लता मंगेशकर का किया अपमान, किशोर दा को बताया 'शोर कुमार', वो सनकी संगीतकार जिनके जनाजे में शामिल हुए 2 लोग
5 दशक से ज्यादा लोगों को अलग-अलग म्यूजिक देने वाले एक ऐसे संगीतकार जिन्होंने 34 साल के करियर में अपने सनकी स्वभाव के कारण 20 बड़े प्रोजेक्ट्स गंवा दिए, ...और पढ़ें

बॉलीवुड के सनकी संगीतकार की कहानी/ फोटो- Instagram

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। म्यूजिक की दुनिया में कई ऐसी दिग्गज हस्तियां आई हैं, जिन्होंने एक से बढ़कर एक कालजयी गाने बनाए, लेकिन उनकी अपनी पहचान गुमनाम ही रह गई। 5 दशक से अधिक समय तक संगीत जगत में एक अलग पहचान बनाने वाले नामों में एक नाम उस संगीतकार का भी है, जिन्होंने हिंदी सिनेमा के संगीत को एक नया आयाम दिया।
उन्हें न सिर्फ भारतीय सिनेमा में उनके अलग संगीत और 22 हजार से अधिक गानों में मैंडोलिन बजाने के लिए जाना जाता है, बल्कि अपने सनकी और मूडी स्वभाव के कारण भी वे अक्सर सुर्खियों में रहे। कौन थे वे संगीतकार, जिनकी अंतिम विदाई में सिर्फ दो बॉलीवुड हस्तियां पहुंची थीं और जिन्होंने लता मंगेशकर जैसी दिग्गज गायिका की भी क्लास लगा दी थी? आइए जानते हैं उनकी कहानी।
क्यों कहा जाता था उन्हें बेबाक और सनकी?
हम बात कर रहे हैं मशहूर संगीतकार सज्जाद हुसैन की, जिनकी 21 जुलाई को डेथ एनिवर्सरी है। 5 दशक से ज्यादा समय तक संगीत की दुनिया में सक्रिय रहे सज्जाद हिंदी सिनेमा की सबसे विवादित हस्तियों में से एक रहे। उनका गुस्सैल स्वभाव, बेबाक बोल और समझौता न करने की आदत अक्सर उन्हें विवादों में डाल देती थी।
साल 1944 में आई फिल्म 'दोस्त' के शानदार संगीत की सफलता का श्रेय जब निर्देशक शौकत हुसैन रिजवी ने अपनी पत्नी नूरजहां को दिया, तो स्वाभिमानी सज्जाद ने कसम खा ली कि वे अब कभी उनकी पत्नी के लिए गाना कंपोज नहीं करेंगे। वहीं, फिल्म 'सैंया' की रिकॉर्डिंग के दौरान उनका गीतकार डी.एन. मधोक से झगड़ा हो गया था। यही नहीं, एक बार लता मंगेशकर को लेकर की गई उनकी टिप्पणी के कारण दोनों के बीच बातचीत बंद हो गई थी।
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सज्जाद हुसैन ने सिर्फ नूरजहां या लता मंगेशकर से ही पंगा नहीं लिया, बल्कि 'संगदिल' की शूटिंग के दौरान दिलीप कुमार से भी उनकी अनबन हो गई। वे अपनी तीखी बयानबाजी के लिए मशहूर थे, उन्होंने तलत महमूद को 'गलत महमूद' और किशोर कुमार को 'शोर कुमार' तक कह दिया था। कहा जाता है कि निर्माता-निर्देशक के. आसिफ से हुए मनमुटाव के कारण ही उनके हाथ से 'मुगल-ए-आजम' जैसी ऐतिहासिक फिल्म का संगीत निकल गया था।
अंतिम संस्कार में पहुंचे थे सिर्फ दो लोग
सज्जाद हुसैन के इस बेबाक और कड़वे स्वभाव के कारण धीरे-धीरे लोग उनसे दूर होने लगे। अपने 34 साल के करियर में उन्होंने अपने अड़ियल रवैये की वजह से 20 से ज्यादा बड़े प्रोजेक्ट्स गंवा दिए। लता मंगेशकर ने एक पुराने इंटरव्यू में माना था कि सज्जाद हुसैन के साथ काम करने में घबराहट होती थी, क्योंकि वे बारीकियों पर बहुत ध्यान देते थे और उन्हें जरा भी लाउड गाना पसंद नहीं था।

महान संगीतकार सज्जाद हुसैन का निधन 21 जुलाई 1995 को माहिम स्थित उनके घर पर हुआ। जब उनकी अंतिम यात्रा निकली, तो उनके पांच बेटों और एक बेटी के अलावा पूरी फिल्म इंडस्ट्री से सिर्फ दो लोग मशहूर गायक पंकज उधास और संगीतकार खय्याम ही उन्हें अंतिम विदाई देने पहुंचे थे।