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सत्येंद्र जैन की गिरफ्तारी मामले पर कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा, AAP नेता बोले- पंजाब चुनाव के चलते हुई कार्रवाई

Published: Wed, 19 Aug 2026 12:19 PM (IST)Updated: Wed, 19 Aug 2026 03:31 PM (IST)

दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (ACB) ने दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से जुड़े कथित भ्रष्टाचार मामले ...और पढ़ें

HighLights

  1. पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन को ACB ने किया गिरफ्तार।

  2. दिल्ली जल बोर्ड सीवेज प्लांट भ्रष्टाचार मामले में कार्रवाई।

  3. बुधवार सुबह राउज एवेन्यू कोर्ट में पेशी हुई।

जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा (एसीबी) द्वारा गिरफ्तार किए गए आम आदमी पार्टी के नेता और दिल्ली के पूर्व मंत्री सत्येंद्र जैन और चार अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी मामले में राऊज एवेन्यू कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रखा है। उन्हें आज यहां कोर्ट में पेश किया गया था।

एसीबी ने अदालत से सत्येंद्र जैन की न्यायिक हिरासत की मांग की थी, वहीं आरोपी अंकित की पुलिस कस्टडी की डिमांड रखी। इस दौरान सत्येंद्र जैन की पत्नी पूनम जैन भी अदालत पहुंचीं थी।

आप नेता को एसीबी ने एसीबी की टीम ने दिल्ली जल बोर्ड के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) टेंडर घोटाले में एक्शन लेते हुए आप नेता को मंगलवार रात को गिरफ्तार किया था।

क्या बोले सत्येंद्र जैन?

कोर्ट में पेशी के दौरान जब पत्रकारों ने सत्येंद्र जैन से उनकी गिरफ्तारी को लेकर सवाल पूछे तो उन्होंने कहा कि पंजाब में चुनाव आ रहा है, इसलिए मेरी गिरफ्तारी हुई है।

कौन से घोटाले में हुए गिरफ्तार?

मई 2024 में दर्ज एफआईआर के तहत कार्रवाई करते हुए एसीबी ने दिल्ली जल बोर्ड सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट अपग्रेडेशन घोटाले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया है।

एसीबी के संयुक्त आयुक्त विक्रमजीत सिंह के अनुसार, सतर्कता निदेशालय की शिकायत के बाद शुरू हुई जांच में टेंडर प्रक्रिया में बड़े पैमाने पर धांधली और आपराधिक साजिश का खुलासा हुआ है।

घोटाले के मुख्य आरोपी और गिरफ्तारी

सत्येंद्र जैन: दिल्ली सरकार के तत्कालीन जल मंत्री
उदित प्रकाश राय: दिल्ली जल बोर्ड के तत्कालीन सीईओ (IAS अधिकारी)
अंकित श्रीवास्तव: तत्कालीन अस्थायी कंसल्टेंट
राजा कुमार कुर्रा: मेसर्स यूरोटेक एनवायरमेंट प्रा. लि. के मालिक
नागेंद्र यादव: मेसर्स एएन एंटरप्राइजेज के प्रोपराइटर
पंकज वर्मा: मेसर्स सृजनहार के प्रोपराइटर

ऐसे रचा गया पूरा घोटाला

पसंदीदा कंपनी को फायदा: सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के अपग्रेडेशन टेंडर में जानबूझकर ऐसी सख्त और मनमानी शर्तें जोड़ी गईं, जिससे केवल 'मेसर्स यूरोटेक एनवायरमेंट' ही पात्र हो सके और बाकी कंपनियां रेस से बाहर हो जाएं।

बिना स्टडी के बदले नियम: बिना किसी पायलट स्टडी के तकनीकी शर्तों में बदलाव किए गए, जिससे सरकारी खजाने पर भारी वित्तीय बोझ पड़ा।

पहले से लीक की गईं शर्तें: वॉट्सएप, ईमेल और डिजिटल साक्ष्यों की जांच से साफ हुआ कि टेंडर की शर्तें और संशोधन आधिकारिक तौर पर जारी होने से पहले ही अधिकारियों और निजी कंपनियों के बीच साझा किए जा रहे थे।

1.52 करोड़ की रिश्वत और मनी ट्रेल का खुलासा

वित्तीय जांच में सामने आया कि टेक्नोलॉजी प्रोवाइडर कंपनी 'यूरोटेक' से रिश्वत का पैसा बिचौलिया फर्म 'एएन एंटरप्राइजेज' में भेजा गया। इसके बाद एएन एंटरप्राइजेज और 'सृजनहार' जैसी शेल कंपनियों के जरिए तत्कालीन सीईओ उदित प्रकाश राय और उनके रिश्तेदारों के बैंक खातों में कुल 1.52 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए। इस रिश्वत के पैसे का इस्तेमाल अचल संपत्तियां खरीदने में किया गया था।

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