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तेल से लेकर UPI तक... भारत पर अमेरिकी दबाव के खिलाफ एसजेएम ने क्यों उठाए सवाल?

Updated: Thu, 13 Aug 2026 01:31 AM (IST)

अमेरिकी टैरिफ धमकी पर स्वदेशी जागरण मंच ने कड़ा विरोध जताया है, इसे एकतरफा दबाव बताया और अमेरिकी कंपनियों के बहिष्कार का आह्वान किया है।

अमेरिकी टैरिफ धमकी पर स्वदेशी जागरण मंच ने कड़ा विरोध जताया है। इमेज एआई

अमेरिकी टैरिफ धमकी पर स्वदेशी जागरण मंच ने कड़ा विरोध जताया है। इमेज एआई

HighLights

  1. अमेरिकी टैरिफ धमकी को एकतरफा आर्थिक दबाव बताया।

  2. भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर कोई समझौता अस्वीकार्य।

  3. अमेरिकी कंपनियों, सोशल मीडिया, ई-कॉमर्स के बहिष्कार की अपील।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। अमेरिका की ओर से रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने संबंधी विधेयक पेश किए जाने के बाद देश में इसका कड़ा विरोध शुरू हो गया है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) से जुड़े स्वदेशी जागरण मंच (एसजेएम) ने अमेरिकी सीनेट के इस कदम को एकतरफा आर्थिक दबाव और रणनीतिक ब्लैकमेलिंग करार दिया है।

संगठन ने स्पष्ट किया है कि कोई भी देश भारत की ऊर्जा सुरक्षा और संप्रभु व्यापार नीति तय नहीं कर सकता। एसजेएम ने देशवासियों से पेप्सी, कोका-कोला, अमेरिकी सोशल मीडिया और ई-कामर्स प्लेटफार्म का पूर्ण बहिष्कार करने का आह्वान किया है।

साथ ही एसजेएम ने विपक्ष के आरोपों पर सहमति देते हुए कहा है कि भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन के माध्यम से यूपीआइ/इलेक्ट्रानिक भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट की अनुमति से वीजा और मास्टरकार्ड जैसी विदेशी कंपनियों को फिर से भारतीय बाजार में बढ़त मिल सकती है।

ऊर्जा सुरक्षा पर कोई समझौता स्वीकार्य नहीं

स्वदेशी जागरण मंच के राष्ट्रीय सह-संयोजक डा. अश्वनी महाजन ने एक बयान जारी कर कहा कि भारत दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था है। देश की विशाल ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए तेल आयात के स्रोतों का विविधीकरण राष्ट्रीय हित का अभिन्न अंग है।

रूसी कच्चे तेल से भारतीय उपभोक्ताओं को महंगाई से राहत मिली है और वैश्विक स्तर पर ऊर्जा कीमतें नियंत्रित रही हैं। अमेरिकी सीनेट का यह कदम अंतरराष्ट्रीय व्यापार के नियमों के खिलाफ है और इसके कारण स्वयं अमेरिकी नागरिकों को भी महंगी ऊर्जा का सामना करना पड़ेगा।

गन प्वाइंट पर नहीं हो सकती भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता

एसजेएम का मानना है कि अमेरिका इस प्रस्तावित कानून का इस्तेमाल भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते की बातचीत में दबाव बनाने के लिए कर रहा है। संगठन ने सरकार से कहा है कि दो संप्रभु देशों के बीच व्यापार वार्ता बराबरी, पारस्परिकता और पारस्परिक सम्मान के आधार पर होनी चाहिए, न कि दंडात्मक शुल्क की धमकियों के साए में।

मंच ने जोर देकर कहा कि कृषि और डेयरी क्षेत्र की तरह ऊर्जा सुरक्षा के मुद्दे पर भी भारत को अपनी संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करना चाहिए।
हालिया रियायती फैसलों पर पुनर्विचार की मांग

केंद्र सरकार के दो हालिया निर्णयों पर असहमति और निराशा 

  • ई-कामर्स एफडीआइ (प्रेस नोट 3, 2026): एक्सपोर्ट के लिए इन्वेंट्री सीमाओं में दी गई ढील से अमेजन और वालमार्ट-फ्लिपकार्ट जैसी अमेरिकी दिग्गजों को अनुचित लाभ मिलेगा, जो भारतीय निर्यातकों व छोटे व्यापारियों के हित में नहीं है।
  • भुगतान प्रणाली में एमडीआर (एमडीआर): भुगतान एवं निपटान प्रणाली अधिनियम में संशोधन के माध्यम से यूपीआइ/इलेक्ट्रानिक भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट की अनुमति से वीजा और मास्टरकार्ड जैसी विदेशी कंपनियों को फिर से भारतीय बाजार में बढ़त मिल सकती है।

अमेरिकी कंपनियों के बहिष्कार का आह्वान

अमेरिकी सोशल मीडिया प्लेटफार्म्स द्वारा सामाजिक अशांति फैलाने के अनैतिक प्रयासों का हवाला देते हुए एसजेएम ने केंद्र सरकार से ऐसी तकनीकी कंपनियों पर तत्काल प्रतिबंध लगाने की मांग की है। इसके साथ ही देशभक्त नागरिकों से अपील की गई है कि वे अमेरिकी ई-कामर्स, टेक व पेय पदार्थों का बहिष्कार कर स्वदेशी का संकल्प लें।

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