल का शर्मनाक सच

Published: Tue, 13 Oct 2026 03:10 PM (IST)

श्रीनगर के बड़गाम जिले के गंबूरा गांव में छात्र जर्जर सरकारी स्कूल में पढ़ने को मजबूर हैं, जबकि नई इमारत ...और पढ़ें

स्कूल में नहीं हैं बुनियादी सुविधाएं।

स्कूल में नहीं हैं बुनियादी सुविधाएं।

HighLights

  1. छात्र जर्जर सरकारी स्कूल में पढ़ने को मजबूर

  2. नई स्कूल इमारत छह साल से अप्रयुक्त पड़ी है

  3. बुनियादी सुविधाओं जैसे पानी, शौचालय का अभाव

जागरण संवाददाता,श्रीनगर। प्रशासन द्वारा शिक्षा ढांचे को मजबूत करने को अपनी प्राथमिक्ता बताने के दावोंं में कितनी सच्चाई है, इसका उदाहरण श्रीनगर समेत घाटी के अन्य जिलों में छात्र स्कूली इमरातों के साथ साथ अन्य सुविधाओं के अभाव के चलते चुनौतीपूर्ण परिसिथितियों में पढ़ाई करते हैं।

बड़गाम जिले के बीवरवाह तहसील के गंबूरा गांव में सिथत एक सरकारी स्कूल इसका एक उदाहरण है। स्कूल के लिए वर्षों पहले बनाई गई नई बिल्डिंग के बावजूद अज्ञात कारणों के चलते छाओं को असुरिक्षत व जरजर हो चुकी स्कूली इमारत में पढ़ने के लिए मजबूर किया जाता है जिस में पीने के पानी की सुविधा मौजूद है और ना ही टायलट का बंदोबस्त है।

टूटी खिड़कियों,आधी छत व बिना दीवार के इस स्कूल के छात्रों को पीने के पानी व शौचालय के लिए मोहल्ले के घरों में जाना पड़ता है।

बच्चों के लिए न तो पीने का पानी है न शौचालय

गौरतलब है कि प्रशासन ने उक्त इलाके में स्थित इस सरकारी मिडल स्कूल की नई इमरात का निर्माण किया था। इमरात को अब कई वर्ष बीत गए अलबत्ता इसके बावजूद भी स्कूल एक पुरानी जर्जर इमारत में चल रहा हैं, जहां छात्रों के लिए न पीने के पानी की सुविधा है और साफ पीने के पानी जैसी मौलिक सुविधा है और ना ही शौचलय का बंदोबस्त।

बारिश में टपकती है स्कूल की छत

जरजर हो चुकी इस इमरात की आधी छत टूटी हुई है जो बारिश के दिनों में टपकती रहती है। वहीं स्कूल की सही तरीके से दीवारबंदी न होने के कारण इलाके में आवारा कुत्ते भी इस स्कूल परिसर में घूमते फिरते हैं। शौचालय व पीने के पानी के लिए शिक्षकों व छात्रों को आसपास के घरों में जाना पड़ता है।

स्थानीय लोगों ने बताया कि सरकार ने लगभग छह साल पहले स्कूल की नई इमरात का निर्माण किया था।लेकिन अज्ञात कारणों के चलते स्कूल को इसमें शिफ्ट नही किया गया और लगातार उसी पुरानी जरजर हो चुकी इमारत में छात्रों को पढ़ाई जारी रखने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।

गांव के निवासी ने बताया स्कूल का हाल

गांव के रहने वाले खुरशीद अहमद भट नामक एक व्यक्ति ने कहा कि पुरानी स्कूल इमारत में टायलेट, पीने का पानी और खेल का मैदान जैसी जरूरी सुविधाएं नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि इमारत की खराब हालत के कारण छात्रों के लिए सुरक्षित और आरामदायक माहौल में पढ़ाई करना मुश्किल हो गया है। भट ने कहा, छात्रों को टायलेट इस्तेमाल करने के लिए आस-पास के घरों में जाना पड़ता है क्योंकि स्कूल में कोई वाशरूम नहीं है।

स्कूल में घुस आते हैं आवारा कुत्ते

स्कूल परिसर में सही बाड़बंदी भी नहीं है, जिससे आवारा कुत्ते कभी भी स्कूल के आस-पास घूमते रहते हैं। मोहम्मद अनवर तांतरे नामक एक अन्य व्यक्ति ने कहा,हमारी लगातार गुजारिश पर कान धर सरकार ने छह साल पहले इस स्कूल के लिए एक नई इमारत बनाई थी लेकिन बीते छह बरसों से इसके लगातार बंद हो जाने के चलते अब इस नई इमरात का हुलिया बिगड़ना शुरू हो गया है।

तांतरे के अनुसार, नई इमारत के वाशरूम और खिड़कियां टूट-फूट गई हैं। तांतरे ने कहा, समझ में नही आ रहा कि अगर सरकार ने नई स्कूल इमारत बनाने पर जनता का इतना पैसा खर्च किया है, तो इसे अभी तक चालू क्यों नहीं किया गया?

शौकत अहमद परे नामक एक और स्थानीय निवासी ने कहा कि सरकारी स्कूल में बुनियादी सुविधाओं की कमी का गांव के बच्चों की पढ़ाई पर बुरा असर पड़ रहा है। परे ने कहा.पुरानी इमरात मौसम के रहम व करम पर है। मौसम ठीक है तो बच्चे वहां पढञाई करते हैं।

मौसम के मिजाज बदलने पर बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो जाती है। बारिश का मतलब स्कूल में छुट्टी क्योंकि आधी अधूरी रह चुकी इमारत के छत से बारिश का पानी सीधे कलासरूमों में टपकता है। परे ने कहा,सर्दियों के मौसम में तो बच्चों की हालत और भी खराब हो जाती है। निवासियों ने संबंधित अधिकारियों से इस मामले में हत्क्षेप करने और यह पक्का करने की अपील की कि छात्रों को पढ़ाई के लिए सुरक्षित माहौल मिले।

उन्होंने अधिकारियों से इस मामले को जल्द से जल्द सुलझाने और नई स्कूली इमारत को चालू करने की भी अपील की है ताकि छात्र सुरक्षित और सही माहौल में अपनी पढ़ाई कर सकें।

इधर बीरवाह के ज़ोनल शिक्षा कार्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि स्कूली इमारत से जुड़ा एक मामला जम्मू-कश्मीर एंटी-करप्शन ब्यूरो के पास लंबित है।उन्होंने कहा,हम कोशिश कर रहे हैं कि वह मामला जल्द ही सुलझ जाए ताकि हम स्कूल को उस नई इमारत में शिफ्ट कर सके।

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