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    'कुल्लू रेव पार्टियों में अधिकारियों की मिलीभगत', हिमाचल हाई कोर्ट का विभागीय कार्रवाई का निर्देश; IPS को लगाएं SP

    By Chaitanya Thakur Edited By: Rajesh Sharma
    Updated: Mon, 29 Jun 2026 03:49 PM (IST)

    हिमाचल हाई कोर्ट ने कुल्लू में रेव पार्टियों और ड्रग्स तस्करी में अधिकारियों की मिलीभगत पर सख्त रुख अपनाया है। कोर्ट ने एचपीएस एसपी की जगह आईपीएस अधिक ...और पढ़ें

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का कुल्लू स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

    हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट का कुल्लू स्थित परिसर। जागरण आर्काइव

    HighLights

    1. रेव पार्टियों में मिलीभगत पर हाई कोर्ट सख्त।

    2. कुल्लू एसपी की जगह आईपीएस अधिकारी की तैनाती।

    3. डीसी, एसडीएम का तबादला, विभागीय कार्रवाई के आदेश।

    विधि संवाददाता, शिमला। हिमाचल प्रदेश हाई कोर्ट ने एचपीएस के बजाय आईपीएस ऑफिसर को पुलिस अधीक्षक कुल्लू के पद पर तैनाती देने के आदेश दिए हैं। कसोल में रेव पार्टियों और ड्रग्स तस्करी के मामलों पर उचित कार्रवाई न करने पर कोर्ट ने जिलाधीश कुल्लू सहित संबंधित एसडीएम का तबादला कर नए अधिकारियों को तैनात करने के आदेश दिए हैं। राज्य सरकार को इन आदेशों की अनुपालना एक सप्ताह के भीतर करने के निर्देश जारी किए गए हैं।

    जिला प्रशासन और आयोजकों में मिलीभगत की बू

    मुख्य न्यायाधीश जीएस संधावालिया और न्यायाधीश बी सी नेगी की खंडपीठ ने मामले की गंभीरता को देखते हुए रेव पार्टियों के आयोजन में जिला प्रशासन और आयोजकों में मिलीभगत की जांच के लिए एसआईटी गठित करने का आदेश भी दिया। हाईकोर्ट ने जिला प्रशासन के खिलाफ टिप्पणी करते हुए कहा कि जिला प्रशासन के पास पहले से खुफिया इनपुट थे कि इन पार्टियों में बड़े स्तर पर नशे का इस्तेमाल और तस्करी हो सकती है, फिर भी इन्हें मंजूरी दी गई।

    लीगल सर्विसेज अथॉरिटी ने किया था दौरा

    हाई कोर्ट के आदेशानुसार डिस्ट्रिक्ट लीगल सर्विसेज अथॉरिटी कुल्लू के सचिव ने 9 जून, 2026 को मौके का दौरा किया था। अपनी रिपोर्ट में सचिव ने बताया कि कार्यक्रम के आयोजकों की ओर से सिर्फ साउंड सिस्टम की मंजूरी का पत्र दिखाया गया, जबकि निरीक्षण के दौरान वहां शराब भी परोसी जा रही थी। 

    इसके लिए एक अलग स्टाल लगाया गया था जिसमें बीयर की बोतलें और बर्फ के टुकड़े वगैरह रखने के लिए बड़े रेफ्रिजरेटर थे। आयोजकों के पास उस जगह पर शराब परोसने का जरूरी परमिट नहीं था। निरीक्षण के दौरान शराब की खाली बोतलें (बीयर और व्हिस्की की बोतलें), सिगरेट के टुकड़े, 'परफेक्ट रोल्स' और रोलिंग पेपर पाए गए। 'परफेक्ट रोल्स' और रोलिंग पेपर का इस्तेमाल गांजा और तंबाकू का मिश्रण भरने और उसे जलाकर नशा करने के लिए किया जाता है। उस जगह पर बड़े पैमाने पर नशीले पदार्थों का सेवन किया गया था। वहां सीसीटीवी कैमरे भी लगे हुए थे, इसलिए उनके डीवीआर को सुरक्षित रखा गया है जिसमें रिकॉर्डिंग थी।

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    बनाया गया था बडा स्टेज

    वहां एक बड़ा स्टेज बनाया गया था, जिसमें डीजे और तेज आवाज वाले म्यूजिक सिस्टम के लिए खास जगह थी। इसके अलावा यह भी देखा गया कि जगह इतनी बड़ी थी कि वहां चार-पांच हजार लोग आ सकते थे। साथ ही, यह भी पाया गया कि इतनी बड़ी भीड़ की जरूरत को पूरा करने के लिए 8-10 अस्थायी शौचालय लगाए गए थे।

    रूसी महिला की ओवरडोज से मौत का शक

    कुल्लू के चीफ़ मेडिकल ऑफ़िसर ने बताया कि कसोल में उनके किसी भी सेंटर में इलाज के लिए ऐसा कोई मरीज नहीं लाया गया। हालांकि, रूस की रहने वाली डारिया कुजमिनिख नाम की एक विदेशी नागरिक की मौत ड्रग्स के ओवरडोज से होने का शक था, जिसके लिए पोस्टमॉर्टम की सलाह दी गई थी। मौत की असली वजह के बारे में फाइनल रिपोर्ट का इंतजार है।

    सचिव ने यह भी रिपोर्ट में बताया कि स्थानीय पुलिस ने दो पर्यटकों के खिलाफ़ प्राथमिकी दर्ज की। इन पर्यटकों को मौके से कोकीन और एक्स्टसी पिल्स के साथ पकड़ा गया था। 

    डीसी ने दिया शपथ पत्र

    कुल्लू के डिप्टी कमिश्नर अनुराग चंद्र शर्मा ने कोर्ट में दिए शपथ-पत्र में कहा कि जिला प्रशासन ने पर्यटन के नाम पर 'रेव पार्टियों' के लिए कोई अनुमति नहीं दी थी। साथ ही, ग्रहण, कसोल में 'ग्रीन फॉरेस्ट्स-I और II' को दी गई अनुमति 10 जून, 2026 को रद्द कर दी गई थी, क्योंकि मामला ड्रग्स के इस्तेमाल और कब्जे से जुड़ा था। खुफिया जानकारी के आधार पर निरीक्षण और जांच के निर्देश भी जारी किए गए थे। यह भी कहा गया था कि पर्यटन गतिविधियों से जुड़े लोगों पर बहुत ज़्यादा पाबंदियां लगाने से पर्यटन सेक्टर पर बुरा असर पड़ेगा।

    एसपी ने दायर किया हलफनामा

    कुल्लू के पुलिस अधीक्षक एचपीएस अधिकारी द्वारा दायर हलफनामे में यह तर्क दिया गया था कि आयोजकों ने साउंड सिस्टम/म्यूजिक इवेंट और कैंपिंग साइटों-ग्रीन फॉरेस्ट-I और ग्रीन फॉरेस्ट-II पर मेहमानों के मनोरंजन के लिए अनुमति मांगी थी।  9 जून, 2026 को मणिकर्ण के ग्रहण इलाके में गोवा से आए लोगों द्वारा अनधिकृत रेव पार्टियों के आयोजन के बारे में जानकारी मिली। नतीजतन, 9 जून, 2026 को छापा मारा गया और ब्लड सैंपल लेने के लिए जरूरी अधिकारियों को तैनात किया गया। एसपी ने बताया कि कोई भी सीसीटीवी कैमरा चालू हालत में नहीं मिला जबकि डीएलएसए सचिव की रिपोर्ट इसके विपरीत पाई गई।

    डीएसपी की रिपोर्ट के बावजूद दे दी मंजूरी

    कोर्ट इन तथ्यों के दृष्टिगत कहा कि यदि 9 जून, 2026 को हाईकोर्ट ने दखल न दिया होता, तो एसडीएम, डिप्टी कमिश्नर और पुलिस सुपरिटेंडेंट की बिना मंज़ूरी के यह पार्टी 11 जून, 2026 तक मज़े से चलती रहती। कोर्ट ने कहा कि डिप्टी सुपरिटेंडेंट ऑफ़ पुलिस जैसे सीनियर और काबिल अफ़सर की नेगेटिव रिपोर्ट मिलने के बावजूद जिसमें रेव पार्टी और गैर-कानूनी गतिविधियों के साथ-साथ बड़े पैमाने पर ड्रग्स के इस्तेमाल की आशंका के कारण मंज़ूरी न देने की सलाह दी गई थी, फिर भी मंज़ूरी दे दी गई। 

    मिलीभगत के बिना आयोजन, यह मानना मुश्किल 

    इस तरह, ऐसा लगता है कि दोनों अफ़सरों और संबंधित एसडीएम ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने में अपनी ड्यूटी नहीं निभाई और इसके बजाय  बड़े पैमाने पर रेव पार्टी आयोजित करने में मदद की। यह साफ है कि जब ज्यादा एंट्री फ़ीस लेकर 4,000 से 5,000 लोगों के लिए बड़े पैमाने पर पार्टियां आयोजित की जाती हैं, तो यह एक व्यवसायिक काम बन जाता है। कोर्ट ने कहा कि अदालत के लिए यह मानना मुश्किल है कि ऐसा स्थानीय प्रशासन की मिलीभगत के बिना किया गया था। 

    विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए

    कोर्ट ने कहा कि इसलिए, यह साफ़ है कि इन तीनों अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए। इस मामले में इस बात की भी जांच ज़रूरी है कि क्या अधिकारियों की कोई मौन सहमति थी और क्या उन दो आयोजकों के साथ कोई मिलीभगत थी, जिन्हें कमर्शियल आयोजन और बड़े पैमाने पर ड्रग्स के सेवन की अनुमति मिली थी। 

    डीआईजी स्तर के अधिकारी से जांच का आदेश

    कोर्ट ने इस मामले की जांच डिप्टी इंस्पेक्टर जनरल ऑफ़ पुलिस के पद सहित उच्च स्तर के अधिकारी द्वारा करवाने के आदेश दिए। कोर्ट ने कहा कि इस तरह की पार्टियों के आयोजन से न केवल स्थानीय माहौल खराब होता है, बल्कि इलाके के निवासियों को नशे में धुत पर्यटकों की भीड़ का भी सामना करना पड़ता है। 

    प्रशासनिक भरोसा बहाल करने के लिए ऐसे निर्देश ज़रूरी 

    नतीजतन, ऊपर बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए, राज्य सरकार को ज़रूरी कार्रवाई करने के आदेश दिए गए हैं और एक हफ़्ते के भीतर उपरोक्त तीनों अधिकारियों का तबादला करने के आदेश दिए गए हैं। कोर्ट ने जांच के बाद इनके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई करने के आदेश भी दिए जिसमें इन तीनों अधिकारियों के ख़िलाफ़ विभागीय कार्रवाई भी शुरू की जा सकती है। 

    कोर्ट ने कहा कि प्रशासनिक भरोसा बहाल करने के लिए ऐसे निर्देश ज़रूरी हैं और इसलिए, यह जरूरी है कि कुल्लू में आईपीएस कैडर के पुलिस अधीक्षक को तैनात किया जाए, जो एसआईटी का हिस्सा होंगे। मामले की अगली सुनवाई 6 अगस्त 2026 को होगी।

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