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₹2.08 करोड़ की पेमेंट पर सवाल उठाने पर रेलवे अफसर को मिली पनिशमेंट पोस्टिंग, रातोंरात दिल्ली से कश्मीर ट्रांसफर

By Deepak BehalEdited By: Prince Sharma
Published: Thu, 08 Oct 2026 08:39 AM (IST)

रेलवे में 2.08 करोड़ रुपये की पेमेंट फाइल पर सवाल उठाने वाले एक अधिकारी का अगले ही दिन नई दिल्ली ...और पढ़ें

यह फोटो एआई टूल की सहायता से बनाई गई है।

यह फोटो एआई टूल की सहायता से बनाई गई है।

HighLights

  1. रेल अधिकारी ने 2.08 करोड़ की पेमेंट पर सवाल उठाए

  2. सवाल उठाने के अगले दिन ही अधिकारी का तबादला हुआ

  3. कैट ने तबादले और रिलीविंग आदेश पर रोक लगाई

दीपक बहल, अंबाला। रेलवे में 2.08 करोड़ रुपये की पेमेंट से जुड़ी फाइल पर सवाल उठाना एक रेल अधिकारी को भारी पड़ गया। फाइल में खामियां बताते हुए पेमेंट आगे बढ़ाने से रोकने और उत्तर रेलवे के सीनियर डिप्टी जनरल मैनेजर (एसडीजीएम) से लिखित शिकायत कर जांच की मांग करने के अगले ही दिन उनका तबादला नई दिल्ली से कश्मीर के बड़गाम कर दिया गया।

तबादला आदेश जारी होने के कुछ घंटे बाद ही उन्हें वर्तमान तैनाती से रिलीव कराने की कोशिश भी शुरू हो गई। अधिकारी ने इसे शिकायत के बाद की गई दंडात्मक कार्रवाई बताते हुए केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) का दरवाजा खटखटाया।

कैट ने फिलहाल तबादले और रिलीविंग आदेश पर रोक लगा दी है। मामला उत्तर रेलवे के पीटीएस विभाग से जुड़े वित्तीय मामलों और फाइलों का है। सूत्रों के अनुसार, करीब 2.08 करोड़ रुपये की पेमेंट की फाइल अधिकारी के पास पहुंची थी। जांच के दौरान उन्हें इसमें कुछ आपत्तियां और खामियां नजर आईं। उन्होंने फाइल पर हस्ताक्षर कर उसे आगे नहीं बढ़ाया।

24 सितंबर को दर्ज करवाई शिकायत

पेमेंट को लेकर दबाव बढ़ने पर अधिकारी ने मामले को विजिलेंस में वरिष्ठ स्तर पर उठाने का फैसला किया। 24 सितंबर को अधिकारी ने एसडीजीएम को लिखित शिकायत देकर वित्तीय मामलों और संबंधित फाइलों की जांच की मांग की।

शिकायत के अगले ही दिन यानी 25 सितंबर को उनका तबादला नई दिल्ली से बड़गाम, कश्मीर कर दिया गया। अधिकारी के अनुसार, बड़गाम में रेलवे का परिचालन भी बेहद सीमित है और याचिका में वहां एसीएम का स्वीकृत पद नहीं होने का भी दावा किया गया है।

शाम को घर पहुंचा आदेश, रिलीव कराने की भी कोशिश

25 सितंबर को करीब शाम 5:30 बजे तबादला आदेश अधिकारी के आवास पर पहुंचाया गया। उस समय वह स्वीकृत अवकाश पर थे। उसी दिन उन्हें वर्तमान तैनाती से रिलीव कराने का आदेश भी जारी कर दिया। अधिकारी ने आरोप लगाया कि उन्हें नई जगह ज्वाइन करने के लिए पर्याप्त समय भी नहीं दिया गया।

सूत्रों के अनुसार, रिलीव कराने के लिए कुछ अधिकारी उनके आवास तक भी पहुंच गए। अधिकारी ने कैट में इन घटनाक्रमों को शिकायत के बाद की गई कार्रवाई का हिस्सा बताया है। अधिकारी ने कैट में यह भी दलील दी कि उनकी सेवानिवृत्ति 31 अगस्त 2028 को होनी है। उन्होंने वर्तमान तैनाती पर बनाए रखने का अनुरोध भी किया था। याचिका में रेलवे की स्थानांतरण नीति का हवाला देते हुए कहा गया कि सेवानिवृत्ति के करीब पहुंच चुके कर्मचारियों को सामान्य परिस्थितियों में स्थानांतरित नहीं किया जाना चाहिए।

जांच से पहले ही बदल दिया ठिकाना

अधिकारी का सवाल यही है कि जब शिकायत पर जांच की प्रक्रिया शुरू होनी थी, उससे पहले ही शिकायतकर्ता का तबादला कैसे कर दिया गया। याचिका में उन्होंने आरोप लगाया कि उन्होंने पीटीएस विभाग से संबंधित वित्तीय मामलों में अनियमितताओं को लेकर सवाल उठाए थे।

विजिलेंस द्वारा पहले किसी अधिकारी से संबंधित शिकायत की जांच के लिए वित्तीय मामलों और फाइलों का रिकॉर्ड मांगा गया था। अधिकारी का दावा है कि उपलब्ध कराया गया रिकॉर्ड अधूरा था, जिसके बाद उन्होंने वरिष्ठ अधिकारी के खिलाफ शिकायत की। उनका आरोप है कि शिकायत के बाद ही उन्हें निशाना बनाकर तबादला किया गया।

रेलवे ने बताया प्रशासनिक जरूरत, कैट ने लगाई रोक

कैट में रेलवे की ओर से तबादले का बचाव करते हुए इसे प्रशासनिक जरूरत बताया गया। रेलवे का पक्ष था कि अधिकारियों की तैनाती विभागीय आवश्यकता और जनहित के अनुसार की जाती है। हालांकि, दोनों पक्षों को सुनने के बाद कैट ने 25 सितंबर के तबादला और रिलीविंग आदेश पर अगली सुनवाई तक अमल करने से रेलवे को रोक दिया। मामले की अगली सुनवाई 26 अक्टूबर को होगी।

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