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हिमाचल में 2 बार मंत्री व 5 बार विधायक रहे मेजर मनकोटिया, सीडी कांड से हिला दी थी पहाड़ की सियासत

By Digital Desk Edited By: Rajesh Sharma
Published: Tue, 29 Sep 2026 11:17 AM (IST)Updated: Tue, 29 Sep 2026 12:50 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश के पांच बार विधायक और दो बार मंत्री रहे दिग्गज नेता मेजर विजय सिंह मनकोटिया का 87 वर्ष ...और पढ़ें

हिमाचल के पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया। (Photo AI Generated)

हिमाचल के पूर्व मंत्री मेजर विजय सिंह मनकोटिया। (Photo AI Generated)

HighLights

  1. पांच बार विधायक, दो बार मंत्री रहे मेजर मनकोटिया।

  2. 87 वर्ष की आयु में हुआ निधन, शाहपुर से विधायक।

  3. वीरभद्र सिंह से राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता, सीडी कांड से चर्चा में।

जागरण टीम, धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश में पांच बार विधायक व दो बार मंत्री रहे दिग्गज नेता मेजर विजय सिंह मनकोटिया का 87 साल की उम्र में निधन हो गया। मेजर मनकोटिया शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से 5 बार विधायक रहे। वह 1982 में पहली बार शाहपुर से निर्दलीय विधायक चुने गए थे। मनकोटिया 4 दशक तक हिमाचल की राजनीति में सक्रिय रहे थे। 

जिला कांगड़ा के तियारा स्थित पैतृक निवास में उनका निधन हुआ। बताया जा रहा है निधन का कारण हृदयाघात रहा। 

मेजर मनकोटिया पूर्व सैनिक लीग के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे। पूर्व सैनिकों में उनका काफी प्रभाव था। 

सेना से सेवानिवृत्ति लेकर लड़ा चुनाव

मेजर विजय सिंह मनकोटिया का जन्म 23 नवंबर 1938 को हुआ था। उन्होंने भारतीय सेना में सैन्य अधिकारी के रूप में कई वर्षों तक सेवाएं दीं। वर्ष 1980 में उन्होंने सेना से सेवानिवृत्ति ली और वर्ष 1982 में निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में पहली बार शाहपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे।

वीरभद्र सिंह से था 36 का आंकड़ा

हिमाचल प्रदेश के 6 बार मुख्यमंत्री रहे वीरभद्र सिंह से उनका 36 का आंकड़ा रहा। मनकोटिया ने वीरभद्र सिंह के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए थे व सीडी कांड भी सामने आया था। सीडी काफी समय तक हिमाचल की राजनीति में हावी रही थी। हालांकि अंत में इसमें कुछ नहीं निकल पाया था। 

कई दलों में शामिल हुए व चुनाव लड़ा

मनकोटिया ने अपने लंबे राजनीतिक करियर में अलग-अलग राजनीतिक दलों से चुनाव लड़ा व जीत भी दर्ज की। वह कांग्रेस के अलावा जनता दल और निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर भी चुनाव लड़ चुके थे। 1985 में वह कांग्रेस में शामिल हुए। मनकोटिया को 1995 में वीरभद्र सिंह की कैबिनेट में शामिल किया गया था।

उन्होंने 2007 का विधानसभा चुनाव बसपा के टिकट पर लड़ा, लेकिन हार गए और बाद में कांग्रेस में लौट आए। उन्होंने 2012 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा और फिर हार गए। इस दौरान उन्हें हिमाचल पर्यटन बोर्ड का उपाध्यक्ष नियुक्त किया गया था।

पठानिया को उम्मीदवारी और निर्दलीय उतरे मैदान में

कांग्रेस द्वारा टिकट न दिए जाने और केवल सिंह पठानिया को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद उन्होंने 2017 का विधानसभा चुनाव निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लड़ा। ऐसी अटकलें थीं कि वे आम आदमी पार्टी में शामिल हो सकते हैं, लेकिन वे भाजपा में शामिल हो गए।

भाजपा नेतृत्व ने जताया शोक

मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय एवं प्रदेश नेतृत्व ने गहरा शोक व्यक्त किया है। केंद्रीय मंत्री जगत प्रकाश नड्डा, पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं सांसद अनुराग ठाकुर, भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री प्रो. प्रेम कुमार धूमल एवं शांता कुमार, सांसद सुरेश कश्यप, डॉ. राजीव भारद्वाज, कंगना रनौत, राज्यसभा सदस्य डॉ. सिकंदर कुमार एवं हर्ष महाजन, प्रदेश संगठन महामंत्री सिद्धार्थन, प्रदेश महामंत्री संजीव कटवाल, पायल वैद्य, बिक्रम ठाकुर एवं सतपाल सिंह सत्ती सहित भाजपा के वरिष्ठ नेताओं ने मेजर विजय सिंह मनकोटिया के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए शोक संतप्त परिवार के प्रति अपनी संवेदनाएं प्रकट की हैं।

मनकोटिया से जुड़ा संस्मरण: देख लेना, मेरा संघर्ष सामने रहे बस...। 

बहुत पहले की बात है...शायद 2000 की। मैं अपने किसी साथी के साथ कांग्रेस के कार्यक्रम को कवर करने गया। वहां मेजर विजय सिंह मनकोटिया जी ने बहुत अच्‍छे से हाथ मिलाया और शालीन अंदाज़ में बात की। अचानक उनके पांव छूए किसी युवा ने। शायद कोई ब्‍लॉक के पदाधिकारी थे जो सफेद कमीज़ के साथ हल्‍के नीले रंग का कोट और पतलून पहन कर आए थे...। मनकोटिया जी ने उन्‍हें आशीर्वाद दिया और बोले, ‘ इन कपड़ों में आपको कोई मोहनीशा कोईराला देख ले तो प्रोपोज़ कर देगी..।’ ठहाका गूंजा और उन्‍होंने मेरी ओर देख कर कहा, क्‍यों, मैंने ग़लत कहा क्‍या ? मैंने विनम्रता के साथ कहा, ‘ सर, मोहनीशा नहीं, मनीषा।’ उन्‍होंने और ठहाका लगाया और बोले, ‘ अरे...गड़बड़ हो गई… अब आगे से ध्‍यान रखेंगे! ’ 

2003 के विधानसभा चुनाव से पहले मनकोटिया मेरे उस अखबार के कार्यालय में आए जहां मैं कार्य करता था। संपादक जी का आदेश था कि इनका साक्षात्‍कार करो। आदेश का पालन किया गया। जब वह जाने लगे तो मैं शिष्‍टाचारवश उन्‍हें छोड़ने मुख्‍य दरवाज़े तक आया। अचानक उन्‍होंने हाथ पकड़ा और पूछा, ‘ नवनीत जी, आप साहित्यिक अभिरुचि के हैं...क्‍या कोई शे'र भी प्रयोग करेंगे इंटरव्‍यू में ?’ मैंने कहा कि कर भी सकता हूं लेकिन अगर आपको कोई शे'र अच्‍छा याद हो तो बताएं...। उन्‍होंने हंसते हुए कहा, ‘ चुनाव की गहमागहमी में याद नहीं आ रहा।’ मैंने कहा, ‘मेजर साहब...आप संघर्ष कर रहे हैं और इंटरव्‍यू की टोन बता रही है कि आपको चलते रहने से अधिक मतलब है, जीत हार बाद में देखी जाएगी।’ उन्‍हाेंने कहा कि हां। है तो शत प्रतिशत ऐसा ही। मैंने कहा तो मुझे शाहिद कबीर का शे'र याद आ रहा है : 

चलने की तमन्‍ना थी पहुंचने की नहीं थी 
अब डूब भी जाऊं तो मुझे पार समझना 

उन्‍होंने रुक कर कांधे पर हाथ रखा और कहा, ‘हमारे प्‍यारे छोटे भाई साहब! यह ठीक है कि मैं चलना ही चाहता हूं...पर यार मैं डूबना नहीं चाहूंगा...। कुछ और देख लेना जिससे मेरा संघर्ष सामने आए बस...।’ 

आक्रामक और अप्रत्‍याशित राजनेता, सभ्‍य और शालीन मनुष्‍य मेजर विजय सिंह मनकोटिया जी को आदरांजलि...। आप को नहीं भुलाया नहीं जा सकेगा।

 

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