'हर किसी को वो काम और नहीं मिलता, जिसका वो हकदार है...'बंटवारा 1947 के एक्टर ने क्यों कही ऐसी बात?
अभिनेता अभिमन्यु सिंह ने अपनी हालिया फिल्म 'बंटवारा 1947' में खलनायक की भूमिका पर बात की। उन्होंने राम गोपाल वर्मा ...और पढ़ें
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दीपेश पांडे, मुंबई। करीब ढाई दशक पहले फिल्म अक्स से अपना अभिनय सफर शुरू करने वाले अभिनेता अभिमन्यु सिंह (Abhimanyu Singh) वर्तमान में हिंदी और दक्षिण भारतीय दोनों सिनेमा में सक्रिय हैं। हालिया प्रदर्शित फिल्म बंटवारा 1947 (Batwara 1947) में वह खलनायक याकूब पहलवान की भूमिका में नजर आएं।
वेब सीरीज आदर्श बाल विद्यालय (Adarsh Baal Vidyalaya) और इंस्पेक्टर अविनाश सीजन 2 (Inspector Avinash Season 2) तथा फिल्म वन टू चा चा चा के बाद इस साल यह अभिमन्यु का तीसरा प्रोजेक्ट है।
समय के साथ बदली भूमिका
फिल्म गुलाल में नायक की भूमिका में लोकप्रियता बटोरने के बाद आगे अभिमन्यु खलनायक भूमिकाएं निभाना शुरू कर दिया। वह कहते हैं, ‘गुलाल के बाद फिल्म रक्तचरित्र आई थी। वह आज की तिथि में एक कल्ट फिल्म के वर्ग में शामिल है और उसमें मैंने जो भूमिका निभाई है, वो खल चरित्रों में एक मील के पत्थर की तरह है। हाल ही में मैं फिल्म के निर्देशक रामगोपाल वर्मा जी से मिला था।
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उन्होंने कहा कि अभिमन्यु तुम्हारे इस परफार्मेंस को 15 साल हो गए, लेकिन तुम मुझे किसी एक भी कलाकार का नाम नहीं बता सकते, जिन्होंने इससे बेहतर काम किया हो। हर किसी को वो काम नहीं मिलता, जिसका वो हकदार है। यह तो बस समय की बात है। जब समय बदलता है तो लोगों को आपकी हर चीज अच्छी लगने लगती है।’
डायरेक्टर ने पूरा किया वादा
बंटवारा 1947 से जुड़ने की अभिमन्यु दिलचस्प कहानी सुनाते हैं। वह बताते हैं, ‘मैं अपने परिवार के साथ स्विट्जरलैंड में छुट्टियां मनाने गया था। वहां पर मुझे राज जी (निर्देशक राजकुमार संतोषी) का फोन आया कि मुंबई आ जाओ, मैं फिल्म बंटवारा 1947 बना रहा हूं, तुम्हारे लिए एक बहुत अच्छा रोल है। फिल्म में तुम और सनी देओल दो मुख्य कलाकार हैं।
यहां आने के बाद मेरा कोई स्क्रीनटेस्ट वगैरह नहीं हुआ, बस राज जी ने कहा कि मुझे तुम चाहिए और वहीं पर बात खत्म हो गई। उन्होंने फिल्म गुलाल में मेरा काम देखा था। उसके बाद हम लोग साथ में कोई दूसरा प्रोजेक्ट करने वाले थे, लेकिन वह नहीं बना। हालांकि, फिर उन्होंने मुझसे वादा किया कि हम साथ जरूर काम करेंगे। फिर उन्होंने इस फिल्म में अपना वादा पूरा किया।’
नहीं पहचान पाए आमिर
सनी देओल के साथ काम करने और फिल्म के सेट के अनुभवों के बारे में अभिमन्यु बताते हैं, ‘सनी देओल और उनकी आंखों में वो जो एक तिल, वो मैं बचपन से ही देखता आया हूं। जब उनके सामने पहला सीन शूट कर रहा था, मेरी नजर उस तिल पर गई, जिसे मैं बचपन से बड़े पर्दे पर देखता आया था। एक पल के लिए लगा कि मैं कहीं सपना देख रहा हूं। फिर मैंने स्वयं को संभाला और अपने सीन के साथ आगे बढ़ गया।
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ऐसे में आप बहुत ज्यादा भावनाओं में नहीं बह सकते हैं, वरना प्रभाव आपकी परफार्मेंस पर पड़ सकता है। इस फिल्म के सेट पर जब मैं पहले दिन पहुंचा तो वहां मैंने आमिर सर (फिल्म के निर्माता और अभिनेता आमिर खान) को देखा। मैं उनके पास गया और कहा कि सर मैंने पटना में आपकी कयामत से कयामत तक फिल्म तीन बार देखी थी। यह सुनकर वो खुश हो गए और कहा कि अच्छा।
हालांकि, उन्हें यह नहीं पता था कि मैं ही उनकी फिल्म में खलनायक की भूमिका निभा रहा हूं। उनको लगा कि कोई प्रशंसक है, फिर पीछे से मेरी पत्नी भी आई। उन्होंने बताया कि आमिर सर यही आपकी फिल्म के खलनायक हैं। यह सुनकर वह चौंक गए और कहा कि ओह। फिर तो उन्होंने मुझे हाथ मिलाकर गले लगा लिया।’
पसंदीदा छात्र थे अभिमन्यु
बिहार से ताल्लुक रखने वाले अभिमन्यु वेब सीरीज आदर्श बाल विद्यालय में शिक्षक की भूमिका में दिखे। अपने छात्र दिनों के बारे में वह बताते हैं, ‘मैं हमेशा से एक अच्छा छात्र रहा हूं और पहली बेंच पर ही बैठता था। अपने स्कूल के सभी शिक्षकों का मैं पसंदीदा छात्र हुआ करता था। उस समय मेरे मन में था कि जो भी कर रहा हूं, पूरे मन से किया जाय। भले ही मैं घर पर बहुत ज्यादा नहीं पढ़ता था, लेकिन क्लासरूम में हर चीज पर पूरा ध्यान देता था।
कक्षा में जो टीचर बताते थे, परीक्षा में वही चीजें लिखकर मैं चला आता था और मेरे अच्छे नंबर भी आते थे।’
अभिमन्यु के आने वाले प्रोजेक्ट्स
अपने आगामी प्रोजेक्ट्स के बारे में अभिमन्यु बताते हैं, ‘आगे तीन-चार दक्षिण भारतीय फिल्में हैं। एक बड़ी वेब सीरीज हैं, लेकिन मैं अभी उसके बारे में बता नहीं सकता हूं। इतना कह सकता हूं कि काफी दिलचस्प प्रोजेक्ट्स हैं, जिनमें मैंने हिंदी और दक्षिण भारतीय दोनों ही सिनेमा के कई बड़े सितारों के साथ काम किया है।’
