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    24 अप्रैल को Box Office पर धमाका करने को तैयार Ginny Weds Sunny 2, अविनाश और मेधा को फिल्म से बड़ी उम्मीद

    By Dipesh PandeyEdited By: Ekta Gupta
    Updated: Sun, 19 Apr 2026 04:52 PM (IST)

    Avinash Tiwary और Medha Shankr स्टारर फिल्म 'गिन्नी वेड्स सनी 2' 24 अप्रैल को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही इस फिल्म को लेकर दोनों कलाकारों से ...और पढ़ें

    रोमांटिक ड्रामा कॉमेडी लेकर आ रहे अविनाश तिवारी-मेधा शंकर

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    दीपेश पांडेय, मुंबई। हर माता-पिता और परिवार की चिंता होती है कि उनके बच्चों की शादी किसी अच्छे लड़के या लड़की से हो जाए और वो अपनी लाइफ में सेटल हो जाए। कुछ ऐसे ही विषय पर आधारित है, अभिनेता अविनाश तिवारी (Avinash Tiwary) और अभिनेत्री मेधा शंकर (Medha Shankr) की फिल्म गिन्नी वेड्स सनी 2। विक्रांत मेस्सी और यामी गौतम अभिनीत इस फ्रेंचाइजी की ओरिजिनल फिल्म साल 2020 में प्रदर्शित हुई थी। 24 अप्रैल को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने जा रही इस फिल्म से दोनों कलाकारों को उम्मीद है कि फिल्म दर्शकों को उनके परिवार के साथ सिनेमाघरों में वापस लाएगी।

    फ्रेंचाइजी फिल्मों के मामले में लोग पिछली फिल्मों से भी तुलना करते हैं, इस फिल्म को लेकर आप दोनों के मन में क्या विचार आए?

    अविनाश: कहानी सुनते समय तो मन में ऐसा कोई ख्याल नहीं होता है कि फिल्म क्या होगी, कैसी होगी या इसका परिणाम क्या होगा? मुझे बस इतना पता है कि जब मैं यह कहानी सुन रहा था तो हर दो-तीन मिनट में हंसते-हंसते सोफे से गिर जाता था। ऐसी बात मुझे फिल्म मडगांव एक्सप्रेस में लगी थी। इसमें मुझे लड़के लड़की के बीच रखे गए प्रसंग इतने प्यारे, संवेदनशील और प्रासंगिक लगे जो आजकल के सिनेमा में देखने के लिए नहीं मिलता है। ऐसी बातें मुझे अपने परिवार में ही किसी न किसी से सुनी थी।

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    मेधा : मुझे स्क्रिप्ट पढ़ते समय ही यह फिल्म बहुत मनोरंजक, प्यारी लगी थी। मुझे याद ही नहीं है कि इससे पहले मैं इतना ज्यादा कौन सी फिल्म की कहानी सुनकर हंसी थी। मुझे गिन्नी का किरदार भी बहुत पसंद आया था। शुरू-शुरू का प्यार कैसा होता है, कैसे पनपता है? फिल्म का यह हिस्सा मुझे बहुत अच्छा लगा था। इसमें मुझे बहुत कुछ ऐसा करने को मिला, जो पहले कभी नहीं मिला है।

    वर्तमान में टिकट खिड़की पर फिल्मों के संघर्ष को देखते हुए पूरे परिवार को ध्यान में रखकर फिल्में बनाना निर्माताओं के लिए कितना महत्वपूर्ण है?

    अविनाश : मैं इसके लिए एक उदाहरण दूंगा। मेरे स्कूल के दोस्तों का 30 लोगों का ग्रुप है। उसमें मेरे एक दोस्त ने मुझे फोन किया कि फिल्म कब रिलीज हो रही है? हम उसी दिन के लिए टिकट बुक करते हैं। मैंने उससे कहा कि यह पूरे परिवार के साथ देखने वाली फिल्म है, अपने साथ अंकल-आंटी (दोस्त के माता-पिता) को भी लेकर आना। फिर सभी दोस्त अपने माता-पिता को साथ लाने के लिए तैयार हो गए। इस तरह सभी के माता-पिता साथ आने के बाद 30 टिकट की जगह 90 टिकट हो गए।

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    अगर, थिएटर नहीं भर रहे हैं, तो बतौर फिल्ममेकर इससे अच्छा मैं क्या कर सकता हूं कि ऐसी फिल्में बनाऊं जिसे पूरा परिवार साथ में देखे। परिवार के लिए अच्छा मनोरंजन भी होगा और इंडस्ट्री के लिए भी ज्यादा कमाई होगी।

    क्या आप दोनों को परिवार से कभी यह बताया गया कि सिनेमा इंडस्ट्री में आने के बाद क्या चीजें नहीं करनी हैं?

    अविनाश : मुझे मेरे परिवार से सिर्फ इतना कहा गया था कि मुझे मेरी क्षमता और सीमाओं का पता होनी चाहिए। आप अपने जीवन में जो भी करें, उसके लिए जिम्मेदारी लें। अगर आपने कुछ किया और वह गलत हो गया, तो उसकी जिम्मेदारियों से भागिए मत। यह सुझाव आजतक कहीं न कहीं मेरा साथ देता आया है। बतौर कलाकार मैं हर तरीके की भूमिकाएं निभाता हूं, शुक्र है कि मेरे घरवाले यह समझ पाते हैं कि यह एक कला है और इसमें कोई एक दायरे में सीमित नहीं रह सकता है। मेरे अंदर निडरता और जुझारूपन मेरे पारिवारिक मूल्यों से ही आए हैं।

    मेधा : मेरे परिवार की तरफ से मुझ पर कभी कोई दबाव नहीं रखा गया है, न किसी तरह की मांग की गई है। मेरा परिवार में मेरे पापा, भाई सभी बहुत ज्यादा सपोर्ट करते हैं। मन में बस यही रहता है कि कभी मुझसे कोई ऐसी गलती न हो कि जिसका मुझे बाद में पछतावा हो। निजी हो या पेशेवर जिंदगी अपने पारिवारिक मूल्यों के अनुसार ही काम करना चाहिए। मन में हमेशा यह रहता है कि पापा ने मेरा इतना साथ दिया है तो कोई उन्हें पलटकर यह न बोले कि आपकी बेटी क्या ही कर रही है।

    मेधा 12th Fail फेल की सफलता के बाद उसी लय को आगे बढ़ाने के लिए आपकी क्या रणनीति है?

    मुझे ज्यादा सोच-विचार करना या रणनीति बनाना आता ही नहीं है। मैं अपनी जिंदगी में बहुत सी चीजें अपने दिल से आई आवाज के आधार पर करती हूं। अगर मुझे कोई चीज उस समय अच्छी लग रही है, बस बिना ज्यादा सोचे-समझे उसे कर लेती हूं। बाकी तो मेरी जिंदगी भगवान भरोसे चलती है क्योंकि हमारे हाथ में सब कुछ नहीं होता है।

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    शादी को लेकर आप दोनों से सबसे ज्यादा सवाल कौन करता है?

    अविनाश : मेरी मम्मी पहले मुझसे बहुत कहती थी कि शादी कर लो। बीच में उन्होंने कम कर दिया था। अब पिछले कुछ दिनों से उन्होंने फिर से मुझे जल्दी शादी करने के लिए कहने लगी हैं। वह जब भी मुझे शादी करने के लिए कहती हैं तो मैं उन पर लड़की ढूंढ़कर लाने की जिम्मेदारी दे देता हूं, फिर वह चुप हो जाती हैं।  

    मेधा : मेरे घर में शादी को लेकर मुझसे अभी कोई सवाल नहीं पूछता है। हां, कुछ रिश्तेदार और आंटियां हैं, जो समय-समय पर शादी की बात उठाती रहती हैं। अभी तो मेरे पास काफी समय है।

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