दिल्ली के भाटी गांव में वन भूमि पर कब्जे का आरोप, NGT ने लिया संज्ञान; वन विभाग से मांगी विस्तृत रिपोर्ट
राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दक्षिणी दिल्ली के भाटी गांव में वन भूमि पर अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों का संज्ञान लिया है। अधिकरण ने वन विभाग को ...और पढ़ें

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने दक्षिणी दिल्ली के भाटी गांव में वन भूमि पर अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों का संज्ञान लिया है।
HighLights
एनजीटी ने भाटी गांव वन भूमि अतिक्रमण पर संज्ञान लिया।
वन विभाग को मौके का सत्यापन कर रिपोर्ट देने का निर्देश।
याचिकाकर्ता ने अधूरे सीमांकन का लाभ उठाने का आरोप लगाया।
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। दक्षिणी दिल्ली के भाटी गांव में वन भूमि पर अतिक्रमण और निर्माण गतिविधियों के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने संज्ञान लेते हुए संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। अधिकरण ने वन विभाग को मौके का सत्यापन कर वन भूमि की स्थिति पर विस्तृत रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
एनजीटी के प्रधान पीठ के अध्यक्ष न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव और विशेषज्ञ सदस्य डा. अफरोज अहमद की पीठ ने शैलेंद्र की ओर से दाखिल आवेदन पर सुनवाई की। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि भाटी गांव में वन भूमि की सीमा का टाटीमा के माध्यम से सीमांकन पूरा नहीं होने का फायदा उठाकर कुछ व्यक्ति और समूह वन क्षेत्र पर कब्जा कर निर्माण करा रहे हैं।
टाटीमा राजस्व रिकॉर्ड का वह नक्काशीदार दस्तावेज या टुकड़ा होता है, जो मुख्य खसरे से अलग की गई या बांटी गई जमीन की हदबंदी को दर्शाता है।
याचिकाकर्ता की ओर से बताया गया कि भाटी गांव के खसरा नंबर 961 और 963 के कुछ हिस्से वन भूमि के रूप में अधिसूचित हैं। सुनवाई के दौरान विशेष कार्यबल (एसटीएफ) की रिपोर्ट का हवाला देते हुए वन भूमि का ब्योरा भी अधिकरण के समक्ष रखा गया।
इसके अनुसार, खसरा नंबर 961 का कुल क्षेत्रफल 15 बीघा सात बिस्वा है, जिसमें करीब सात बीघा 13 बिस्वा हिस्सा वन भूमि के अंतर्गत आता है। वहीं, खसरा नंबर 963 का कुल क्षेत्रफल 12 बीघा 16 बिस्वा है, जिसमें करीब दो बीघा 8 बिस्वा वन भूमि है।