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    गुजरात: AAP विधायक चैतर वसावा और पत्नी को सात साल की सजा

    Updated: Tue, 23 Jun 2026 11:24 PM (IST)

    गुजरात में आम आदमी पार्टी के विधायक चैतर वसावा और उनकी पत्नी को वनकर्मियों से मारपीट व सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में सात साल की सजा सुनाई गई ह ...और पढ़ें

    चैतर वसावा और उनकी पत्नी को सात साल की सजा (फाइल फोटो)

    चैतर वसावा और उनकी पत्नी को सात साल की सजा (फाइल फोटो)

    HighLights

    1. आप विधायक चैतर वसावा को सात साल की सजा।

    2. वनकर्मियों से मारपीट, सरकारी काम में बाधा का मामला।

    3. सजा के बाद वसावा की विधायकी तत्काल रद्द।

    राज्य ब्यूरो, अहमदाबाद। गुजरात में आम आदमी पार्टी (आप) विधायक चैतर वसावा और उनकी पत्नी को वनकर्मियों से मारपीट, राजकीय कार्य में बाधा डालने का दोषी मानते हुए मंगलवार को सात साल की सजा सुनाई गई है। उनके सात अन्य साथियों को भी इस मामले में दोषी मानते हुए सजा सुनाई गई है।

    इस मामले में वसावा दंपती करीब तीन माह जेल भी रहकर आए थे। यह फैसला राजपीपला जिला एवं सत्र न्यायाधीश एवी हीरापरा ने सुनाया। न्यायाधीश ने विधायक और उनकी पत्नी को 25 हजार रुपये के जुर्माने की सजा भी सुनाई है।

    गुजरात में सदस्यता रद

    सजा सुनाए जाने के बाद अब वह विधायक नहीं रहे। विधानसभा के डिप्टी स्पीकर पूर्णेश मोदी ने फैसले के कुछ घंटे बाद यह बात कही। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि वसावा तत्काल प्रभाव से विधायक नहीं रहे।

    'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' के प्रविधानों के अनुसार उनकी सीट अब खाली मानी जाएगी। उन्होंने कहा कि संबंधित अधिनियम में यह स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि किसी विधायक या सांसद को दो साल से ज्यादा की सजा होती है तो उसकी सदस्यता तुरंत रद हो जाती है।

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    हालांकि कानूनी सेल के जरिये विधानसभा स्पीकर को प्रस्ताव भेजे जाने के बाद औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी, लेकिन इस मामले में कानून बिल्कुल साफ है। उन्होंने कहा कि कानून यह भी कहता है कि जब तक किसी ऊपरी अदालत से राहत नहीं मिलती, तब तक उनकी अयोग्यता लागू रहेगी।

    इस मामले में वसावा दंपती और सात अन्य को नवंबर 2024 में गिरफ्तार किया गया था। लगभग तीन माह जेल में बिताने के बाद वे पिछली साल फरवरी में जमानत पर रिहा हुए थे।

    विशेष लोक अभियोजक अमित नायर ने कहा कि मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के कुल 17 गवाहों से पूछताछ की गई और कई दस्तावेजी सुबूत पेश किए गए। हमने अधिकतम 10 साल की सजा की मांग की थी।

    अभियोजन पक्ष के अनुसार, वन अधिकारियों ने अवैध रूप से कब्जा की गई सरकारी जमीन पर कपास की फसल हटा दी थी, जिससे विवाद हो गया था।

    इसके बाद अधिकारियों को इस मुद्दे पर चर्चा के लिए नर्मदा जिले के डेडियापाडा में वसावा के आवास पर बुलाया गया। अपने आवास पर वसावा ने अधिकारियों को धमकाया। उनमें से एक को थप्पड़ मारा और पिस्तौल से हवा में गोली चलाई।

    पुलिस ने बताया कि वसावा की पत्नी सहित अन्य आरोपितों ने फसल हटाने के लिए वन अधिकारियों से कुल 60 हजार रुपये की वसूली की। वसावा के निजी सहायक जितेंद्र वसावा पर आरोप था कि उसने फोन पर विधायक से संपर्क किया और उन्हें जबरन वसूली की रकम लेने के लिए आने को कहा।

    विधायक, उनकी पत्नी और सात अन्य लोगों के खिलाफ दंगा करने, जबरन वसूली और सरकारी अधिकारियों पर हमले से संबंधित भारतीय दंड संहिता की धाराओं के साथ ही शस्त्र अधिनियम के प्रविधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था।

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