Batwara 1947 की असफलता से परेशान हुए राजकुमार संतोषी, फिल्म की कमाई पर हावी हुई Sunny Deol की छवि?
फिल्ममेकर राजकुमार संतोषी (Rajkumar Santoshi) ने सनी देओल की हालिया रिलीज फिल्म बंटवारा 1947 (Batwara 1947) की असफलता पर बात की है।

बंटवारा 1947 की असफलता पर बोले डायरेक्टर। फोटो क्रेडिट- एक्स

समय कम है?
जानिए मुख्य बातें और खबर का सार एक नजर में
दीपेश पांडेय, मुंबई। घायल व अंदाज अपना अपना फिल्मों के निर्देशक राजकुमार संतोषी (Rajkumar Santoshi) ने एक्शन, कोर्टरूम ड्रामा व कॉमेडी समेत अलग-अलग जॉनर की फिल्में बनाई हैं।
अब उन्होंने सनी देओल (Sunny Deol) के साथ भारत-पाक विभाजन की पृष्ठभूमि पर फिल्म 'बंटवारा 1947' (Batwara 1947) बनाई है। बुधवार तक 31.03 करोड़ रुपये कमाने वाली फिल्म से राजकुमार संतुष्ट हैं, लेकिन इसकी कमाई से नहीं। उन्होंने दैनिक जागरण के साथ खास बातचीत की है।
आप अपनी पहली फिल्म कमल हासन के साथ बनाना चाहते थे, पर वो नहीं बनी। फिर कभी उनके साथ फिल्म बनाने की कोशिश नहीं की?
ऐसा कोई विषय मिला नहीं, जिसमें हम दोनों साथ काम कर पाएं। घायल और घातक दोनों फिल्मों के समय मैंने सोचा था कि उनके साथ ये फिल्में बनाना सही रहेगा। हालांकि, वो नहीं बनी। उसके बाद मुझे सही विषय नहीं मिला, जिसमें मैं उनके साथ काम कर सकूं।
अंदाज अपना अपना, लज्जा समेत कई फिल्मों को समय से आगे का बताया गया। क्या सही समय व ट्रेंड के साथ बढ़ने के बारे में नहीं सोचा?
यह सच है कि जब जो ट्रेंड में नहीं था, उस समय मैंने वही किया। आज भी मैं ट्रेंड से अलग काम कर रहा हूं। गांधी वर्सेस गोडसे और बंटवारा 1947 भी इसी सोच की फिल्में हैं। मैंने शुरू से तय किया था कि खुद को कभी दोहराऊंगा नहीं, इसलिए कोई सीक्वल नहीं बनाया। घायल, घातक और अंदाज अपना अपना के सीक्वल बनाने का दबाव भी था, लेकिन मैंने कभी नहीं बनाया।

बीच में तो अंदाज अपना अपना की सीक्वल बनने की खबरें आई थीं...
मैं उसकी सीक्वल नहीं बना रहा हूं। मैं उसी तरह की अलग कॉमेडी फिल्म अदा अपनी अपनी बना रहा हूं।
अब आगे किस तरह की फिल्में बनाने का इरादा है?
सनी देओल के साथ एक एक्शन फिल्म की योजना है। आमिर खान के साथ भी एक प्रोजेक्ट है, देखते हैं, कौन सी फिल्म पहले आती है। आमिर के साथ हुई बातचीत के बाद दो कहानी लॉक हुई है। सनी वाली फिल्म तो शायद हम जल्द ही शुरू कर देंगे।
टिकट खिड़की पर बन रहे पांच सौ और हजार करोड़ रुपये के रिकार्ड सिनेमा पर क्या प्रभाव डाल रहे हैं?
इससे क्रिएटिव (रचनात्मक) फिल्मकारों पर दबाव आ जाता है। वह नए विषय सोच नहीं पाते हैं। आजकल अच्छी फिल्म बनाने से ज्यादा उनका ध्यान इस पर लगा रहता है कि कौन सी फिल्म बड़ी बुकिंग लेगी और कौन सी नहीं। वीकेंड पर कौन सी फिल्म ज्यादा कमाई करेगी। ये नहीं सोचते हैं कि अच्छी फिल्म लगे और चले। यह काम दिलचस्पी से ज्यादा, आंकड़ों पर आधारित पर हो गया है।
ओपनिंग देख सवाल उठता है कि क्या स्टार की छवि कहानी पर हावी हो सकती है?
मैंने आवाम के लिए फिल्म बनाई है। फिल्म देखकर बाहर आ रहे करीब 98 प्रतिशत लोग इसकी प्रशंसा कर रहे हैं। बस दो-तीन लोग सनी के मुसलमान का रोल करने से नाखुश हैं। बंटवारा 1947 पर लोगों की प्रतिक्रिया देखकर लगता है कि कलाकार की छवि कहानी पर भारी पड़ सकती है।

सनी के प्रशंसक उन्हें गदर की तरह सरदार और हिंदुओं के चैंपियन की भूमिकाओं में ही देखना चाहते हैं। ऐसा नहीं होना चाहिए, कलाकार को स्वतंत्रता होनी चाहिए। अमिताभ, धर्मेंद्र समेत सभी बड़े सितारों ने अलग-अलग लोगों और धर्मों के किरदार निभाए हैं। गदर, गदर 2 और बार्डर के कारण सनी से एंटी-मुस्लिम और एंटी-पाकिस्तान छवि जुड़ी है, जबकि सनी स्वयं ऐसे नहीं हैं।
फिल्म की कमाई पर सनी व निर्माता आमिर खान की क्या प्रतिक्रिया रही?
बतौर निर्माता आमिर खान की चिंता रहती है कि दर्शकों तक अच्छा प्रोडक्ट पहुंचे। इसलिए वह स्क्रीनप्ले, डायलॉग, एडिटिंग और बैकग्राउंड समेत हर पहलू में शामिल होते हैं। फिल्म देखकर हम संतुष्ट हैं, लेकिन बॉक्स ऑफिस आंकड़े परेशान कर रहे हैं कि आखिर ऐसा क्या है, जो मास दर्शकों को सिनेमाघरों तक जाने से रोक रहा है।
