कौन थे राजपाल सिंह धालीवाल? Netflix की Operation Safed Sagar में अभय वर्मा ने निभाया जांबाज पायलट का किरदार
'ऑपरेशन सफेद सागर' (Operation Safed Sagar) में अभय वर्मा द्वारा निभाए गए RS धालीवाल, नाइट-स्ट्राइक मिशन उड़ाने वाले सबसे युवा पायलट बने। आइए जानते हैं ...और पढ़ें
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अभय वर्मा ने 'ऑपरेशन सफेद सागर' में निभाया आर एस धालीवाल का किरदार
HighLights
अभय वर्मा ने 'ऑपरेशन सफेद सागर' में निभाया आर एस धालीवाल का किरदार
कौन थे आर एस धालीवाल?
'ऑपरेशन सफेद सागर' में दिखी फाइटर पायलट की कहानी
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 'ऑपरेशन सफेद सागर' दर्शकों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है। नेटफ्लिक्स की यह सीरीज कारगिल युद्ध में भारतीय वायु सेना की अहम भूमिका की झलक दिखाती है। जहां यह शो पूर्व आर्मी चीफ बीएस धनोआ और स्क्वाड्रन लीडर अजय आहूजा जैसे अधिकारियों के किरदारों को जीवंत करता है, वहीं फ्लाइंग ऑफिसर आरएस धालीवाल (उर्फ 'धाली') के रूप में अभय वर्मा की एक्टिंग ने भी लोगों का दिल जीत लिया है।
इस किरदार को एक युवा और बेहद कुशल पायलट के तौर पर दिखाया गया है, जिनका आत्मविश्वास कभी-कभी लापरवाही की हद तक पहुंच जाता है, लेकिन युद्ध के दौरान मुश्किल नाइट ऑपरेशन्स को अंजाम देने में उनकी हिम्मत बहुत काम आती है।
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अभय वर्मा ने निभाया आरएस धालीवाल का किरदार
सीरीज में अभय वर्मा (Abhay Verma) ने आरएस धालीवाल का किरदार निभाया है। 25 साल का वह पायलट जो थोड़ा 'शो-ऑफ' करता था सीरीज में एक वॉर-गेम एक्सरसाइज के दौरान दर्शकों को 25 साल के आरएस धालीवाल से मिलवाया जाता है, जो अपनी फ्लाइंग स्किल्स को लेकर काफी कॉन्फिडेंट दिखते हैं।
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धालीवाल ने किया था ये कारनामा
नेटफ्लिक्स की मिलिट्री ड्रामा सीरीज 'ऑपरेशन सफेद सागर' (Operation Safed Sagar) में अभय वर्मा, फ्लाइंग ऑफिसर राजपाल सिंह धालीवाल का किरदार निभा रहे हैं। वे भारतीय वायु सेना के एक असल हीरो थे, जो 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान हिम्मत भरे नाइट-स्ट्राइक मिशन उड़ाने वाले सबसे कम उम्र के पायलटों में से एक बने थे।
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कौन थे आर एस धालीवाल?
आर एस धालीवाल (RS Dhaliwal) एक फाइटर पायलट थे, जिनके करियर में 1999 के कारगिल युद्ध के दौरान कॉम्बैट मिशन और मशहूर 'सूर्य किरण एरोबैटिक टीम' के साथ काम करना शामिल था। RS धालीवाल, भारतीय वायु सेना के फाइटर पायलट का पूरा नाम राजपाल सिंह धालीवाल का था, जिनका जन्म जनवरी 1974 में हुआ था। वे 17 जून 1995 को 155वें पायलट कोर्स के तहत पायलट ऑफिसर के तौर पर IAF में शामिल हुए थे।
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अपनी फ्लाइंग ट्रेनिंग पूरी करने और फाइटर पायलट बनने के बाद, धालीवाल ने एक फ्रंटलाइन फाइटर स्क्वाड्रन के साथ काम किया और कई एयर फोर्स बेस पर तैनात रहे। कहा जाता है कि करियर की शुरुआत में ही उन्होंने एक कुशल और भरोसेमंद पायलट के तौर पर अपनी पहचान बना ली थी।
कारगिल युद्ध था करियर का अहम मोड़
हालांकि, कारगिल युद्ध (Kargil War) के दौरान उनके करियर में एक अहम मोड़ आया, जब उन्हें उनके करियर के सबसे मुश्किल कामों में से एक के लिए चुना गया।
ऑपरेशन सफेद सागर में RS धालीवाल की भूमिका
1999 के कारगिल संघर्ष के दौरान, धालीवाल नंबर 17 स्क्वाड्रन में फ्लाइंग ऑफिसर के तौर पर तैनात थे। वह उन सबसे कम उम्र के फाइटर पायलटों में से एक थे जिन्हें पहाड़ी इलाकों में रात के समय मुश्किल ऑपरेशन (नाइट-स्ट्राइक ऑपरेशन) करने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
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आरएस धालीवाल की मौत कैसे हुई?
आरएस धालीवाल की मौत 2009 में कर्नाटक के बीदर में एक दुखद विमान दुर्घटना में हुई, जब वे सिर्फ 35 साल के थे। वे सूर्य किरण टीम के साथ एक रूटीन ट्रेनिंग सॉर्टी (अभ्यास उड़ान) में हिस्सा ले रहे थे।
जमीन से लगभग 100 फीट ऊपर उड़ते हुए, उनके पास विमान को संभालने या सुरक्षित रूप से इजेक्ट (बाहर निकलने) करने के लिए बहुत कम समय या ऊंचाई थी। विमान दुर्घटनाग्रस्त होकर आग का गोला बन गया, जिससे अफसर की मौत हो गई। धालीवाल के परिवार में उनकी पत्नी रुबीना और बेटी राशा हैं।
उनका करियर असाधारण था और 2009 में एक विमान दुर्घटना में दुखद रूप से समाप्त हो गया।
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