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'कहा था अकेले मत रहो...', Nana Patekar को अनिल शर्मा ने दी थी सलाह, निधन से सदमे में डायरेक्टर

By Smita SrivastavaEdited By: Rinki Tiwari
Published: Fri, 09 Oct 2026 01:41 PM (IST)

नाना पाटेकर के निधन के बाद यशपाल शर्मा, अनिल शर्मा और मिलन लूथरिया ने उन्हें याद किया। कलाकारों ने नाना ...और पढ़ें

नाना पाटेकर के निधन से सदमे में सितारे। फोटो क्रेडिट- एक्स

नाना पाटेकर के निधन से सदमे में सितारे। फोटो क्रेडिट- एक्स

HighLights

  1. यशपाल शर्मा ने नाना को बेहतरीन सह-कलाकार बताया

  2. अनिल शर्मा ने नाना के स्वतंत्र स्वभाव को याद किया

  3. मिलन लूथरिया ने नाना के काम के प्रति समर्पण के बारे में बात की

स्मिता श्रीवास्तव, मुंबई। अपहरण और अब तक छप्पन फिल्मों में नाना पाटेकर (Nana Patekar) के साथ काम कर चुके अभिनेता यशपाल शर्मा बताते हैं, "मेरे पूरे करियर में नाना पाटेकर सबसे बेहतर सह-कलाकार थे। इतने बड़े अभिनेता होने के बावजूद वह साथ में काम करने वाले कलाकार को कभी अपने से छोटा नहीं महसूस होने देते थे।

नाना पाटेकर से डरते थे यशपाल शर्मा

उनके बारे में काफी सुना था तो पहले मेरे मन में भी उन्हें लेकर डर और थोड़ी असुरक्षा की भावना थी। जब उनके साथ काम किया तो मुझे पता चला कि वह सबसे बेहतरीन सह-कलाकार थे। फिल्म अब तक छप्पन के सेट पर हमने काफी समय साथ में बिताया था। एक दिन मैंने उनसे पूछा कि सर आपके बारे में इतनी सारी बातें फैली हैं कि आप किसी को मार देते हैं, किसी को गालियां दे देते हैं या डांट देते हैं।

तब उन्होंने कहा कि यशपाल ये दुनिया टेढ़ी उंगली से ज्यादा घी निकालना जानती है। इसलिए जो डेढ़ा होता है, मैं उसके साथ गुस्सा करता हूं। वो व्यक्ति जिसमें कोई प्रतिभा नहीं है, लेकिन दिखावा बहुत ज्यादा करता है, मुझे उससे नफरत है। जो ईमानदारी से काम करता है, उसके साथ मैं भी बहुत ईमानदारी से रहता हूं।

Nana patekar

मैंने आजतक तुम्हारा साथ कुछ बुरा व्यवहार किया? तब मैंने कहा कि सर मैं तो आपके बारे में ऐसा सोच भी नहीं सकता हूं। मैंने उनसे बहुत कुछ सीखा है। मेरी उनसे जितनी बातचीत हुई थी, उसके आधार पर मैं कह सकता हूं कि वह अध्यात्म, जीवन, मौत और दर्शन के बारे में जितना समझते थे, उतना इंडस्ट्री में और कोई दूसरा कलाकार नहीं समझता है।"

कितनी बार कहा था साथ रखो किसी को, खुद पर गुस्सा आ रहा है: अनिल शर्मा

मैंने नाना से कहा था कि अपने साथ किसी को रखें, अकेले ना रहें, लेकिन उन्होंने मेरी नहीं मानी। यह कहकर भावुक हो गए फिल्मकार अनिल शर्मा। फिल्म वनवास में नाना को निर्देशित करने वाले अनिल बताते हैं कि नाना हमेशा हंसते-मजाक करते रहते थे। सेट पर खाना बनाया करते थे, मसाला भी खुद बनाते थे, यूनिट के दो सौ लोगों को खुद खाना बनाकर खिलाते थे। वह जितने बड़े कलाकार थे, उससे बड़े इंसान और समाजसेवी थे।

वनवास की शूटिंग के दौरान शिमला में जब क्लाइमैक्स की शूटिंग चल रही थी, तब वहां उस दौरान काफी बर्फ पड़ रही थी। सुबह छह बजे से लेकर शाम छह बजे तक वह कई घंटों तक बर्फ में खड़े रहते थे। फिल्म में वहां उनकी मौत का सीन फिल्माया जा रहा था, वह बर्फ पर हिले नहीं थे, तब किसी को कहां पता था कि वह सीन असल जीवन में ऐसे सच हो जाएगा। सुबह जब सोकर उठा, तो नाना के जाने की खबर सुनकर समझ ही नहीं आ रहा था कि क्या करूं।

खुद पर गुस्सा भी आ रहा था, क्योंकि इस बार गणेशोत्सव में उन्होंने बुलाया था, लेकिन मैं पहुंच नहीं पाया था। सोचा था कि पुणे में जाकर उनसे मिलूंगा, लेकिन अब नहीं जा पाऊंगा। अब लगता है कि जो चीज मन में आए कर लेनी चाहिए। मैंने कितनी बार उनसे कहा था कि नाना सर, साथ में लोगों को रखा करो, कोई न कोई आपके साथ रहना चाहिए। लेकिन वह रखते ही नहीं थे।

Welcome

वह हर चीज खुद करना चाहते थे, अपना खाना खुद बनाते थे। हमेशा यही कहते थे कि कुछ नहीं होगा मुझे। मैं कहता था कि सर, एक्सरसाइज करो, ख्याल रखो। उनके साथ इतना समय गुजारा है कि बहुत सी बातें याद आ रही हैं, जो यादों में ही रह जाएंगी। फिल्म इंडस्ट्री के साथ, वह जो अपने एनजीओ के साथ पानी पहुंचाने के लिए संघर्ष कर रहे थे, उस कार्य को भी क्षति पहुंचेगी। नाना जैसे कर्मठ लोग कहीं, कभी-कभी पैदा होते हैं।

नाना की भावुकता तो बहुत कम लोग ही समझ पाए : मिलन लूथरिया

फिल्म टैक्सी नंबर 9211 में नाना को निर्देशित करने वाले फिल्मकार मिलन लूथरिया बताते हैं, "नाना पाटेकर के अंदर जो मासूमियत, बचपना और शरारत थी, उसे बहुत कम लोगों ने समझा। वो अपने काम और निर्देशक से बहुत प्यार करते थे। वो चाहते थे कि मैं जितनी तैयारी के साथ सेट पर आता हूं, सारे लोग उतनी ही ज्यादा तैयारी के साथ सेट पर आएं।

इसीलिए कई बार दूसरों को गलत करता देख उन्हें सेट पर चिड़चिड़ापन भी होता था। जो लोग बहुत ईमानदारी से काम करते हैं, उनका मूड छोटी-छोटी बातों से ही खराब हो जाता है। मुझे याद है कि अंधेरी की एक सड़क पर हम अपनी फिल्म की शूटिंग कर रहे थे। बीच में थोड़ा वक्त था, तो एक म्यूजिक कैसेट्स की दुकान वाले ने उन्हें अंदर बुलाकर दुकान के अंदर बैठा लिया। जब वह उस दुकान से बाहर आए तो मुझसे कहा कि यार मैंने तो आज बहुत पैसे खर्च कर दिया।

Nana

इस दुकान से मैंने स्टीरियो, स्पीकर्स, टीवी समेत कई चीजें खरीद लिया है। इससे उनके बच्चे जैसा स्वभाव पता चलता है। बहुत भावुक इंसान थे, शायद उनका वही पहलू लोगों को ज्यादा पसंद नहीं आया। वो सेट पर मजाक मस्ती भी करते रहते थे। डराते रहते थे कि ऐसा नहीं करेगा तो मैं चला जाउंगा। पहले तो डर लगता था कि सच में चले जाएंगे।

एक दिन सेट पर कुछ तैयारी नहीं हो पाई थी, तो लेट हो गया। उतने में वो गाड़ी में बैठकर सेट से चले गए। कमाल की बात यह है कि मिनट बाद फिर वापस आए और बोले कि मैं तो तुम्हारी टांग खींच रहा था। मैं शूटिंग छोड़कर नहीं जाऊंगा, मैं तो तुम्हारे साथ हूं।

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