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मनकोटिया की राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता: जब मंत्री पद से हो गई छुट्टी, 5 बार विधायक बने पर कभी नहीं डाला खुद को वोट

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 29 Sep 2026 01:30 PM (IST)Updated: Tue, 29 Sep 2026 02:55 PM (IST)

मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने शाहपुर से पांच बार विधायक बनने का रिकॉर्ड बनाया, जबकि उन्होंने कभी खुद को वोट नहीं दिया क्योंकि उनका गृह क्षेत्र कांगड़ा था।

हिमाचल के पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया।

हिमाचल के पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया।

HighLights

  1. पांच बार शाहपुर से विधायक बने, कभी खुद को वोट नहीं दिया।

  2. दो बार कैबिनेट मंत्री रहे, वीरभद्र सरकार में भी कार्य किया।

  3. 2003 में मंत्री पद से हटे, कई राजनीतिक प्रयोग किए।

जागरण टीम, धर्मशाला। मेजर विजय सिंह मनकोटिया ऐसे नेता रहे हैं, जो अपने गृह विधानसभा क्षेत्र से बाहर जाकर चुनाव जीतते रहे। उनके घर तियारा में हैं। तियारा कांगड़ा विधानसभा क्षेत्र में है। यानी मनकोटिया जब भी शाहपुर से चुनाव लड़े, उन्होंने अपना वोट खुद को नहीं डाला। फिर भी पांच बार विधायक बने। 1982, 1985, 1990 और 1993 में लगातार चार बार शाहपुर से विधायक बने। 1998 में शाहपुर से हार का सामना करना पड़ा। 2003 में फिर से जीतकर शाहपुर से पांचवीं बार विधायक बनने का रिकॉर्ड बनाया। यह शाहपुर से रिकार्ड है।

मनकोटिया की पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह के साथ राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता रही है, लेकिन मंत्री भी उनकी सरकार में ही रहे। मनकोटिया हिमाचल सरकार में दो बार कैबिनेट मंत्री बने। पहली बार 1993 में ‍वीरभद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे। 2003 में फिर से कैबिनेट मंत्री बनाया गया।

हटा दिए थे मंत्री पद से

वर्ष 2003 में केंद्र सरकार ने मंत्रियों की संख्या को सीमित करने के लिए संविधान संशोधन अधिनियम, पारित किया था। तब कांगड़ा से छह मंत्री सत महाजन, जीएस बाली, सुजान सिंह पठानिया, मेजर विजय सिंह मनकोटिया, चंद्रेश कुमारी और बृज बिहारी लाल बुटेल मंत्री थे। तब मनकोटिया को मंत्री पद से हटा दिया गया था।

किए कई राजनीतिक प्रयोग

मनकोटिया को कई राजनीतिक प्रयोगों के लिए जाना जाता रहा है। उन्होंने 1990 में जनता दल के नेतृत्व किया था। तब भाजपा का जनता दल के साथ राजनीतिक गठजोड़ था। उस समय जनता दल 17 सीटों पर लड़ा था और मनकोटिया सहित 11 विधायक जीतकर आए थे। भाजपा 51 सीटों पर लड़ी थी और 46 विधायक जीते थे। उस समय कांग्रेस के सिर्फ नौ विधायक जीते थे।
मतलब मनकोटिया की पार्टी ने सीट संख्या के हिसाब से कांग्रेस को पीछे छोड़ दिया था। एक वामपंथी विधायक और एक निर्दलीय विधायक बना था।

2007 चुनाव से पहले बसपा में चले गए

वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव से पहले मनकोटिया बहुजन समाज पार्टी में शामिल हो गए। पहली बार उन्होंने अपनी शाहपुर विधानसभा सीट से बाहर जाकर धर्मशाला से चुनाव लड़ा। शाहपुर से अपनी करीबी ओंकार राणा और कांगड़ा से संजय चौधरी को टिकट दिया था। संजय चौधरी जीत गए थे।

बसपा का पहला विधायक बनाया

हिमाचल से बसपा का पहला विधायक बनाने का श्रेय भी मनकोटिया को जाता है। क्योंकि मनकोटिया का खुद का विधानसभा क्षेत्र भी कांगड़ा है और इसका लाभ भी संजय को मिला था। उस चुनाव में मनकोटिया और राणा को भी लोगों का काफी समर्थन मिला था।

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