46 साल पहले भक्ति गीत गाते ही रोने लगी थीं 'जानकी अम्मा', 48 हजार गानों को दी आवाज; क्यों ठुकराया पद्म भूषण?
'साउथ की बुलबुल' कही जाने वालीं गायिका एस. जानकी ने 6 दशक तक म्यूजिक इंडस्ट्री पर राज किया। वह माइक को मंदिर मानती थीं।

भक्ति गीत गाते हुए आंखों में आ गए थे आंसू। फोटो क्रेडिट- एक्स

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एंटरटेनमेंट डेस्क, नई दिल्ली। साउथ की 'स्वर कोकिला' कही जाने वालीं दिग्गज गायिका सिस्तला श्रीरामामूर्ति जानकी उर्फ एस. जानकी (S. Janaki) अब इस दुनिया में नहीं रहीं। म्यूजिक इंडस्ट्री ने एक ऐसा नायाब हीरा खोया है जिसने 6 दशकों तक अपनी कोमल आवाज का जादू चलाया।
जानकी की मधुर आवाज ही थी, जिसके चलते वह 'साउथ की स्वर कोकिला' कही गईं। उन्हें सिनेमा में प्यार से 'जानकी अम्मा' भी कहा जाता है। वह वर्सेटाइल गायिका थीं जिन्होंने अलग-अलग अंदाज में कई भाषाओं में गीत गाए। सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशी भाषा में अपनी गायिकी से दिल जीता।
9 साल की उम्र में शुरू किया था करियर
जानकी सिर्फ 9 साल की थीं, जब उन्हें पहली बार गाने का मौका मिला। उन्होंने म्यूजिक के बेसिक सीख लिए थे, लेकिन क्लासिकल म्यूजिक का ज्ञान नहीं लिया था। इसके बावजूद वह क्लासिकल म्यूजिक में निपुण थीं। उनका बचपन से ख्वाब था कि वह फिल्मों में गाना गाए और एक दिन उन्हें यह मौका भी मिला।
प्लेबैक सिंगिंग में किया राज
वह सिर्फ 19 साल की थीं, जब 1957 में आई फिल्म विधियिन विलायट्टू से उन्हें गाने का मौका मिला। इसके बाद उनकी किस्मत चमकी और एक ही साल में उन्होंने 6 अलग-अलग भाषाओं में गाना शुरू कर दिया। हिंदी, तमिल, तेलुगु, कन्नड़ और मलयालम फिल्मों में गाना गाकर प्लेबैक सिंगर के तौर पर जानकी अम्मा ने स्टारडम पा लिया।
भक्ति गीत गाकर रो पड़ी थीं जानकी अम्मा
सिर्फ फिल्मी गाने ही नहीं, उन्होंने भक्ति गीत में जान डाली। वह कई भक्ति गीत को अपनी आवाज दे चुकी हैं। एक बार वह कन्नड़ फिल्म भक्त सिरीयला का गाना 'एके ई कोप शंकरा' को स्टूडियो में रिकॉर्ड कर रही थीं। उस वक्त यह गीत गाते हुए जानकी अम्मा रोने लगी थीं। कहा जाता है कि वह इस गीत को गाने के बाद स्टूडियो में करीब एक घंटे तक रोई थीं। वह कहती थीं कि माइक ही उनका मंदिर है।
क्यों जानकी अम्मा ने ठुकराया था पद्म भूषण?
जानकी ने अपनी काबिलियत के दम पर कई अवॉर्ड अपने नाम किए जिनमें 4 नेशनल अवॉर्ड भी शामिल है। इसके अलावा साल 2013 में उन्हें भारतीय सर्वोच्च सम्मान पद्म भूषण से सम्मानित किया जाना था। हालांकि, उन्होंने इस खिताब को स्वीकार करने से इनकार कर दिया था। उनका कहना था कि साउथ सिनेमा से जुड़े सितारों को नेशनल लेवल पर देर से पहचान मिलती है।
विदेशों में भी चलाया जादू
48000 गानों को आवाज दे चुकीं एस. जानकी ने अलग-अलग जेनरेशन के म्यूजिक डायरेक्टर्स के साथ काम किया। उन्होंने एआर. रहमान, जीके वेंकटेश, हंसलेखा, इलयराजा, एम रंगा राव और विजय भास्कर जैसे म्यूजिक डायरेक्टर्स के लिए गाने गाए। उन्होंने मुश्किल से मुश्किल गाना बहुत ही सहजता के साथ गाया। वह जापानी और जर्मन भाषाओं में भी गा चुकी हैं।
कल्ट हिंदी गानों दो आवाज
जानकी अम्मा ने साउथ सिनेमा पर राज तो किया ही, हिंदी सिनेमा को भी कल्ट गानों से नवाजा। उन्होंने 'बोल बेबी बोल' (मेरी जंग), 'यार बिना चैन कहां रे' (साहेब), 'आते आते तेरी याद' (जान की बाजी), 'दिल में हो तुम' (सत्यमेव जयते) और 'गोरी का साजन' (आखिरी रास्ता) जैसे हिंदी गानों को अमर कर दिया।
