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Vinod Khanna की बर्बादी का वो 'धुआं', एक दिन में पी जाते थे 40 से 80 सिगरेट; मौत से पहले ऐसी थी हालत

Published: Wed, 11 Feb 2026 04:47 PM (IST)

विनोद खन्ना की पत्नी कविता खन्ना ने खुलासा किया है कि अभिनेता को ब्लैडर कैंसर से पहले 2001 में फेफड़ों ...और पढ़ें

विनोद खन्ना को थी सिगरेट की लत (फोटो-इंस्टाग्राम)

विनोद खन्ना को थी सिगरेट की लत (फोटो-इंस्टाग्राम)

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। विनोद खन्ना (Vinod Khanna) का नाम बॉलीवुड के लीजेंड्री एक्टर्स में गिना जाता है। उनकी छवि पर्दे पर एक आइडल एक्टर की थी। उन्होंने अपनी स्माइल और लुक्स से सभी को अपना दीवाना बना दिया था। हालांकि फिल्मी पर्दे पर दमदार स्क्रीन प्रीजेंस होने के बावजूद विनोद खन्ना अपनी हेल्थ को लेकर पर्सनल लाइफ में एक बड़ी लड़ाई लड़ रहे थे।

एक्टर के निधन के इतने साल बाद अब पत्नी कविता खन्ना ने उन अनछुए पहलुओं को टच करने की कोशिश की है जिनके बारे में कोई नहीं जानता है। कविता ने बताया कि ब्लैडर कैंसर से पहले विनोद खन्ना को एक और भयंकर बीमारी हो गई थी।

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पहले हुआ था फेफड़ों का कैंसर

विनोद खन्ना का साल 2017 में 70 साल की आयु में ब्लैडर कैंसर से जूझते हुए निधन हो गया था। हालांकि, हाल ही में अपने यूट्यूब चैनल पर शेयर किए गए एक वीडियो में, कविता ने खुलासा किया कि उन्हें सबसे पहले 2001 में लंग्स के कैंसर का पता चला था। इसका मूल कारण एक्टर का बहुत ज्यादा धूम्रपान करना था।

कविता ने बताया कि विनोद खन्ना हैवी स्मोकर थे और एक दिन में 40 से 80 सिगरेट पी लेते थे। इस वजह से उनके फेफड़ों में कुछ धब्बे आ गए थे। स्पेशलिस्ट ने उस समय सलाह दी थी कि उनके लंग्स से वो हिस्सा हटाया जा सकता है।

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एक्टर ने बीमारी को रखा सीक्रेट

हालांकि एक्टर ने बीमारी को सीक्रेट रखना जरूरी समझा। इसके लिए उन्होंने आध्यात्मिक सलाह भी ली। सर्जरी को टालने के लिए डॉक्टर्स की सलाह पर उन्होंने कुछ समय ऋषिकेश में बिताया। इसके बाद दोनों जर्मनी चले गए। यहां पर कुछ ऐसा हुआ जिसपर यकीन करना मुश्किल है। उन्होंने कहा-बाद में जब हम जर्मनी गए तो एक शाम, विनोद को कंधे के पास बहुत तेज दर्द हुआ। वो दो दिन तक दर्द में तड़पते रहे थे। उनके टेस्ट हुए और रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात ये थी कि कैंसर का कोई नामों निशान नहीं था।

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जिंदा रहने के थे बहुत कम चांस

इसके बाद साल 2010 में उन्हें ब्लैडर कैंसर डिटेक्ट हुआ। उस समय उनकी हालत ज्यादा खराब थी। डॉक्टरों का कहना था कि अगर वो एलोपैथी का सही से इलाज करवाते हैं,तो भी दो साल बाद उनके जिंदा रहने की संभावना केवल 25% थी। इस दौरान विनोद खन्ना ने अलग फैसला लिया। उन्होंने अपने गुरुदेव से कहा कि मैंने अपनी जिंदगी जी ली है और अपनी बॉडी को और टॉर्चर नहीं करना चाहता। उन्होंने आश्रम में 'पंचकर्म थेरेपी' ली और दो साल के अंदर स्कैन में पता चला कि कैंसर गायब हो गया था। हमने अमेरिका में स्कैन करवाए थे और रिपोर्ट्स में कैंसर नहीं आया। हालांकि आखिरी में उनका निधन ब्लैडर कैंसर से हुआ।

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