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नकल मामले में निलंबित शिक्षकों को हिमाचल हाई कोर्ट से बड़ी राहत, 91वें दिन समीक्षा करने पर निलंबन आदेश रद

By Rohit Nagpal Edited By: Rajesh Sharma
Published: Sat, 22 Aug 2026 05:53 PM (IST)

हिमाचल हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के निलंबन नियमों पर अहम फैसला सुनाया है, जिसमें 90 दिनों के भीतर समीक्षा न होने पर निलंबन को अवैध घोषित किया गया।

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जागरण आर्काइव

हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का शिमला परिसर। जागरण आर्काइव

HighLights

  1. निलंबन आदेश की 90 दिन में समीक्षा अनिवार्य।

  2. 91वें दिन समीक्षा पर निलंबन स्वतः अवैध।

  3. निलंबित शिक्षकों को कोर्ट से मिली बड़ी राहत।

विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने सरकारी कर्मचारियों के निलंबन नियमों पर एक बेहद महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने स्पष्ट किया है कि सीसीएस (सीसीए) नियमों के तहत किसी भी निलंबन आदेश की समीक्षा निर्धारित 90 दिनों की समय-सीमा के भीतर होना अनिवार्य है। यदि सरकार या संबंधित विभाग 90 दिनों के भीतर निलंबन बढ़ाने का तार्किक आदेश पारित नहीं करता है, तो वह निलंबन स्वतः ही अवैध हो जाता है। 

कोर्ट ने साफ कहा कि 90 दिन बीत जाने के बाद (जैसे 91वें दिन) की गई समीक्षा या निलंबन बढ़ोतरी का कानूनन कोई महत्व नहीं रह जाता। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल ने कमल सिंह, अजय कुमार और रवि भंडारी द्वारा दायर तीन अलग-अलग याचिकाओं का एक साथ निपटारा करते हुए यह फैसला सुनाया।

जवाली के स्कूल से जुड़ा है मामला

यह मामला कांगड़ा जिले के 'पीएम श्री राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जवाली' से जुड़ा हुआ है। 13 मार्च 2026 को इस स्कूल में आयोजित 10 2 की बोर्ड परीक्षा के दौरान बड़े पैमाने पर नकल का मामला सामने आया था। 

मौखिक रूप से उत्तर बता रहा थे शिक्षक

शिक्षा निदेशालय को मिली एक वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर यह आरोप लगा था कि परीक्षा हॉल में तैनात ये शिक्षक मौखिक रूप से छात्रों को बहुविकल्पीय प्रश्नों के उत्तर बता रहे थे।

इस गंभीर लापरवाही को देखते हुए विभाग ने 13 मार्च 2026 को ही इन तीनों शिक्षकों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था और उनके खिलाफ विभागीय अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की गई थी।

निलंबन को हाई कोर्ट में चुनौती

शिक्षकों ने अपने निलंबन को हाई कोर्ट में चुनौती देते हुए दलील दी कि नियमों के तहत उनके निलंबन की समय पर समीक्षा नहीं की गई। मामले की सुनवाई के दौरान जब कोर्ट ने सरकार से इस पर स्पष्ट निर्देश मांगे, तो पता चला कि निलंबन की समीक्षा की प्रक्रिया 6 जून 2026 को शुरू की गई थी, जो कि 90 दिनों के भीतर तो थी, लेकिन निलंबन की अवधि को आगे बढ़ाने का अंतिम आधिकारिक आदेश 12 जून 2026 को जारी किया गया, जो कि तकनीकी रूप से निलंबन का 91वां दिन था।

हाईकोर्ट ने पाया कि चूंकि याचिकाकर्ताओं के निलंबन आदेशों की समीक्षा 90 दिनों के भीतर पूरी नहीं हुई, इसलिए 13 मार्च 2026 को जारी किए गए निलंबन आदेश 90 दिन पूरे होते ही कानूनी रूप से मृत और शून्य हो चुके थे। इसके बाद उनका निरंतर निलंबन में रहना पूरी तरह से अवैध और गैर-कानूनी है। 

सभी याचिकाकर्ता शिक्षक निलंबन के 90 दिन पूरे होने की तिथि से ही स्वतः ड्यूटी  पर माने जाएंगे। विभाग को निर्देश दिया गया है कि वे इन कर्मचारियों को इस अवधि के सभी परिणामी लाभ और पूर्ण वेतन का भुगतान तत्काल सुनिश्चित करें।

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