124 साल पहले दुनिया की पहली Sci-Fi फिल्म बनाकर दिवालिया हो गए थे फिल्ममेकर, जादूगरों और डांसर्स ने किया था मूवी में काम
चांद पर इंसान के कदम रखने के 7 दशक पहले ही सिनेमा में पहली साई-फाई फिल्म बन गई थी, लेकिन इस उपलब्धि के बावजूद फिल्ममेकर को निराशा ही हाथ लगी।
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कौन सी थी दुनिया की पहली साइंस फिक्शन फिल्म ?
HighLights
कौन सी थी दुनिया की पहली साइंस फिक्शन फिल्म ?
124 साल पुहले बनाई गई थी ये मूवी
फिल्म हुई थी कमर्शियल पायरेसी का शिकार
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। 1969 में पहली बार इंसान ने चांद पर कदम रखा था लेकिन क्या आप जानते हैं सिनेमा ने इसके 7 दशक पहले ही साइंस फिक्शन फिल्म की झलक पर्दे पर दिखा दी थी। लेकिन ये हुआ कैसे?
हां माना कि सिनेमा में काल्पनिक कहानी और किस्से ज्यादा होते हैं लेकिन अंतरिक्ष और चांद पर जाने से पहले वहां की दुनिया की कल्पना करना अपने आप में एक दिलचस्प बात है। अगर आप भी साइंस फिक्शन (Sci-Fi Films) फिल्में देखने के बाद सोचते हैं आखिर ऐसी फिल्मों को बनाने की शुरुआत कैसे हुई होगी? तो आइए जानते हैं आखिर दुनिया की पहली साई-फाई फिल्म कौन सी थी और कैसे बनी थी?
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दिलचस्प है फिल्म की कहानी
1902 में फ्रेंच फिल्मकार जॉर्ज मेलिएस की 'ए ट्रिप टू द मून' (A trip To The Moon) बनी, जो एक मूक फिल्म थी। 14 मिनट की इस फिल्म की कहानी में वैज्ञानिक एक रॉकेट के साथ चांद पर भेजे जाते हैं और वहां पहुंचकर चांद की दुनिया के काल्पनिक लोगों से मिलते हैं और फिर वापस धरती पर लौट आते हैं।
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124 साल पुरानी फिल्म में जादूगर और डांसर्स ने की एक्टिंग
इसकी कहानी जूल्स वर्न के उपन्यासों 'फ्रॉम द अर्थ टू द मून' और 'अराउंड द मून' के साथ-साथ एच. जी. वेल्स के 'द फर्स्ट मेन इन द मून' से प्रेरित है। इस फिल्म की खास बात थी इसकी स्टारकास्ट जिसमें जादूगर से लेकर डांसर्स तक शामिल थे।
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'थिएटर डू शैटले' के डांसर्स ने सितारों और तोप संभालने वालों की भूमिका निभाई। वहीं परेड लीडर का रोल जूल्स-यूजीन लेग्रिस ने निभाया, जो एक प्रोफेशनल जादूगर थे और पेरिस में मेलिएस के अपने थिएटर में परफॉर्म करते थे।
दीवालिया हो गए थे फिल्ममेकर
फ्रांसीसी फिल्ममेकर जॉर्ज मेलिएस (George Malies) ने दुनिया की पहली साइंस फिक्शन देकर इतिहास तो रचा लेकिन उनके हाथ सिर्फ निराशा ही लगी। दरअसल मेलिएस को उम्मीद थी कि अमेरिका में फिल्म रिलीज करके वे बहुत पैसा कमाएंगे, लेकिन कुछ लोगों ने उनकी फिल्म की चुपके से पायरेटेड कॉपी बनाईं और कुछ ही हफ्तों में पूरे अमेरिका में बांट दीं। इस वजह से उन्हें कोई मुनाफा नहीं हुआ और आगे चलकर वे दिवालिया हो गए।

हाथ से रंगे गए फ्रेम का किया इस्तेमाल
पहली साइंस फिक्शन फिल्म बनाते वक्त फिल्ममेकर के पास कोई रेफरेंस नहीं था और इसीलिए मेलिएस ने चांद की काल्पनिक दुनिया अपने ही स्टूडियो में बनाई। जिसमें चांद पर रहने वाले काल्पनिक जीव भी शामिल थे। उन्होंने इसे बनाने के लिए मिनिएचर, शुरुआती स्पेशल इफेक्ट्स और हाथ से रंगे गए फ्रेम का इस्तेमाल किया गया था।
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'ए ट्रिप टू द मून' एक खास फिल्म है, सिर्फ इसलिए नहीं कि यह दुनिया की पहली साई-फाई फिल्म है बल्कि इसलिए भी क्योंकि यह एक फिल्मकार की क्रिएटिविटी और कल्पना थी ना कि किसी साइंटिस्ट की। किसे पता था कि 7 दशक बाद पर्दे पर दिखाई गई यह कल्पना सच होने वाली थी और आज 1 शताब्दी के बाद भी हम उस फिल्म को पहली साई-फाई फिल्म के रूप में याद करेंगे।
